राजस्थान में संत दादू की मोक्ष स्थली भैराना में सैकड़ों बीघा जमीन में चंद उद्योगपतियों को ख़ुश करने के लिए लाखों पेड़ काट दिए है तीन महीनों से लगातार संतों का धरना जारी है उसी तर्ज़ पर उत्तराखंड में हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में लोग पेड़ों से चिपककर आंदोलन कर रहे हैं, तो मध्य प्रदेश में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों को बचाने के लिए नागरिक सड़कों पर लेट रहे हैं। यह दृश्य बेहद पीड़ादायक है।
एक ओर देश प्रदूषण, बढ़ते तापमान और जहरीली हवा से जूझ रहा है, दूसरी ओर भाजपा सरकार विकास के नाम पर हरियाली का सफाया कर रही है। विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं, लेकिन सरकार ने संवेदनशीलता की जगह बुलडोज़र की सोच अपना ली है।
पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का जीवन हैं। सरकार को पर्यावरण विरोधी नीतियों पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए और अनावश्यक पेड़ों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए।
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झुकी सरकार — संतों की मांगे हुई स्वीकार। 🚩
जनभावनाओं, आस्था और संत समाज के स्वाभिमान की इस लड़ाई में दृढ़ता से खड़े रहने वाले
@hanumanbeniwal जी को हृदय की गहराइयों से साधुवाद।
यह केवल एक जीत नहीं…
यह संत शक्ति, जनशक्ति और सत्य के संकल्प की विजय है।
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रीको द्वारा चल रहा कार्य बंद, जयपुर कूच स्थगित।
“सरकार को हमने इस मुद्दे पर सहमत कर लिया है। सरकार आज ही कार्य रोकने के आदेश जारी कर रही है। करीब 800 बीघा भूमि पर चल रहा कार्य अब बंद रहेगा और आगे कोई काम नहीं किया जाएगा।
साधु-संतों, प्रशासन और प्रतिनिधियों की पांच सदस्यीय कमेटी गठित होगी। 10 दिनों में पहली बैठक होगी। पर्यावरण और पर्यटन पहलुओं को ध्यान में रखकर कमेटी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद साधु-संतों की सहमति से रीको मामले में आगे कार्रवाई होगी। प्रक्रिया में 15-20 दिन लगेंगे और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करवाई जाएगी।
आज जयपुर जिले में स्थित भैराणा धाम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये RLP परिवार के सदस्यों ने आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी |
हम मजबूती से साधु - संतो के साथ खड़े है |
क्या भैराना के मामले मे इन पत्रो के कुछ मायने है?
मुख्यमंत्री से लेकर RIICO के एमडी कुछ नही कह सके
भारत सरकार उद्योग पति को जमीन देने का वायदा कर चुकी है प्रदेश के नेताओं की कोई बुकत नही।
भैराना को बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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निर्गुण भक्ति धाराओं के संत दादू दयाल जी महाराज के निर्वाण दिवस पर कोटि कोटि वंदन।
आपने 16वीं सदी मे निराकार ईश्वर, आंतरिक प्रेम, आडंबरहीन जीवन और प्रेमपूर्ण व्यवहार को अपनाने का उपदेश दिया। उनका मूल दर्शन था कि ईश्वर एक है और सभी मनुष्यों में समान रूप से वास करता है।
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यदि सनातन साधना के 500 वर्ष प्राचीन स्थान दादू दयाल भैराणा धाम, प्रकृति, पर्यावरण और वन्य जीव का विनाश करके ही औद्योगिक विकास करना है तो ऐसा विकास तो सनातन धर्म का विनाश ही सिद्ध होगा
चौपाल के दौरान उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा का विरोध करते हुए साधु संत व ग्रामीण बोराज के लोग।
पिछली 25 दिनों से संत महात्मा तपोवन जंगल, प्रकृति, पर्यावरण और वन्य जीवो को बचाने के लिए आंदोलन धरने पर बैठे हुए हैं लेकिन भाजपा सरकार अभी तक कोई सुनवाई नहीं कर रही है
दूदू के बौराज गांव में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की रात्रि चौपाल के दौरान हंगामा
भैराणा धाम को लेकर जारी आंदोलन के बीच गुस्साए साधु-संतों का विरोध
धरोहर और पर्यावरण संरक्षण की मांग पर साधु कर रहे अग्नि तप
पहले भी बैरवा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर विकास का दिया था आश्वासन
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