Gurgaon rains remind us that in India even money can’t buy you safety 🙏
As children are left stranded on roads as buses broke down
Parents were called to fetch their kids on their own
This can’t get worse than this for the city of future, our Gurugram 🙏🙏
#Order
🌧️ बारिश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं डीसी श्री उत्तम सिंह ने जारी किए आदेश, जलभराव वाले रास्तों पर स्कूल बसें नहीं चलेंगी
➡️ गुरुग्राम में मानसून के दौरान स्कूल बसों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
➡️ जलभराव घोषित मार्ग पर स्कूल बस भेजने पर रोक, सुरक्षित वैकल्पिक रूट का करना होगा इस्तेमाल।
➡️ सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग नहीं होने पर बच्चों को स्कूल परिसर में ही सुरक्षित रखा जाएगा और अभिभावकों को तत्काल सूचना दी जाएगी।
➡️ ट्रैफिक पुलिस बारिश के दौरान स्कूल रूट की स्थिति की रियल-टाइम जानकारी स्कूलों को देगी।
➡️ भारी बारिश या IMD अलर्ट के दौरान हरियाणा रोडवेज की अतिरिक्त बसें स्टैंडबाय रहेंगी, ताकि जलभराव में फंसी स्कूल बसों से बच्चों को सुरक्षित निकाला जा सके।
➡️ किसी बच्चे को जलभराव वाले अथवा सुनसान बस स्टॉप पर नहीं उतारा जाएगा। बच्चे को केवल अभिभावक/अधिकृत संरक्षक को सौंपा जाएगा।
➡️ हर स्कूल में Transport In-charge/Route Safety Officer नियुक्त करना अनिवार्य।
➡️ स्कूल बस रूट और स्कूल गेट के आसपास जलभराव हटाने को डिवॉटरिंग एजेंसियां देंगी पहली प्राथमिकता।
➡️ आदेश तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक अथवा आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
#Gurugram #BreakingNews #DDMA #SchoolBus #Rain #Waterlogging #StudentSafety
#Order
🌧️ बारिश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं डीसी श्री उत्तम सिंह ने जारी किए आदेश, जलभराव वाले रास्तों पर स्कूल बसें नहीं चलेंगी
➡️ गुरुग्राम में मानसून के दौरान स्कूल बसों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
➡️ जलभराव घोषित मार्ग पर स्कूल बस भेजने पर रोक, सुरक्षित वैकल्पिक रूट का करना होगा इस्तेमाल।
➡️ सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग नहीं होने पर बच्चों को स्कूल परिसर में ही सुरक्षित रखा जाएगा और अभिभावकों को तत्काल सूचना दी जाएगी।
➡️ ट्रैफिक पुलिस बारिश के दौरान स्कूल रूट की स्थिति की रियल-टाइम जानकारी स्कूलों को देगी।
➡️ भारी बारिश या IMD अलर्ट के दौरान हरियाणा रोडवेज की अतिरिक्त बसें स्टैंडबाय रहेंगी, ताकि जलभराव में फंसी स्कूल बसों से बच्चों को सुरक्षित निकाला जा सके।
➡️ किसी बच्चे को जलभराव वाले अथवा सुनसान बस स्टॉप पर नहीं उतारा जाएगा। बच्चे को केवल अभिभावक/अधिकृत संरक्षक को सौंपा जाएगा।
➡️ हर स्कूल में Transport In-charge/Route Safety Officer नियुक्त करना अनिवार्य।
➡️ स्कूल बस रूट और स्कूल गेट के आसपास जलभराव हटाने को डिवॉटरिंग एजेंसियां देंगी पहली प्राथमिकता।
➡️ आदेश तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक अथवा आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
#Gurugram #BreakingNews #DDMA #SchoolBus #Rain #Waterlogging #StudentSafety
हमें हिसाब दिजिए पार्ट -3 आ गया है मेरे दोस्तों
सुनिए इस सच्चाई से भरे हुए सवाल पुछते हुए गाने को जो आपके रोंगटे खड़ा कर देगा.
एक सवाल है दोस्तों, जबाब जरूर दिजिएगा
हम तो तिरंगा आसमान में लहराएगा… मगर क्या ज़मीन पर भी आज़ादी उतरी है?
आज 15 अगस्त है।
हवाओं में जश्न की तैयारी है,
हर तरफ़ तिरंगे की शान है…
लेकिन दिल में एक सवाल आज भी ज़िंदा है—
क्या हमें वही भारत मिला, जिसका सपना भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और रामप्रसाद बिस्मिल ने देखा था?
हम आसमान में तिरंगा पूरी शान से लहराएँगे।
राष्ट्रगान गाएँगे।
देशभक्ति के नारे लगाएंगे।
लेकिन ज़मीन की इस कड़वी हकीकत को कैसे झुठलाएँगे?
गोरे अंग्रेज़ चले गए…
लेकिन क्या हर भारतीय सचमुच आज़ाद हो गया?
आज भी आम आदमी महंगाई, बेरोज़गारी और असुरक्षा के बीच अपने सपनों को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है।
मिडिल क्लास टैक्स देता है,
ईमानदारी से मेहनत करता है,
बच्चों की पढ़ाई और घर के भविष्य के लिए बचत करता है फिर भी हर साल उसके सपनों की कीमत बढ़ती जाती है और उसकी क्रय शक्ति घटती जाती है।
किसान सवाल लेकर खड़ा है।
युवा नौकरी के इंतज़ार में है।
मजदूर अपनी मेहनत की सही कीमत चाहता है।
मिडिल क्लास अपने हिस्से की राहत तलाश रहा है।
और लोकतंत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है
जिस आज़ादी के लिए हमारे क्रांतिकारियों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, क्या उस आज़ादी का मतलब सिर्फ़ सत्ता बदलना था?
भगत सिंह का सपना सिर्फ़ अंग्रेज़ों को भगाना नहीं था।
आज़ाद का सपना सिर्फ़ विदेशी हुकूमत हटाना नहीं था।
बिस्मिल की कुर्बानी सिर्फ़ सत्ता हस्तांतरण के लिए नहीं थी।
उनका सपना था..
एक ऐसा भारत जहाँ इंसान की कीमत उसकी जाति, धर्म, हैसियत या जेब से नहीं, बल्कि उसकी इंसानियत और अधिकारों से तय हो।
इसलिए आज तिरंगे को सलाम करते हुए हमें सिर्फ़ जश्न नहीं मनाना चाहिए
खुद से सवाल भी करना चाहिए।
क्योंकि देश से सवाल करना देशद्रोह नहीं,
लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी है।
हमें अपने शहीदों से सिर्फ़ उनकी तस्वीरों पर फूल चढ़ाकर नहीं,
बल्कि उनके सपनों को ज़िंदा रखकर श्रद्धांजलि देनी होगी।
गोरे अंग्रेज़ चले गए
अब उस व्यवस्था के काले सच का हिसाब कौन देगा?
अधूरे वादों का हिसाब कौन देगा?
युवा के टूटते सपनों का हिसाब कौन देगा?
मिडिल क्लास की घटती क्रय शक्ति का हिसाब कौन देगा?
किसान और मजदूर की बेचैनी का हिसाब कौन देगा?
और सबसे बड़ा सवाल....
क्या 15 अगस्त सिर्फ़ कैलेंडर की तारीख़ है, या हर भारतीय के जीवन में बराबरी, सम्मान, न्याय और अवसर की आज़ादी का नाम भी है?
तिरंगा आसमान में लहरता रहे....
और उसके साथ भारत के हर नागरिक का सिर भी ऊँचा रहे। 🇮🇳
यही उन शहीदों के सपनों वाले भारत की असली आज़ादी होगी।
जय हिंद। 🇮🇳
इंकलाब ज़िंदाबाद।
पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा रिपोस्ट करें और उन नेताओं तथा नौकरशाह से सवाल जरूर पुछे।
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