दैनिक भास्कर ने बिलासपुर संस्करण के 29वें स्थापना दिवस पर इतिहास रचा। करीब 12 टन वजनी ट्रेन पार्ट्स और स्क्रैप से 60 चौड़ा व 12 फीट लंबा मास्टहैड तैयार किया गया। इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।https://t.co/Kx1tU0I1dJ
बच्चों की कोरोना वैक्सीन पर दैनिक भास्कर का देश में सबसे बड़ा सर्वे
भास्कर के सर्वे में भाग लीजिए क्योंकि सर्वे के 5 सवालों के जवाब आपकी किसी भी आशंका को सीधे सरकार तक पहुंचाएंगे।
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On the Occasion of 12th Anniversary of Dainik Bhaskar Bhilai Edition, We have come up with 88 pager Special Edition News paper. AS Bhilai is also known as Steel City, we have come up of new innovation of Writing Dainik Bhaskar with Steel on newspaper https://t.co/iiEkbo6ktV
आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे भास्कर ने पाठकों के नजरिये से छत्तीसगढ़ के अनदेखे पहलू दिखाये। चार दिन में हमें राज्यभर से करीब 500 तस्वीरें मिलीं। देखिए कुछ चुनिंदा फोटोग्राफ... #WorldPhotographyDay2021
आरटीओ में वसूली होती है यह सभी जानते हैं इसका खुलासा करने के लिए हमने एक ट्रांसपोर्टर से एजेंट की बात करवाई। पूरी रिकॉर्डिंग प्रकाशित की और जिन जिन के भी नाम आए उन सब से बातचीत की तो जाहिर है वसूली का खुला खेल सामने आ गया
सरकारी योजना मैं सभी को 5 लाख तक का इलाज मुफ्त किया जाना है लेकिन अफसरों की मिलीभगत के कारण ज्यादातर अस्पतालों में यह योजना लागू ही नहीं हो पाई
कोरोना के जो मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके कार्ड फेंक दिए गए और लाखों की वसूली की गई
कोरोना से बच्चों को अगर बचाना है तो उसकी बुनियादी जरूरत क्या है? इसकी पड़ताल चौंकाने वाले हैं। बच्चों के मास्क और ऑक्सीमीटर हमारे पास हैं ही नहीं। हमने दवाइयों को लेकर बात की तो भी चौंकाने वाला खुलासा कि ड्रग यूज की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
बाजार में 4200 का मिलने वाला मेडिकल किट कोटा की सभी पंचायतों को ₹40000 तक में भेज दिया गया जब भेजने वाली एजेंसी से पूछा तो उन्होंने कहा कि जनपद अध्यक्ष और सीईओ के कहने पर यह किट सभी को भेजा गया है
सीबीएसई ने देश भर में 12 वीं परीक्षा रद्द कर दी है, कई राज्यों ने अपने बोर्ड एग्जाम भी रद्द कर दिया है लेकिन छत्तीसगढ़ में ली जा रही, शिक्षाविदों ने इसका पुरजोर विरोध किया है, हमने उनके स्टैंड के साथ यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की है
कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चों के प्रभावित होने की संभावना है। ऐसे में बाजार में उनके लिए न मास्क हैं और न ही ऑक्सीमीटर। ऐसे में बच्चों की बीमारी की पहचान और इलाज कैसा होगा, बड़ा सवाल है।
कोरोना काल में निजी अस्पतालों ने सरकारी पैकेज तय होने के बावजूद इलाज के नाम पर मनमाने तरीके से पैसे वसूले हैं। शासन ने इसके लिए मानिटरिंग कमेटी भी बनाई थी, लेकिन अस्पतालों के खिलाफ एक्शन लेने के बजाय सेटलमेंट करवाया गया। कई मरीज के परिजनों ने ज्यादा बिल के खिलाफ शिकायत तक नहीं थी