श्री सीतारामाभ्यां नम:
राम नाम दिसि जानकी लखन दाहिनी ओर
ध्यान सकल कल्यानमय सुरतरु तुलसी तोर
भगवान् श्रीराम जी की बायीं ओर श्री जानकी जी और दाहिनी ओर श्री लक्ष्मण जी हैं यह ध्यान सम्पूर्ण रूप से कल्याणमय है। हे तुलसी तेरे लिये तो यह मनमाना फल देने वाला कल्पवृक्ष है।
#dohawali
अहंकार की आड़ होने से ईश्वर नहीं दीख पड़ते। अहम बुद्धि के जाते ही सब जंजाल दूर हो जाते हैं, पर मैं प्रभु का दास हूं, मैं उनकी संतान हूं, मैं उनका अंश हूँ, ये सतत् अहंकार अच्छे हैं। ऐसे अभिमान से भगवान मिलते हैं। हरि ॐ 🙏🙏
पूर्व दिशा में जितना ही चलोगे पश्चिम दिशा उतनी ही दूर होती जाएगी। इसी प्रकार धर्म पथ पर जितना ही अग्रसर होओगे, संसार उतना ही दूर पीछे छूटता जाएगा। हरिओम 🙏🙏
जो ईश्वर में नित्य डूबा रहता है, उसकी प्रेमाभक्ति कभी नहीं सूखती। परंतु दो एक दिन की भक्ति से ही जो संतुष्ट तथा निश्चिंत रहता है, सीके पर रखे हुए रिसते घड़े के जल के समान वह भक्ति दो दिन बाद ही सूख जाती है। ॐ नमो नमः 🙏🙏