लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते लेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
111 दिन तक माँ गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो॰ जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिंपिक रेसलर हों,
हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फ़िर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन,
इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख़्शा…
इनकी नज़र में कोई भी अगर आवाज़ उठाता है तो वह "Anti-National" है, "परजीवी" है !
जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।
कोटा और देहरादून से "छात्रों की गूँज" का आगाज़ हो चुका है…दिल्ली की दहलीज़ तक ज़रूर पहुँचेगी !!
The entire country is concerned about the deteriorating health of Shri @Wangchuk66, who has been on a hunger strike at Jantar Mantar for 19 days. I humbly appeal to him to end his fast. His life is invaluable for the long fight for the youth and the environment.
Shri @RahulGandhi has been continuously raising his voice across the country on the issue of paper leaks, and the Congress party has been demanding the resignation of the Education Minister from the very beginning. It is unfortunate that in the land of Gandhi, a Satyagrahi has given up food for 19 days, yet the Modi government has not even taken the initiative to hold a dialogue.
The @INCIndia party will continue to fight this battle for the interests of the students with full strength, from the streets to the Parliament.
जंतर-मंतर पर 19 दिनों से अनशनरत श्री सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर पूरा देश चिंतित है। मेरी उनसे विनम्र अपील है कि वे अपना अनशन समाप्त करें। उनका जीवन युवाओं एवं पर्यावरण की लंबी लड़ाई के लिए अनमोल है।
श्री राहुल गांधी पूरे देश में पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रहे हैं एवं कांग्रेस पार्टी शुरू से ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि गांधीजी के देश में एक सत्याग्रही 19 दिनों से अन्न त्यागकर बैठा है और मोदी सरकार ने संवाद की पहल तक नहीं की।
कांग्रेस पार्टी छात्रहित की यह लड़ाई सड़क से संसद तक पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी।
हमारी कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में शांति बनाए रखने, युवाओं को नशे से बचाने और अपराधों पर लगाम कसने के उद्देश्य से रात 8 बजे के बाद शराब बिक्री पर सख्त पाबंदी का निर्णय लिया था, जिसके बहुत सकारात्मक परिणाम भी सामने आए थे।
जोधपुर में इसी नियम की सख्ती से पालना सुनिश्चित करवाने वाले पुलिस कमिश्नर का महज कुछ महीनों में शराब माफिया के दबाव में अचानक तबादला कर देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार के ऐसे फैसले से पूरे प्रदेश की पुलिस और शराब माफिया में यह साफ संदेश गया है कि वर्तमान सरकार में कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं है और सिस्टम पर माफिया पूरी तरह हावी है तथा 8 बजे शराब की दुकान बन्द करने के आदेश को लागू नहीं करना है।
यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है। क्या अब प्रदेश में नीतियां जनता के हित में नहीं, बल्कि माफियाओं के मुनाफे और दबाव में तय होंगी?
राजस्थान की भाजपा सरकार के मात्र दो वर्षों में ही 8.4 लाख से अधिक स्कूल ड्रॉपआउट होना बेहद चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब निजी स्कूलों में नामांकन सरकारी स्कूलों से आगे निकल गया है। यह प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की गिरती साख का सीधा प्रमाण है।
विडंबना देखिए, इस अवधि में शिक्षकों की संख्या 7.8 लाख से बढ़कर 7.9 लाख से अधिक हुई, फिर भी कुप्रबंधन के कारण सरकारी स्कूलों ने 9.3 लाख से अधिक छात्र खो दिए। आज राजस्थान में सिर्फ स्कूलों की छतें ही नहीं गिर रहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र पर जनता का जो बरसों पुराना विश्वास था, वो भी गिर रहा है।
शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना, स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर दरकना, रिपेयरिंग ठप होना और शिक्षा में सुधार के बजाय पाठ्यक्रम का लगातार राजनीतिकरण करना ही इस पतन का कारण है। जब शिक्षा मंत्री का ध्यान शिक्षा छोड़कर बाकी सब जगह रहेगा, तो यही स्थिति होनी थी।
हमारी कांग्रेस सरकार ने अंग्रेजी मीडियम स्कूलों सहित जिस बेहतरीन सरकारी शिक्षा मॉडल को खड़ा किया था, उसे इस सरकार की अदूरदर्शिता ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। मुख्यमंत्री जी, राजस्थान के नौनिहालों के इस छिनते भविष्य का जिम्मेदार कौन है?
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकारी कार्यक्रमों में भी भाजपा नेता बनकर ही व्यवहार करते हैं। आज प्रधानमंत्री जी ने रिफाइनरी के उद्घाटन पर कहा कि 2018 से 2023 तक कांग्रेस सरकार के दौरान रिफाइनरी का काम ठप रहा और भाजपा के ढाई साल में पूरा काम हुआ। ऐसी बातें सुनने में हास्यास्पद लगती हैं।
प्रधानमंत्री जी, आपको रिफाइनरी के काम से जुड़े लोगों से पूछना चाहिए था। वे आपको बताते कि कांग्रेस सरकार में कोविड जैसी मुश्किल परिस्थिति में भी यहां काम नहीं रुका और रिफाइनरी का 85% काम 2018 से 2023 के बीच पूरा हुआ। भाजपा सरकार ने तो बजट में अगस्त 2025 तक काम पूरा करने की घोषणा की थी जो करीब एक साल देरी से हुआ है।
@narendramodi@PMOIndia
आज राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि प्रदेश की पहली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी का उद्घाटन आज होने जा रहा है।
मुझे संतोष है कि हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई परियोजना आज क्रियाशील होने जा रही है।
2008 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही राज्य में रिफाइनरी लगाने के गंभीर प्रयास शुरू किए गए। यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के विशेष सहयोग के कारण राजस्थान को रिफाइनरी मिल सकी। इस दौरान पेट्रोलियम मंत्री रहे श्री मुरली देवड़ा और श्री वीरप्पा मोइली के साथ लगातार संपर्क रखकर एचपीएसीएल को रिफाइनरी के लिए सहमत किया गया।
वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं पेट्रोलियम मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि राजनीतिक कारणों से पांच साल तक रिफाइनरी का काम बन्द रहा जिससे इसकी लागत बढ़ती गई। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद रिफाइनरी के काम को प्राथमिकता पर शुरू किया गया एवं कोविड जैसी विपरीत परिस्थिति के बावजूद लगभग 85 प्रतिशत काम कांग्रेस सरकार में पूरा किया गया।
कांग्रेस सरकार का विजन रिफाइनरी के साथ पेट्रो केमिकल जोन बनाने का था जिसमें रिफाइनरी से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट्स के प्लास्टिक आधारित उद्योग लगें जिससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। कांग्रेस सरकार के दौरान इसके लिए जमीन आवंटन भी किया गया परन्तु अभी यह ठंडे बस्ते में है। आज रिफाइनरी के उद्घाटन के साथ इस पेट्रो केमिकल जोन का काम तेजी से शुरू किया जाए और इसे राजस्थानी लोगों के लिए आरक्षित किया जाए जिससे बाहर के व्यवसायियों की बजाय स्थानीय लोगों को प्लास्टिक आधारित उद्योग लगाने एवं रोजगार में प्राथमिकता मिल सके।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वयं के राज्य की इतनी बड़ी परियोजना पचपदरा रिफाइनरी के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मीडिया के समक्ष उनका यह दावा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत है। पूर्व में रिफाइनरी में केन्द्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर वे गलत बयानी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री श्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है।
इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई।
राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। सामान्यतः रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, परंतु एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% (छब्बीस प्रतिशत) की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है।
मुख्यमंत्री जी को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें।
राजस्थान में सरकारी भुगतान तंत्र पूरी तरह ठप हो चुका है। वित्तीय कुप्रबंधन के चलते आज कर्मचारी, पेंशनर, दुर्घटना पीड़ित परिवार, अस्पताल और छोटे ठेकेदार अपने वाजिब भुगतान के लिए भटक रहे हैं। प्रदेश के इतिहास में ऐसा संकट पहले कभी नहीं देखा गया।
RGHS का भुगतान अटकने से कैशलेस योजना में मरीजों को जेब से पैसे देने पड़ रहे हैं। चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा के स्वीकृत दावों का पैसा महीनों से पीड़ित परिवारों को नहीं मिला है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी-GPF और सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी लंबित है।
इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस अनावश्यक संकट को गंभीरता से लें और समय रहते त्वरित निर्णय लेकर प्रदेश के लाखों परिवारों को राहत प्रदान करें।
@RajCMO
कल 4 जुलाई को प्रधानमंत्री के दौरे की आड़ में जिला मुख्यालयों पर युवाओं को जुटाकर जॉइनिंग लेटर बांटने का जो भद्दा तमाशा रचा जा रहा है, वह युवाओं के स्वाभिमान पर चोट है।
जिला प्रशासन को लक्ष्य देकर भीड़ इकट्ठी करना, उनके आने, जाने और खाने के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग कर राजनीति करना अनैतिक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजस्थान की भाजपा सरकार कान खोलकर सुन ले- आप युवाओं को नौकरी देकर कोई 'एहसान' नहीं कर रहे हैं। इन युवाओं ने दिन-रात मेहनत करके कंप्टीशन पास कर अपना हक प्राप्त किया है। हमारी सरकार ने भी रिकॉर्ड लाखों नौकरियां दीं, लेकिन अपनी पीठ थपथपाने के लिए कभी युवाओं का ऐसा राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया।
शर्मनाक बात यह है कि प्रदेश में भर्तियां समय पर पूरी नहीं हो रहीं, जो कैलेंडर जारी किए गए उनके अनुरूप परीक्षाएं नहीं हो रही हैं, लेकिन वीआईपी दौरों के नाम पर इनके नौटंकीनुमा इवेंट एकदम समय पर हो जाते हैं। वाहवाही लूटने के लिए मंच से फोटो खिंचवाकर लेटर तो बांट दिए जाते हैं, पर वास्तविक जॉइनिंग के लिए युवा महीनों दर-दर भटकते रहते हैं।
पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार से लेकर वर्तमान भाजपा सरकार तक, भाजपा ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सर्कस और सरकारी सिस्टम को मजाक बनाकर रख दिया है। राजस्थान का युवा इस झांसा तंत्र को देख रहा है और वक्त आने पर इस एहसान जताने के अपमान का करारा जवाब देगा।
कुछ दिन पहले सिविल लाइंस आवास पर आए एक एसी मैकेनिक ने गर्व से बताया कि उनकी माताजी, जो मनरेगा में मजदूरी करती हैं, कांग्रेस सरकार की 'इन्दिरा गांधी स्मार्टफोन योजना' के माध्यम से डिजिटल दुनिया से जुड़ चुकी हैं।
उनके आग्रह पर वीडियो कॉल के जरिए निवाई (टोंक) निवासी श्रीमती यशोदा कुमावत और उनकी साथी महिला श्रमिकों से बातचीत हुई। बातचीत में उनकी पीड़ा और अपेक्षाएँ साफ़ झलकीं। उनका एक ही कहना था-"हमें वीबी-जी राम जी योजना नहीं, मनरेगा चाहिए।"
वे चाहती हैं कि मनरेगा में काम के दिनों की संख्या बढ़े, समय पर रोजगार मिले और जनहितकारी योजनाओं को फिर से प्रभावी बनाया जाए।
आज से भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी जी के नाम पर यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना का नाम बदलकर 'वीबी-जी राम जी योजना' कर दिया है। श्रमिकों में चिंता है कि कहीं यह बदलाव केवल नाम तक सीमित न रह जाए, बल्कि उनके रोजगार के अधिकार और काम की उपलब्धता पर भी असर डाले। उनकी स्पष्ट मांग है-नाम बदलने से नहीं, काम बढ़ाने से मजदूरों का जीवन बदलेगा।
घुमंतू समाज हमारे सबसे कमजोर वर्गों में से एक है। इनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के बजाय, पुलिस द्वारा इन पर आंसू गैस के गोले छोड़ना और लाठीचार्ज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। राज्य सरकार यह समझने में विफल रही है कि विवादों और समस्याओं का वास्तविक हल केवल बातचीत से ही निकलता है।
प्रशासनिक अधिकारियों को इनके प्रतिनिधिमंडल से मिलकर समय रहते बात करनी चाहिए थी, ताकि ऐसी नौबत ही न आए कि उनका यह आंदोलन बेकाबू हो जाए। जयपुर में होने वाले इस प्रदर्शन की सभी को पूर्व जानकारी थी; इसके बावजूद ऐसी अप्रिय स्थिति का उत्पन्न होना सीधे तौर पर सरकार की अनुभवहीनता को दर्शाता है।
यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार ने आज हरियाणा के साथ नया MOA किया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस समझौते में किन शर्तों पर सहमति बनी है।
करीब ढाई वर्ष पूर्व (17 फरवरी 2024) किए गए MoU को भी लोकसभा चुनावों तक छिपाकर रखा गया था। बाद में सामने आया कि उसमें पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी देने और शेष पानी राजस्थान को मिलने की शर्त थी।
यदि नए MOA में भी ऐसा है, तो यह 1994 के मूल समझौते की भावना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि यमुना जल का वितरण सभी राज्यों को 'Pro Rata Basis' (उपलब्ध जल के अनुपात) में होगा। किसी एक राज्य को प्राथमिकता या एकतरफा अधिकार नहीं है।
मेरी मांग है कि आज हस्ताक्षरित नए MOA की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए। जनता से ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ छिपाना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है। राजस्थान के हित सर्वोपरि हैं और हमारे जल अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रदेश काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जी के अनुमोदन के उपरांत जिला कांग्रेस कमेटी जोधपुर ग्रामीण की कार्यकारिणी की घोषणा की गई जिसमें मुझे जिला प्रवक्ता पद की अहम जिमेदारी देने पर शीर्ष नेतृत्व का हार्दिक आभार । #congress
कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।
प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी गिरावट और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ शहर में सरकारी आयोजन और वीआईपी दौरों की चमक बिखेरी जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ हमारी माताओं-बहनों की जिंदगी खतरे में थी और प्रशासन सच्चाई छुपाने में जुटा रहा।
आज जोधपुर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात करूंगा।
आज कोटा की ऐतिहासिक धरती से युवाओं का भविष्य बचाने के लिए #छात्रों_की_गूंज महारैली के रूप में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है।
तमाम अड़चनों के बावजूद उमड़े हज़ारों छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के बीच हमारे नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों, पेपर लीक और व्यवस्थागत विफलताओं पर खुलकर संवाद किया।
यह कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि उन लाखों नौजवानों की बुलंद आवाज़ थी जो सरकारी सिस्टम की मार झेल रहे हैं। राहुल गांधी जी ने युवाओं को भरोसा दिलाया है कि उनके हक की यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है।