मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
When French President Macron came to Norway, he took questions. Every single head of the nation takes questions.
But, Indian PM Modi didn’t. I wanted to highlight that you can’t have your definition of democracy.
— Listen to Helle Lyng
India is being shamed by Modi…
@Gobhiji3@CommonBS786OM 157वीं रैंक वाली गोदी मीडिया की एंकर, प्रेस फ़्रीडम में नंबर 1 देश की पत्रकार को ये समझा रही है कि सवाल कैसे पूछना है, कब पूछना है और क्या पूछना है।
इससे बड़ा “अच्छे दिनों” का उदाहरण शायद ही कोई होगा।
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।