#GodMorningSaturday
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान ।
कह कबीर दयावान के, पास रहे भगवान।।
धर्म वही करता है जिसके हृदय में दया है।
तथा पाप वह करता है, जिसमें अभिमान भरा है। कबीर परमात्मा ने कहा है, दयावान के पास परमात्मा रहता है, अभिमानी के पास नहीं।#YouthForViksitBharat
#GodMorningWednesday
संत रामपाल जी से #मनी_किसानों_की_दिवाली
कबीर, पांच सहस्र अरु पांचसौ, जब कलयुग बीत जाए।
महापुरुष फरमान तब, जग तारन को आए ।।
परमेश्वर कबीर साहेब जी ने बताया है कि जिस समय कलयुग पाँच हजार पाँच सौ पाँच वर्ष बीत जाएगा, तब एक महापुरूष विश्व को पार करने के
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#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीता अध्याय 18 श्लोक 43 में गीता ज्ञान दाता ने क्षत्री के स्वभाविक कर्मों का उल्लेख करते हुए कहा है कि ‘‘युद्ध से न भागना’’ आदि-2 क्षत्री के स्वभाविक कर्म हैं। इससे सिद्ध हुआ कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं बोला।
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि यह सार अर्थात् निचोड़ कह दिया है। भावार्थ है कि जैसे मछली जल के अभाव में प्राण त्याग देती है, उसके बिना मरना उचित समझती है। साधक को वह दिन तथा समय जिस दिन किसी कारण से स्मरण न कर सका हो, ऐसा लगना चाहिए जैसे सब कुछ लुट गया हो।
#GodMorningFriday#AnnapurnaMuhim_बनी_वरदान
कबीर, सुमिरन स्यों मन लाईये, जैसे पानी मीन।
प्राण तजै पल बिछुड़ें, सार कबीर कह दीन्ह ।।
स्मरण से मन को ऐसे लगाकर रखें जैसे मछली पानी से लगाती है। यदि मछली एक पल भी जल से बाहर निकाल दी जाए तो तड़फ-तड़फकर मर जाती है।
संत रामपाल जी महाराज समाज को वह तत्वज्ञान दे रहे हैं जिससे असली धर्म की पुनर्स्थापना हो रही है।
आज पाखंड, नशा, भ्रष्टाचार, दहेज जैसी बुराइयाँ रावण बन चुकी हैं। इनका अंत केवल शास्त्रों के अनुसार ज्ञान से ही संभव है।
#धर्मविजय_का_प्रतीक_दशहरा#दशहरा
धर्म विजय का प्रतीक दशहरा
श्रीराम ने त्रेतायुग में रावण का वध किया, लेकिन आज के कलियुग में रावण रूपी बुराइयों का अंत कौन करेगा?
दशहरे का मतलब केवल पुतला जलाना नहीं, बुराई का नाश करना है। आज बुराइयाँ हमारे समाज में जीवित हैं, उन्हें खत्म करने के लिए तत्वज्ञान चाहिए।
सतभक्ति से ही धर्म की पताका फिर से लहराई जा सकती है। संत रामपाल जी ने यही कार्य अपने हाथों में लिया है।
धर्म की पुनर्स्थापना एक क्रांति है जो ज्ञान से संभव है, और वह क्रांति आज हो रही है।
दशहरा हमें याद दिलाता है कि सत्य और धर्म के लिए खड़ा होना ही असली विजय है।
#GodMorningSaturday#देवीदुर्गाजी_कीसही_भक्तिविधि
जो धन हरिके हेत नहीं, धर्म राह नहीं लगात।
सो धन चोर लबार गह, धर छाती पर लात।।
जो धन परमात्मा के निमित खर्च नहीं होता, कभी धर्म कर्म में नहीं लगता, उसके धन को डाकू, चोर, लुटेरे छाती ऊपर लात धरकर यानि डरा-धमकाकर छीन ले जाते हैं।
#GodMorningSaturday#देवीदुर्गाजी_कीसही_भक्तिविधि
संत शरण....
कबीर, संत शरण में आने से,आई टलै बला ।
जै भाग्य में सूली हो, कांटे में टल जाय ।।
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