#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
पूर्ण परमेश्वर कबीर/कविर्देव जी स्वयं अपने सतलोक से आकर लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए।
गरीब, काशी पुरी कस्त किया, उतरे अधर आधार।
मोमन कूं मुजरा हुवा, जंगल में दीदार।।
#धर्म_का_नाश_नहीं_होता
धर्म तो धसकै नहीं, धसकै तीनों लोक ।
खैरायत में खैर है, कीजै आत्म पोख ।॥
धर्म का नाश नहीं होता चाहे तीनों लोकों का नाश हो जायें। ऐसे ही अद्भुत धर्म भंडारे का नजारा संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस पर 20-22 जून 2024 को नेपाल सहित
#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं।
"सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनींद्र मेरा।।।।
3Days Left Kabir Prakat Diwas
#JagatGuruTatvadarshiSantRampalJiMaharaj#परमात्मा_की_पहचान
2Days Left
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब सशरीर आये और अनेकों लीलाएं करके पुनः सशरीर सतलोक चले गए। क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी भी न जन्म लेता है और न उसकी मृत्यु होती है।
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#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
काशी शहर की पवित्र भूमि पर ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण परमेश्वर कबीर/कविर्देव जी स्वयं अपने सतलोक से आकर लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए।
#परमात्मा_की_पहचान
Parmeshwar Kabir appeared in the form of a child in 1398 (Vikram Samvat 1455, Jyeshtha Purnima) and went to Satlok in the physical form in 1518 (V.S. 1575).
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#GodMorningThursday#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
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कबीर परमेश्वर सशरीर प्रकट हुए
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455(सन् 1398)सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुए।
#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते, ना ही उनकी कोई पत्नी थी। क्योंकि वे तो सबके उत्पत्तिकर्ता हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में प्रमाण है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है।
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#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन स्वामी रामानंद जी को कबीर साहेब जी बताते हैं कि मेरा शरीर ना तो पांच तत्व का बना है और ना ही मेरा जन्म हुआ है, मैं तो जीवों के उद्धार के लिए सशरीर प्रकट हुआ हूँ।
पाँच तत्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया। जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
#परमात्मा_की_पहचान
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3, मंडल 9 सूक्त 93 मंत्र 2 में लिखा है कि वह परमेश्वर सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। कबीर परमेश्वर सन् 1398 (विक्रम संवत 1455, ज्येष्ठ पूर्णमासी) को शिशु रूप में प्रकट हुए। और सन् 1518 (वि. सं. 1575)
#परमात्मा_की_पहचान
कबीर साहेब अविनाशी हैं। सशरीर प्रकट होते हैं, सशरीर चले जाते हैं - प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2, मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3
गरीब, पानी से पैदा नहीं, श्वासा नहीं शरीर |
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर ||
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#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म मां से नहीं हुआ।
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#परमात्मा_की_पहचान
पूर्ण परमात्मा कबीर जी का जीवन परिचय:- माँ के गर्भ से नहीं जन्मे, बल्कि स्वयं प्रकट हुए। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रकाशित 'ज्ञान गंगा' पुस्तक से जानिए और अधिक जानकारी "
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