काफिर किसको कहें?
जो लोगों को गलत ज्ञान देकर गुमराह करते हैं यानी नकली धर्मगुरु जो धर्मशास्त्रों की आड़ में गलत ज्ञान प्रचार करते हैं ये सभी काफिर है चाहे किसी भी धर्म के लोग हों।
#AlKabir_Islamic#SaintRampalJi
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
दोनों धर्मों को समझाते हुए सूक्ष्मवेद में कहा गया है कि हिन्दू परमेश्वर के जीवों का गला धीरे-धीरे काटते हैं और मुस्लिम झटके से काटते हैं और इस कार्य को पुण्य बताते हैं लेकिन ये दोनों ही पाप कुफ़र) कर रहे हैं जिसके लिए इन कसाइयों को नरक में डाला जाएगा।...
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
हज़रत मुहम्मद के 1,80,000 अनुयाईयों ने कभी मांस-शराब, तम्बाखू का सेवन नहीं किया और न ही ऐसा करने का आदेश दिया। लेकिन वर्तमान में शराब-तम्बाखू का प्रयोग बहुत जोर शोर से हो रहा है और मुसलमान समाज में मांस तो आम बात हो गई।
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
कबीर-काजी का बेटा मुआ, उर में सालै पीर।
वह साहब सबका पिता, भला न मानै बीर।।
इस वाणी में अल्लाह कबीर जी कहते हैं जब काजी के पुत्र की मृत्यु हो जाती है तो काजी को कितना कष्ट होता है। पूर्ण ब्रह्म सर्व का पिता है तो उसके प्राणियों को मारने वाले से .... ..
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
माँ दयालु व करुणामयी होती है वह बलि या जीव हत्या से प्रसन्न नहीं होती।
कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि:-
"कबीर, मांस आहारी मानव, प्रत्यक्ष राक्षस जानि।
ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि।।
Sant Rampal Ji Maharaj
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
काल ब्रह्म ने गलत व अधूरा अध्यात्म ज्ञान अपने दूतों द्वारा जनता में प्रचार करवा रखा है। जैसे हिन्दू श्रद्धालु भैरव, भूत, माता आदि की पूजा के नाम पर बकरे-मुर्गे, झोटे (भैंसे) आदि-आदि की बलि देते हैं जो पाप के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
Sant Rampal Ji Maharaj
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
महापापी जो करे जीव हिंसा
माँ दयालु व करुणामयी होती है वह बलि या जीव हत्या से प्रसन्न नहीं होती।
कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि:-
कबीर
मांस आहारी मानव,
प्रत्यक्ष राक्षस जानि।
ताकी संगति मति करै,
होइ भक्ति में हानि।।
Sant Rampal Ji Maharaj
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
विचार करें क्या कोई पिता अपने पुत्र की हत्या करने वालों से खुश होगा? नहीं ना। इसी तरह पूर्ण ब्रह्म इस संसार में मौजूद सभी जीवों का पिता है तो फिर उसके जीवों का गला काटने वालों से वह कैसे खुश हो सकता है? इसलिए ऐसे पाप कर्मों (कुफ़र) से बचें।
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
पशुओं को अपने इस भारत वर्ष मार कर खाने वाले व्यक्तियों के विषय में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है
कबीर, मांस अहारी मानई, प्रत्यक्ष राक्षस जानि। ताकी संगत मति करैं,होई भक्ति में हानि ।।
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
देवी दुर्गा के नाम पर बलि देना उनकी करुणा और दया का अपमान है। कबीर जी ने कहा, "हिंसा से धर्म नहीं उपजता, वह तो अधर्म है।"
Sant Rampal Ji Maharaj
#काफिर_किसको_कहेंसंत गरीबदास जी ने निर्णय करते हुए बताया है किकाफिर तीरथ व्रत उठावैं, सत्यवादी जन नाम लौ लावैं।।काफिर सो जो विद्या चुरावैं, काफिर भैरव भूत पूजावै।।पूजें देई धाम कूं, शीश हलावै जोय। गरीबदास साची कहैं, हदि काफिर है सोय।।काफिर आंन देवकुं मानें,
"हिन्दु साहेबान! नहीं समझे गीता वेद पुराण" यह पुस्तक किस संत द्वारा विश्व कल्याण के उद्देश्य से लिखी गई है
A. अनिरुद्धचार्य
B. संत रामपाल जी
C. प्रेमांनद जी
D. धीरेन्द्र शास्त्री
अपना उत्तर हमे कमेंट बॉक्स में बताए।
#GodMorningThursday
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
अपने जीभ के स्वाद के लिए परमात्मा के बच्चों का गला काटना कुफ़र (पाप) है, जिसके लिए ऐसे कसाई व्यक्ति को भगवान नरक में डालेगा।
कबीर-मुसलमान मारै करद सो, हिंदू मारे तरवार।
कहै कबीर दोनूं मिलि, जैहैं यम के द्वार।।
संत गरीबदास जी ने बताया है कि काया यानि शरीर तथा माया यानि धन, राजपाट यानि राज्य सब खण्ड (नाश) हो जाता है। केवल निज नाम (वास्तविक भक्ति मंत्र) के नाम की साधना सतगुरू से लेकर की गई कमाई (भक्ति धन) अमर है।
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