क्या आप उत्तर भारत के ओबीसी हैं? क्या आप जानते हैं कि NEET के ऑल इंडिया कोटा में 27% ओबीसी आरक्षण लागू कराने की लड़ाई किसने लड़ी? अगर जानते हैं तो @mkstalin को Thank You कहने में देर क्यों? ट्वीट करें #Stalin4SocialJustice
Let’s make it top trend in India. Salute our dear leader @mkstalin for winning the 27% OBC quota battle in the Supreme Court. Thanks @PWilsonDMK#stalin4socialjustice
उन्होंने मुसलमान महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी के लिए #BulliBaiApp बनाया और ये काम सिखों का नाम रखकर किया।
कौन कहता है कि “फूट डालो और राज करो” की नीति अंग्रेज लेकर आए? भारत में ये नीति ढाई हजार साल से जारी हैं। अंग्रेजों की नीति होती तो बाकी उपनिवेशों में भी लागू करते। यहीं क्यों?
पत्रकार विनोद दुआ भारत के बेहतरीन पत्रकार थे. वे चाहते तो खुद का न्यूज़ चैनल खोल सकते थे, नए न्यूज़ चैनल का ब्लू प्रिंट भी तैयार था. न्यूज़ चैनल में काला धन लगाया जा रहा था और येही तरीका विनोद दुआ को पसंद नही आया. उन्होंने न्यूज़ चैनल लॉन्च करने का इरादा बदल दिया.
गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए आदरणीय नरेंद्र मोदी जी गुजरात के किसी शहर में भव्य मंदिर परिसर नही बनवाया. बल्कि कई शहरों में गैर कानूनी तरीके से बने मंदिरों को ध्वस्त किया जो ट्रैफिक जाम का कारण बन रहे थे. बनारस में 400 करोड़ रुपए में बना मंदिर परिसर RSS का एजेंडा है.
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वह घोड़ा हैं जिसकी लगाम RSS के हाथों में है. 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने अंबानी के निजी अस्पताल का उद्घाटन किया था. मोदी ने आज तक भव्य अस्पताल या यूनिवर्सिटी नही बनाया. 400 करोड़ से अधिक बनारस में मंदिर परिसर निर्माण को फूंक दिया
MODI जी ने कहा प्रदेश के लिए YOGI जी उपयोगी हैं. सच ही कहा,
कम्युनल ब्राह्मणों के लिए योगी जी उपयोगी हैं
और
सेक्युलर एंड लिबरल ब्राह्मणों के लिए प्रियंका गांधी उपयोगी है.
तीनो ब्राह्मणों में एक समानता है, तीनों आरक्षण के कट्टर विरोधी हैं.
सेक्युलर सवर्ण, कम्युनल सवर्ण और लिबरल सवर्ण तीनों एक दूसरे से वैचारिक रूप से लड़ते रहते हैं.... लेकिन तीनों तीन मुद्दे पर एक मत हैं. तीनों के मन की बात
1) जाति वर्ण व्यवस्था हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग है.
2) आरक्षण खत्म होना चाहिए.
3) जाति जनगणना किसी भी हाल में नही होनी चाहिए.
राम राज्य ब्राह्मण ठाकुर और बनियों के स्वर्ग राज्य है और बलरामपुर के पवन कन्नौजिया जैसों के लिए नर्क है. पवन कन्नौजिया ने मनरेगा में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, गुस्साए ब्राह्मण प्रधान ने उनकी बेटी का बलात्कार करने की धमकी दे रहा है. धोबियों को अपनी गलतफहमी है बाहर आना होगा.
ब्राह्मण धर्म संसद में कालीचरण नाम के साधु ने मोहमदास करमचंद गांधी का अपमान किया. अब सवाल है RSS या अन्य ब्राह्मण साधु संत या संगठन गांधी से इतनी नफरत क्यों करते हैं ? जबकि गांधी ने सारा जीवन सनातन धर्म की सेवा की. क्या गांधी का तीसरे वर्ण का होने के कारण अपमानित होना पड़ता है ?
खुद के घर में कचरा है. कचरा बढ़ते जा रहा है, हर कमरे में इतनी बदबू है कि सांस लेना दुर्भर है. लेकिन अपने घर की सफाई के बजाय धर्म संसद आरोप लगा रहा है कि बदबू दूसरों के घरों से आ रही है. जातीय वर्ण व्यवस्था कचरा है. जाति ऐसा कचरा है जो सड़ चुका है, इस कचरे की सड़न से लोग बीमार है.
ना हिन्दू.. ना हिंदुत्ववादी
संघ केवल है ब्राह्मणवादी. ब्राह्मणवाद का दूसरा अर्थ है वर्चस्ववादी. लेकिन ब्राह्मण पत्रकार संघ को सत्तावादी या तालिबानी कह देंगे... पर ब्राह्मणवादी नही कहेंगे. धर्म संसद को सभी सेक्युलर लिब्रल्स पत्रकार तालिबानी नाम दे रहे हैं, ब्राह्मणवादी नही कहा.
हम OBC SC ST को मिलकर उन जातियों को अछूत घोषित कर देना चाहिए जो हमें अछूत समझते हैं, हमारी माँ बहन के हाथों से बना भोजन का बहिष्कार करते हैं.
अगर वे हमारी माँ बहनों के हाथों से बना भोजन नही कर सकते तो हमें उनके घरों का पानी भी नही पीना चाहिए, उनके मंदिरों से दूर हो जाना चाहिए.
ना कोई नरसंहार होगा, ना कोई गृह युद्ध होगा. सवर्ण हिन्दू और सवर्ण मुस्लिम दोनों मिलकर जातीय भेदभाव - जातीय हिंसा के मुद्दे को धूमिल कर रहे हैं. गांव कस्बों में सवर्ण हिन्दू और सवर्ण मुस्लिम दोनों जातीय हिंसा करते हैं.
मैं नसीरुद्दीन शाह को कहना चाहता हूँ नरसंहार की बात जिस धर्म संसद ने उठाई है वह ब्राह्मणवादी संगठन है. वैसे पूरा हिन्दू धर्म ब्राह्मणों के अंतर्गत आता है, वही उसके भाग्य विधाता हैं. बहुसंख्यक बहुजन समाज हिंसा या नरसंहार में यकीन नही करता. नसीरुद्दीन शाह को यह पता होनी चाहिए.
ब्राह्मणों की पुरानी मांग है मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण हटना चाहिए. RSS के इशारे पर यदुरप्पा सरकार ने कर्नाटक में कई बड़े धनवान मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण हटा दिया. अब इन मंदिरों की संपत्ति जैसे धन और जमीनों पर कुछ मुट्ठी भर ब्राह्मण जाति के ट्रस्टियों का शासन हो जाएगा.
गुजरात दंगों के आरोप में सभी बड़े नेता बाहर हैं. दंगे के आरोप में जेल के अंदर केवल आम आदमी बंद है और इन आम लोगों में एक भी ब्राह्मण नही है. बाकी आप लोग खुद समझदार हैं.
दंगा फसाद से केवल नेताओं को फायदा मिलते रहा है. आम आदमी को भूख तकलीफ जेल गरीबी के अलावा कुछ नही मिलता.