#Real_Facts_About_Buddhism
🎋महात्मा बुद्ध शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने के कारण खुद तो परमात्मा प्राप्ति से वंचित रहे ही, करोड़ों लोगों को भी शास्त्र विरुद्ध साधना में लगा कर परमात्मा से दूर कर दिया।
वर्तमान में शास्त्र अनुकूल भक्ति केवल सतगुरु रामपाल जी महाराज के पास ही है, अपना
#Satlok_Vs_Earth
Sant Rampal Ji Maharaj
🏡काल लोक/पृथ्वी लोक में सब कर्म बंधन से बंधे हैं। जीव को तीनों गुणों के प्रभाव से विवश कर सब कार्य करवाया जाता है।
जबकि सतलोक में किसी गुण का कोई दवाब नहीं है। जीव पूर्णतया स्वतंत्र है।
[30/4, 6:46 am] Ravindra D. Dass: 🏡सतलोक निरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
जबकि पृथ्वी लोक में इन दोनों स्तिथियों से कोई नहीं बचा है।
[30/4, 7:01 am] Ravindra D. Dass: #Satlok_Vs_Earth
Sant Rampal Ji Maharaj
🏡सतलोक निरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🏡काल लोक/पृथ्वी लोक में जन्म-मृत्यु और वृद्धावस्था सबसे बड़े दुख हैं।
जबकि सतलोक में सर्व सुख हैं। न ही जन्म-मृत्यु का दुख, न ही वृद्धावस्था का दुःख।
#Satlok_Vs_Earth
Sant Rampal Ji Maharaj
🏡सतलोक अविनाशी लोक है। जहाँ ऊंच-नीच की अवधारणा नहीं है। इस कारण द्वेष उत्पन्न नहीं होता।
जबकि पृथ्वी लोक पर ऊंच-नीच, छोटे-बड़े की आग में सारा संसार जल रहा है।
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश भाग 4 पृष्ठ 261-262 पर नानक जी की वाणी तथा परमेश्वर कबीर साहेब जी की वाणी का प्रमाण देकर कहा है कि:-
सोई गुरु पूरा कहावे, दोय अख्खर का भेद बतावे।
एक छुड़ावे एक लखावे, तो प्राणी निज घर को जावे।
कबीर ज
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩श्री शिवदयाल जी (राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक) ने इतना हठयोग/तप किया फिर भी उनका मोक्ष क्यों नहीं हुआ, वे मृत्यु उपरांत प्रेत क्यों बने?
पवित्र गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्याग कर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩सावन सिंह जी महाराज सतनाम के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
सावन सिंह जी के अनुसार राधा स्वामी की पुस्तक "संतमत प्रकाश" भाग-3, पृष्ठ नं. 102-
" सचखंड या सतनाम चौथा लोक है और सभी के अंदर है "। (सचखंड और सतनाम चौथा लोक/स्थान है और सबके अंदर है।)
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी है जिनका जन्म आगरा शहर की मुहल्ला पन्नी गली में 25 अगस्त 1818 को हुआ। श्री शिवदयाल जी का कोई गुरु नहीं था, स्वयं ही हठयोग क्रिया करके, बन्द कमरे में सूरत शब्द का अभ्यास किया करते थे। तथा मृत्यु उपरांत मोक्
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत प्रेत क्यों बने?
पूर्व जन्म की भक्ति से सम्पन्न हुये भक्त वर्तमान में अच्छे साधक लगते हैं, परन्तु साधना शास्त्रविरुद्ध होने के कारण भविष्य की भक्ति कमाई से वंचित रह जाते हैं। फिर वे पितर या
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩सावन सिंह जी महाराज सतनाम के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
सावन सिंह जी के अनुसार राधा स्वामी की पुस्तक "संतमत प्रकाश" भाग-3, पृष्ठ नं. 107 -
" चौथा 'राम' सतनाम है। ये असली राम है ।" [चौथा राम (भगवान) सतनाम है। यही असली भगवान है।]
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ काल का चलाया पंथ है
इस पंथ के संस्थापक शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत स्वयं भूत बने। तथा लाखों लोगों का अनमोल जीवन बर्बाद किया। सच्चा सौदा सिरसा, जगमाल वाली, जयगुरुदेव पंथ आगरा आदि भी इसी काल के पंथ राधास्वामी पंथ की ही शाखाएँ हैं।
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ निगुरा पंथ है
इस पंथ के मुखिया शिवदयाल जी ने कोई गुरु नहीं बनाया, मृत्यु के बाद भूत बना।
परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं:
गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।।
#Reality_O
🧩राधास्वामी पंथ के नकली धर्मगुरु सतनाम को ही परिभाषित नहीं कर सके। इनको ये ही नहीं पता सतनाम भगवान है या स्थान है या मन्त्र का जाप है।
उनकी पुस्तक संतमत प्रकाश भाग-3 जिसके लेखक सावन सिंह जी हैं के पृष्ठ 76 पर लिखा है कि "सचखंड या सतनाम चौथा लोक है", तथा पृष्ठ 79
#Reality_Of_RadhaSoam
🧩काल के चलाये पंथ राधास्वामी पंथ में पांच नाम दिये जाते हैं। तुलसी साहेब हाथरस वाले की पुस्तक घट रामायण पृष्ठ 27 पर स्पष्ट किया है कि पांचों नाम तो काल के हैं। इनसे भिन्न नाम (सारनाम/आदिनाम तथा सतनाम) हैं जिससे काल जाल से जीव मुक्त होता है।
i_Panth
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
🧩राधास्वामी पंथ के धर्मगुरु कबीर साहेब को मात्र सद्गुरु मानते हैं जबकि पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी ने सर्व शास्त्रों तथा सभी संतों की वाणियों से प्रमाण सहित बताया है कि कबीर परमेश्वर ही सर्व सृष्टि रचनहार है और सर्व आत्माओं का जनक/पिता है, अविनाशी
#GodMorningMonday
📬कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि यदि आप शांत स्वभाव के हैं तो आपका कोई शत्रु नहीं है। अपने अभिमान को त्याग दें, सबसे नम्रता से बोलें। फिर सबको आपके प्रति दयाभाव हो जाएगा।
#GodMorningMonday
📬मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है। आप अपने शरीर, धन, पद, राज्य का जो अभिमान कर रहे हो, यह अस्थाई है। आपको मानव जन्म भक्ति तथा शुभ कर्म करने के लिए मिला है।