#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के गोरखर गाँव की गया धुर्वे के पति रामदयाल धुर्वे के निधन के बाद उनका जीवन संघर्षों से भर गया था। दो छोटे बेटों की जिम्मेदारी, आय का कोई साधन न होना और कच्चे मकान के कारण उनके सामने भोजन और मूलभूत जरूरतों का भारी संकट खड़ा हो गया था।
संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत उनके परिवार को किट के माध्यम से राशन सहायता पहुँचाई गई:
पहली बार: 19 दिसंबर 2025
दूसरी बार: 3 फरवरी 2026
तीसरी बार: 15 अप्रैल 2026
इस दौरान परिवार को आटा, चावल, दाल, चीनी, तेल, मसाले, आलू, प्याज और साबुन जैसी दैनिक उपयोग की 23 जरूरी सामग्रियां प्रदान की गईं।
Annapurna Muhim By Sant RampalJi
#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की आमला तहसील से एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। लगभग तीन महीने पहले पति के अचानक निधन के बाद, चार बच्चों की माँ सोनू चौकीकर पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई। उनके पास ज़मीन, पशु या आय का कोई पक्का साधन नहीं है। यह परिवार मुख्यतः 'लाडली बहना योजना' के 1500 रुपये और राशन सहायता पर निर्भर है।
4 फरवरी 2026 को, संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत इस ज़रूरतमंद परिवार को दूसरी बार खाद्य सामग्री दी गई, जिससे उन्हें इस कठिन समय में बहुत बड़ा सहारा और उम्मीद मिली।
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#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
नानसलाई, महीसागर, गुजरात की सविता बहन के पति की मृत्यु हो गयी थी। टूटी झोपड़ी में रहते थे। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम बनी परिवार के लिए वरदान। संत रामपाल जी महाराज जी ने गरीब परिवार को पक्का मकान बनवाकर दिया।
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