5 करोड़ मुकदमे पेंडिंग हैं।
जनता अदालतों के चक्कर काट रही है।
लेकिन चीफ जस्टिस, कानून मंत्री और 150 VIP लोग लंदन में "बैडमिंटन आयोजन" के नाम पर करोड़ों फूंक रहे हैं।
जिस कार्यक्रम का आयोजन भारत में हो सकता था, उसके लिए विदेश दौरे की क्या जरूरत थी?
कल तक जनता को ज्ञान दिया जा रहा था विदेशी मुद्रा बचाओ, पेट्रोल कम खरीदो।
यानि त्याग सिर्फ जनता करे और VIP वर्ग टैक्सपेयर्स के पैसों पर विदेश यात्राएं करे?
फिर उम्मीद की जाती है कि जनता सरकार और न्यायपालिका की नज़दीकियों पर सवाल भी न पूछे।
देश देख रहा है।
देश सवाल पूछ रहा है।
Modi ji said that foreign trips should not be undertaken so that dollars can be saved.
On the other hand, a Union Minister is taking 75 judges and senior lawyers on a six-day trip to London.
The Chief Justice, who likened the youth to cockroaches, was also with them.
On one hand Mr Modi is urging people to cut every expenses possible including tadka in kitchen n on another 75 judges have been sent to foreign tour accompanied by the law minister.
The fact is there isn’t dearth of money with this country. They have surplus for all nefarious.
The worst part is that everyone is concerned about the couple but not the 50 years old helicopter that Capt Bhardwaj will fly.
Pathetic state of affairs
Dharmendra Pradhan
The first education minister to ask for Defence forces to conduct an EXAM .
Forces are already over burden
Forces are to protect us , not to conduct exam Mr education minister
@sidhant I read it the first time thinking it was a joke from a parody account
I read it the second time hoping it was a joke from a parody account
I wish I didn't read it a third time
देखो भाई, तेल का दाम बढ़ना ही था। यदि तुम्हें लगता है कि चुनाव के बीच में चुनाव जीतने के लिए नहीं बढ़ाया, तो सही लगता है। कोई पार्टी नहीं बढ़ाती। तेल हमारे यहाँ है नहीं, और जहाँ है (बाड़मेर में), वहाँ पता करो केयर्न एनर्जी की क्या कुत्ते जैसी स्थिति बना रखी है राजस्थान सरकार ने।
दूसरी बात, रूस से सस्ता लिया तो कम क्यों नहीं किया? क्योंकि जनता को भिखारी बनाना अब स्टेट पॉलिसी है। अब बहन और भाई कमाने वाले नहीं, लाड़ली और लाड़ले हो गए हैं। मैया और बहिन अब घरेलू कार्य नहीं करेगी, काम पर नहीं जाएगी, उसका अब सम्मान किया जाएगा राज्य की ‘माई-बहिन योजना’ द्वारा।
इसके लिए पैसे लगते हैं ब्रो। और पैसे चाहे इलेक्टोरल बॉण्ड से आएँ या बिना रसीद वाले बीस हजार, जाते पार्टी फंड में हैं, देश का फंड टैक्सदाता देता है, जिसे मोदी जी ‘नमन है’ कह देते हैं।
तो ये जो लिस्ट दिखा रहे हो कि इतने देशों में कम हो गया, हमारा सबसे कम है, वो मत दिखाओ। हर लिस्ट के उत्तर में दूसरी लिस्ट होती है। विश्व में केवल बीस राष्ट्र नहीं हैं। AI में एक प्रश्न डालने पर हर उस राष्ट्र का नाम आ जाएगा जिन्होंने टैक्स कम किए या सब्सिडी दी।
मैं यह नहीं मानता कि यह सरकार ईरान युद्ध के समय कुछ अनुचित कर रही है, पर मुझे घुटन होती है नकली भगवानों की मूर्तियों से, उनके तीर्थों से, उनके नाम से चलने वाली रेवड़ी योजनाओं से और हर उस मूर्खतापूर्ण फ्रीबी से जो अब सामान्य बना दी गई है।