UPSSSC PET_2022 के माध्यम से वर्ष 2023 में निकाले गए जूनियर असिस्टेंट के 5512 पदों और ग्राम पंचायत अधिकारी के 1468 पदों पर आयोग ने पहले डेढ़ से दो वर्षों की लंबी देरी के बाद परीक्षा आयोजित कराई।
अब स्थिति यह है कि इन भर्तियों का विज्ञापन जारी हुए लगभग 3 वर्ष होने वाले हैं, लेकिन आज तक आयोग ने किसी भी परीक्षा का रिजल्ट जारी नहीं किया है।
युवा साथियों का कहना है कि पहले वैकेंसी के लिए प्रोटेस्ट, फिर एग्जाम डेट के लिए प्रोटेस्ट, एडमिट कार्ड के लिए प्रोटेस्ट, डीवी के लिए प्रोटेस्ट और अब रिजल्ट के लिए भी प्रोटेस्ट करना पड़ रहा है।
छात्रों का यह भी कहना है कि वे कई बार लखनऊ आकर UPSSSC आयोग के सचिव को रिजल्ट जारी करने के लिए ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक उसका कोई नतीजा नहीं निकला है।
जब आयोग रिजल्ट जारी नहीं कर रहा, किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहा, तो सवाल उठता है कि आखिर इस आयोग को किस लिए बनाया गया है?
क्या यह आयोग सिर्फ इसलिए बनाया गया है कि छात्र यहां आकर अपनी जायज़ मांगों के लिए बार-बार प्रोटेस्ट करते रहें।
आयोग को जल्द से जल्द अभ्यार्थियों का रिजल्ट जारी करना चाहिए।
इस तरह की लगातार लेटलतीफी लाखों युवाओं के भविष्य और मेहनत के साथ खिलवाड़ है।
#UPSSSC #JuniorAssistant #GramPanchayatAdhikari #Result
जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है।
भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की माँग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी।
>CBSE स्टूडेंट विरोध करे तो पाकिस्तानी हैं
>NEET स्टूडेंट आंदोलन करे तो ये पढ़ने वाले नहीं है
>कोचिंग वाले आंदोलन करे तो कोचिंग माफिया हैं
>यूट्यूबर्स आंदोलन करे तो वो दो कौड़ी के हैं
>देश में इकलौती ईमानदार अब Anjana Om kashyap ही हैं ।
Khan Sir का भी जवाब आ चुका है अब
Prayagraj में नौजवान सड़कों पर... Lekhpal, SSC, NEET पेपर में गड़बड़ी से गुस्साए छात्रों ने खोला मोर्चा, CM Yogi पर भड़के, क्या बोले?
@Raunak_194 | Prayagraj Students Protest | #Prayagraj | #UPNews | #YogiAdityanath
अब ये मोहतरमा शिक्षकों को समझाएंगी कि उन्हें क्या आता है क्या नहीं,
हमें कितने कौड़ी का ज्ञान है यह हमसे जुड़े हमारे लाखों छात्र, युवा और उनके माता-पिता बखूबी जानते हैं पर आपको लगता पत्रकारिता का कौड़ी भर ज्ञान नहीं है इसीलिए आप पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की बात नहीं करती आप बात करती हैं झालमुड़ी के इतिहास की, मेलोडी टॉफी के मिठास की,
आपको शर्म आनी चाहिए देश के शिक्षकों के बारे में कुछ भी बोलने से पहले।
#youtubeteachers #students #news #indianmedia #exams
1. अगर बैंक आपके खाते से गलती से ₹5 लाख किसी और को भेज दे, तो क्या सिर्फ "गड़बड़ी हो गई थी, next time सुधार देंगे" काफी होगा?
2. अगर अस्पताल में किसी और की रिपोर्ट देखकर आपका operation कर दिया जाए, तो क्या उसे गलती कहा जाएगा?
3. अगर रेलवे आपकी ट्रेन गलत पटरी पर भेज दे, तो क्या सिर्फ "पहली बार हुआ है" कहकर बात खत्म हो जाएगी?
4. अगर UPSC/SSC की उत्तर पुस्तिका किसी दूसरे अभ्यर्थी के नाम से चेक हो जाए, तो क्या सिर्फ "technical issue" कह देना पर्याप्त होगा?
5. अगर आपकी शादी में पंडित गलती से किसी और के साथ फेरे करवा दे और बाद में बोले "गड़बड़ी हो गई थी, ठीक कर देंगे", तो क्या आप मान लेंगे?
6. अगर चुनाव में आपके वोट की जगह किसी और का वोट गिन लिया जाए, तो क्या सामान्य त्रुटि है?
परीक्षा में हुई गड़बड़ी सिर्फ तकनीकी त्रुटि नहीं, लाखों युवाओं के जीवन का खोया हुआ एक हिस्सा है।
अगर डॉक्टर, शिक्षक, पुलिसकर्मी या सैनिक की भर्ती में भ्रष्टाचार घुस जाए, तो उसका असर वर्षों तक देश झेलेगा।
कुछ गलतियाँ ऐसी होती हैं जिनकी किसी को क्षमा नहीं।
आपत्तिजनक क्या था - भाषा, विचार या सत्ता से असहमति?
अगर किसी content में वास्तव में आपत्तिजनक बात है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन जरूरी यह है कि लोकतंत्र में व्यंग्य, आलोचना और असहमति की सीमाएँ स्पष्ट करो।
सवाल सिर्फ एक अकाउंट का नहीं है,
सवाल यह है कि क्या हम ऐसे लोकतंत्र की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ लोगों को अपने विचार रखने से पहले यह सोचना पड़े कि कहीं उनकी आवाज़ ही बंद न कर दी जाए?
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
आयोग की लापरवाही और लचर व्यवस्था के कारण उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से एक महत्वपूर्ण परीक्षा संदेह के घेरे में आ चुकी है!
लेखपाल भर्ती परीक्षा में जिस तरह से अव्यवस्थाओं और धांधली की खबरें सामने आई हैं, वह सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। जिन होनहार युवाओं ने अपने जीवन के कीमती वर्ष और अपना सर्वस्व इस परीक्षा की तैयारी में न्योछावर कर दिया, आज वे सड़क पर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। गरीब माता-पिता की गाढ़ी कमाई और 3 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को इस तरह शिक्षा और नकल माफियाओं की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
आयोग और राज्य सरकार से पुरजोर मांग हैं कि वे इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लें। लीपापोती करने या इसे भ्रामक बताने के बजाय, आवश्यक और सख्त कार्यवाही करते हुए एक पारदर्शी, उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं।
#Lekhpal_Exam_Investigation
#UPSSSC_LEKHPAL_PAPER_LEAK को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
लगातार भर्ती परीक्षाओं में loopholes, कमजोर सिस्टम और धांधलेबाजों पर सख्त कार्रवाई न होने का ही परिणाम है कि आज कोई भी परीक्षा बिना संदेह और विवाद के पूरी नहीं हो पा रही।
लाखों मेहनती छात्रों का भरोसा टूटता जा रहा है। @UPGovt
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मेहनती छात्रों के सपनों की हत्या हुई है। लेखपाल परीक्षा का पेपर संदेह के दायरे में है एग्जाम के घंटों बाद भी बच्चों का हाल से बाहर निकलना सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है! आखिर कब तक हमारे होनहार युवा और उनके गरीब माता-पिता इस भ्रष्ट तंत्र और शिक्षा माफियाओं की कीमत चुकाते रहेंगे?
हमें भूलना नहीं चाहिए कि UPPSC भर्ती के समय भी आयोग ने पहले सब कुछ सही होने का दावा किया था, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आने पर परीक्षा लीक थी। क्या इस बार भी लीपापोती की तैयारी है?
हमारी सरकार और आयोग से स्पष्ट मांग है:
लेखपाल परीक्षा में हुई इस धांधली की तत्काल, पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच हो। पेपर लीक करने वाले गिरोह और उनके आकाओं को बेनकाब कर सख्त सजा दी जाए कि वह एक उदाहरण बने। छात्रों के भविष्य और उनके समय के साथ यह क्रूर मजाक अब और नहीं सहा जाएगा! झूठे आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए!
#Lekhpal_Exam_Investigation
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@UPGovt@UPTakOfficial@TheNewspinch@PMOIndia
पहले नोटिफिकेशन का इंतजार, फिर परीक्षा का एक लंबा अंतराल और आखिर में पेपर लीक; क्या युवाओं की किस्मत में सिर्फ यही संघर्ष लिखा है? आखिर हर बार परीक्षा से ठीक पहले या बाद में ही पूरी सुरक्षा व्यवस्था क्यों ध्वस्त हो जाती है, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, और इन लीक माफियाओं के असली आका कब सलाखों के पीछे भेजे जाएंगे? सिस्टम की इस बार-बार होने वाली नाकामी की सजा देश का ईमानदार युवा और उनका गरीब परिवार क्यों भुगते, और छात्रों के बर्बाद हुए सालों तथा उनके मानसिक तनाव का हिसाब आखिर कौन देगा? अब खोखले आश्वासनों और बातों से काम नहीं चलेगा, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए और इस पूरे मामले की समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाए जो एक मिसाल बने!
#Lekhpal_Exam_Investigation