From the Battlefield to a Cell, The Unspoken Pain of an Indian Soldier, 444 Days Without My Brother!
It’s been 1 year, 2 months, 17 days, 443 days in total, 10,632 hours, 637,920 minutes… since my brother, Major Vikrant Kumar Jaitly, was taken.
Since Maj Vikrant was 1st abducted, held incommunicado for eight long months, then kept in detention somewhere in the Middle East, my life has been a countdown of fear, hope & unbearable silence.
I am waiting to hear his voice, I am waiting to see his face, I dread what they have done to him.
I dread it because only I know who he was when he was whole, & I dread it because I know what he managed to communicate in that one final call…
A call made to the only number he could still remember.
A call carrying more pain than words.
A call carrying more truth than the world is ready to face.
I have more questions than answers, so much terror in every second that passes.
My brother suffers from many injuries from his line of duty.
He has given his youth, his strength, his mind, his life to Bharat.
He has lived & bled for the flag.
As Bharat rises as a global force, our soldiers & veterans are becoming easy targets abroad.
This is not just personal anymore, this pattern of picking up our soldiers & veterans abroad… is this now jeopardising our own National Security instead?
We must ask this question. We must demand answers. We must not turn away.
We need the same, decisive action that was taken in Qatar, I am putting my faith, my life & my hope in our government ..That they will safely bring their soldier back.
The same action that brought home our Naval veterans.
Our soldier deserves no less. No Indian soldier deserves less.
Bring our soldier back.
Do not let this momentum die.
Do not let a man who gave everything to this nation be abandoned in silence.
We must not forget our veterans, we must not let this happen to them, not now, not ever.
As my late father, Col VK Jaitly (SM), always said, “If you want to honour a soldier, be an Indian worth dying for.”
BHAI I HAVE LOST EVERYTHING FINDING YOU
I will NOT stop, I will NOT give up till he is back to the soil of his Bharat, the country he gave up all for!!
Kalika Mata Ki Jai
#majvikrantjaitly #celinajaitly #IndianArmy #india #Bharat #parasf
रायबरेली में दलित युवक हरिओम वाल्मीकि की निर्मम हत्या सिर्फ़ एक इंसान की नहीं - इंसानियत, संविधान और न्याय की हत्या है।
आज भारत में दलित, आदिवासी, मुसलमान, पिछड़े और ग़रीब - हर उस व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है, जिसकी आवाज़ कमजोर है, जिसकी हिस्सेदारी छीनी जा रही है, और जिसकी ज़िंदगी सस्ती समझी जाती है।
देश में नफ़रत, हिंसा और भीड़तंत्र को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है - जहाँ संविधान की जगह बुलडोज़र ने ले ली है, और इंसाफ़ की जगह डर ने।
मैं हरिओम के परिवार के साथ खड़ा हूँ - उन्हें न्याय ज़रूर मिलेगा। भारत का भविष्य समानता और मानवता पर टिका है और यह देश चलेगा संविधान से, भीड़ की सनक से नहीं।
महाराष्ट्र में जनादेश छीना, अब बिहार में मताधिकार - तरीका नया, साज़िश पुरानी।
हम इन संविधान-विरोधी ताक़तों को बेनक़ाब करते रहेंगे - जनता और युवाओं के साथ मिलकर मुंहतोड़ जवाब देंगे।
मोदी G + मिडिया ने कसम खा ली है .
कि जब तक @RahulGandhi जी सत्य निकाल कर नहीं लायेंगे.
तब तक मानना ही नहीं है .
कुछ ग़लत हुआ है या हो सकता है .
जरनल अनिल चौहान (CDS)
कैप्टन शिव कुमार ( इण्डियन नेवी )
को सामने आ कर #आधिकारिक_पुष्टि करनी पड़ी की दो जेट मार गिराए हैं ।
✍️
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में पर्यटकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की ख़बर बेहद निंदनीय और दिल दहलाने वाली है।
मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं।
आतंक के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के खोखले दावों के बजाय अब जवाबदेही लेते हुए ठोस कदम उठाए —ताकि आगे ऐसी बर्बर घटनाएं न होने पाएं और निर्दोष भारतीय यूं अपनी जान न गंवाएं।
98 साल पहले शुरू हुई हिस्सेदारी की लड़ाई जारी है।
20 मार्च 1927 को बाबासाहेब अंबेडकर ने महाड़ सत्याग्रह के ज़रिए जातिगत भेदभाव को सीधी चुनौती दी थी। यह केवल पानी के अधिकार की नहीं, बल्कि बराबरी और सम्मान की लड़ाई थी।
जाने-माने शिक्षाविद, अर्थशास्त्री, दलित विषयों के जानकार और तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण पर बनी अध्ययन समिति के सदस्य प्रो. थोराट से इस सत्याग्रह के महत्व पर चर्चा की। इस दौरान दलितों की शासन, शिक्षा, नौकरशाही और संसाधनों तक पहुंच के लिए अब भी जारी संघर्ष पर भी हमने विस्तार से बातचीत की।
जातिगत जनगणना इसी असमानता की सच्चाई को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जबकि इसके विरोधी इस सच्चाई को बाहर आने देना नहीं चाहते हैं।
बाबासाहेब का सपना आज भी अधूरा है। उनकी लड़ाई सिर्फ अतीत की नहीं, आज की भी लड़ाई है — हम इसे पूरी ताक़त से लड़ेंगे।
पूरा वीडियो:
https://t.co/Dr8B6QlO4I
कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना में OBC आरक्षण बढ़ाने का वादा पूरा कर दिया है।
राज्य में वैज्ञानिक तरीके से हुई जातिगत गिनती से मिली OBC समुदाय की वास्तविक संख्या स्वीकार की गई और शिक्षा, रोजगार और राजनीति में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में 42% आरक्षण का बिल पारित किया गया है।
सामाजिक न्याय की दिशा में यह वाकई एक क्रांतिकारी कदम है जिसके द्वारा राज्य में आरक्षण पर से 50% की दीवार भी गिरा दी गई है।
जातिगत सर्वेक्षण के डेटा से हर समुदाय के सामाजिक और आर्थिक हालात का विश्लेषण कर ऐसी नीतियां बनाई जाएंगी जिनसे सबकी बेहतरी सुनिश्चित हो। तेलंगाना सरकार ने इसके लिए एक इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट ग्रुप भी बनाया है।
मैं लगातार कह रहा हूं कि X-ray - यानी जातिगत जनगणना - से ही पिछड़े और वंचित समुदायों को उनका उचित हक़ मिल सकता है।
तेलंगाना ने रास्ता दिखा दिया है, यही पूरे देश की ज़रूरत है। भारत में जाति जनगणना हो कर रहेगी, हम करवाकर रहेंगे।
कल रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल उठा -
क्या करोड़ों भारतीयों की यात्रा की रीढ़ हमारी रेलवे वाकई 21वीं सदी के लिए तैयार है?
मौजूदा समय की ज़रूरतों को देखते हुए इसे और आधुनिक, सुरक्षित और सक्षम बनाने के लिए तेज़ी से प्रयास किए जाने चाहिए।
रेलवे को सिर्फ यात्रा का साधन न मानकर, प्रोडक्शन और अर्थव्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित करना होगा।
विदेशी मशीनों, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन पर निर्भर होने के बजाय हमारा लक्ष्य पूरी तरह से लोकलाइज्ड प्रोडक्शन सिस्टम को मज़बूत बनाने पर होना चाहिए।
हमारे इंजीनियर्स और टेक्नीशियन रात-दिन मेहनत करते हैं। यदि उनके परिश्रम को सही दिशा दी जाए और समय की मांग के अनुसार ठोस कदम उठाए जाएं तो रेलवे न सिर्फ परिवहन में बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
भाजपा सरकार में ‘न्याय की उम्मीद’ करना भी गुनाह है!
कमज़ोरों और वंचितों के खिलाफ गंभीर से गंभीर घटनाओं में भी जिनकी प्राथमिकता न्याय नहीं अपराध छिपाना हो, उनसे कोई क्या ही उम्मीद करे?
फ़र्रुख़ाबाद में हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, पीड़ित परिवार के साथ प्रशासन का ऐसा रवैया किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
आखिर यह सब कब तक सहन किया जा सकता है? एक समाज के रूप में हमारे सामने ये बहुत बड़ा सवाल है!
सुरक्षा भारत की हर बेटी का अधिकार है और न्याय हर पीड़ित परिवार का हक़।
During the Bharat Jodo Nyay Yatra, as we journeyed across thousands of kilometers, we had a daily routine of practicing jiu-jitsu every evening at our campsite. What began as a simple way to stay fit quickly evolved into a community activity, bringing together fellow yatris and young martial arts students from the towns where we stayed.
Our goal was to introduce these young minds to the beauty of the ‘Gentle Art’—a harmonious blend of meditation, jiu-jitsu, Aikido, and non-violent conflict resolution techniques. We aimed to instill in them the value of transforming violence into gentleness, giving them the tools to build a more compassionate and safer society.
On this #NationalSportsDay, I want to share our experience with all of you, hoping to inspire some of you to take up the practice of the ‘Gentle Art’.
P.S.: Bharat Dojo Yatra is coming soon
शीतल देवी को पेरिस पैरालिंपिक्स में नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई।
उन्होंने दुनिया को ये दिखा दिया कि हौसला और जज़्बा हो तो बाधाएं आपके हुनर की सीमा नहीं तय कर सकती।
मेरी शुभकामना है, आप इसी प्रकार सफलता और रिकॉर्ड्स की नई ऊंचाईयां छूती रहें।