Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served.
आज Indian Express की स्टोरी ने साबित कर दिया है कि मोदी जी और अमित शाह वोटों की बहुत बड़ी चोरी करके चुनाव जीत रहे हैं। इस चोरी के सरगना ज्ञानेश कुमार हैं।
हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके तुरंत उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए और पिछले कुछ सालों में जितने चुनाव हुए हैं, वे सब रद्द करके दोबारा करवाए जाएं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ! संपूर्ण विश्व में व्याप्त श्री कृष्ण जी के उपासकों पर घनश्याम जी की स्नेह कृपा-अनुकंपा बनी रही यही कामना है।
आज इस शुभ अवसर पर श्री कृष्ण जी के जन्म क्षेत्र के विकास के लिए हम ये संकल्प दोहराते हैं कि जिस प्रकार हमने सपा सरकार में ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए आधारभूत कार्य किये थे उसी को आगे बढ़ाते हुए हम अपनी आगामी सरकार में ‘मथुरा-वृंदावन-बरसाना-गोवर्द्धन’ के श्री क्षेत्र का इस तरह संतुलित विश्वस्तरीय चतुर्दिक विकास करेंगे कि यहाँ का धार्मिक-पौराणिक महत्व भी बना रहे और तीर्थयात्रियों और आध्यात्मिक पर्यटकों को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर-सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकें।
‘ब्रज’ के विकास का अर्थ ‘ब्रजवासियों’ की उपेक्षा नहीं होना चाहिए। हमारा मानना है कि ब्रजवासियों की सहमति-सहयोग से ही यहाँ का समुचित विकास संभव है। ब्रजवासियों के उत्थान-कल्याण में ही ब्रज क्षेत्र के विकास के सूत्र सन्निहित हैं।
Mr PM @narendramodi, this man is saying he has the गूदा to break open Nishu’s father’s head and admit it on camera.
Will the PM order Delhi Police to arrest this man for the crimes he’s admitting? Or should Indians accept a lawless system?
Cockroaches have the गूदा to ensure justice for Nishu’s father.
साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है -
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुलेआम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता - हम डटे रहेंगे।
लक्ष्य न्याय है और वो हर हाल में लेकर ही रहेंगे।
RGHS से भाजपा सरकार को आखिर क्या दुश्मनी हो गई है? इलाज के बाद पुनर्भरण के लिए बुजुर्ग पेंशनर्स आज अपने ही पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। 13.65 लाख परिवार इस योजना से जुड़े हैं, अकेले 2025-26 में ही 92.76 लाख दावों पर 2,440.69 करोड़ रुपए का खर्च दर्ज हुआ, लेकिन कुल बकाया भुगतान का आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपए के भी ऊपर पहुंच चुका है।
सबसे ज्यादा तकलीफ पेंशनर्स को हो रही है। गंभीर बीमारियों का इलाज कराने वाले बुजुर्गों की जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है, वे 8-8 महीने से अपने ही पैसों के पुनर्भरण का इंतजार कर रहे हैं। किसी की फाइल आपत्ति में अटकी है तो किसी का दावा मंजूर होने के बाद भी भुगतान का इंतजार खत्म नहीं हो रहा।
ऐसी हरकतों से जनता का सरकार पर भरोसा टूटता है। जो जनता पहले 25 लाख रुपए तक का इलाज भी सरकार पर पूरा भरोसा करके निसंकोच करवाती थी, आज वही जनता अस्पताल जाने से पहले सोचने पर मजबूर हो रही है। भाजपा सरकार तुरंत बकाया पुनर्भरण जारी करे और RGHS की व्यवस्था को दुरुस्त करे।
श्री सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में श्री सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए।
ये हमारी पुरज़ोर माँग है कि श्री सोनम वांगचुक जी की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि श्री सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है।
हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय भाजपा सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है।
भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीक़ों में।
भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं।
भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है।
भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!
भाजपा की सोच दरारवादी है, इसीलिए जहाँ भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, भाजपा डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन भाजपा भूल गयी है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है. ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी…
@Wangchuk66
‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है।
एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियाँ जल्दी ख़राब हो रही हैं, स्टार्टिंग की समस्या बढ़ गई है, कुल मिलाकर कम एवरेज की वजह से तेल ज़्यादा डलवाना पड़ रहा है, गाड़ियाँ बीच सड़क में धोखा दे रही हैं, जिससे मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ गई है, गाड़ी की रीसेल वैल्यू घट गयी है और ओवर ऑल लाइफ़ भी।
एथनॉल की वजह से ज़ंग और जंक दोनों की समस्या बढ़ रही है। पुरानी गाड़ियाँ एथनॉल के हिसाब से नहीं बनी हैं, इसीलिए बीमा कंपनियों के अपने एतराज़ हैं और कार-बाइक ख़राब होने पर उन्हें क्लेम न देने का एक और बहाना मिल जाता है।
आज के महंगाई के समय में जब माँ-बाप युवाओं को किसी तरह से लाखों रुपये में एक बाइक दिलाते हैं या युवा कार लोन लेकर अपनी गाड़ी का सपना पूरा करते हैं तो उनकी चिंता महंगा तेल भी होता है और एथनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब होने और फिर ठीक कराने का लगातार बढ़ता ख़र्चा भी। सच तो ये है कि जब खानेपीने वाली चीजों से फ्यूल बनेगा तो खाद्य महंगाई बढ़ेगी साथ ही इसका नुक़सान पर्यावरण को भी होगा क्योंकि एथनॉल के लिए पानी की भी बहुत खपत होती है।
सरकार बताए कि चंद मुनाफ़ाख़ोरों के लिए वो जनता का शोषण क्यों कर रही है।
#E20 #Ethanol #Bike #PetrolPrice #Mileage #Insurance
जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई @yadavakhilesh जी।
PDA की हिस्सेदारी से सामाजिक न्याय का संकल्प हम मिल कर पूरा करेंगे। अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए शुभकामनाएं।
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था गंभीर प्रशासनिक लापरवाही व निष्क्रियता के कारण गर्त में जा रही है। भाजपा सरकार के पास न तो कोई ठोस योजना है, और न ही शिक्षा सुधार की स्पष्ट मंशा।
शिक्षा विभाग 3801 उपप्रधानाचार्यों के पदोन्नति पदस्थापन के लिए अब तक पांच-पांच बार काउंसलिंग स्थगित कर चुका है, जबकि नया सत्र शुरू होने वाला है। हैरानी की बात ये है कि सितंबर 2025 में 11,822 व्याख्याताओं को उपप्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत करने के बावजूद सरकार आज तक उनका पदस्थापन नहीं कर पाई। नतीजा ये हुआ कि कहीं एक ही स्कूल में 3 से 4 उपप्रधानाचार्य बैठे हैं, तो कहीं कोर्ट स्टे एवं अव्यवस्थित ट्रांसफर के कारण 2-2 प्रधानाचार्य एक ही संस्था में जमे हुए हैं, जबकि प्रदेश के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है।
इतना ही नहीं स्थिति इतनी खराब है कि विभाग में वर्षों से डीपीसी लंबित पड़ी हैं। तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक की 5 डीपीसी, वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की 3 डीपीसी, व्याख्याताओं की अगली पदोन्नति (सत्र 2025-26 से) बकाया है, उपप्रधानाचार्य से प्राचार्य की डीपीसी लंबित है, और साथ ही शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष व प्रबोधकों की कुल 4 डीपीसी अटकी हुई हैं। समसा में इंटरव्यू आधारित पदस्थापन भी अधर में लटका हुआ है।
दूसरी ओर, स्कूलों में हुए हादसों व कोर्ट की फटकार के बाजवूद भाजपा सरकार 3700 जर्जर स्कूल भवनों और 83 हजार कक्षा-कक्षों के निर्माण के लिए कोई ठोस रोडमैप तक पेश नहीं बना पाई है, और न ही आवश्यकतानुसार बजट जारी कर पा रही है।
विडंबना ये है कि जहां स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की जरूरत है, वहां भाजपा की #पर्ची_सरकार स्कूलों को मर्ज या बंद करने की दिशा में कदम उठा रही है। सत्र के बीच भ्रष्टाचार और राजनीतिक दुर्भावना से बड़े पैमाने पर ट्रांसफर करने वाले शिक्षा मंत्री जी के पास शिक्षा सुधार के लिए समय तक नहीं है। शिक्षा विभाग की न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।