रेल गाड़ी में पैंट्री कार वालों की लूट का नया तरीका! (सभी रेल यात्री ध्यान दें)
दोस्तों, आज कल ट्रेनों में पैंट्री कार वालों ने यात्रियों को लूटने का एक नया और बेहद चालाकी भरा तरीका निकाल लिया है। पहले समझिए कि यह पूरा खेल क्या है—
IRCTC के नियम के मुताबिक साधारण चाय (Ready Tea) या टी-बैग वाली चाय की आधिकारिक दर आज भी **₹10** ही है। लेकिन पैंट्री वालों ने ₹10 वाली साधारण चाय को मेन्यू से गायब ही कर दिया है। अब ये नया धंधा लेकर आए हैं—'प्रीमिक्स चाय और कॉफी'। चाय ₹20 और कॉफी ₹25 वसूल रहे हैं।
पिछले दिनों मैं 22308 बीकानेर हावड़ा एक्सप्रेस में सफर कर रहा था। सुबह-सुबह "चाय-चाय" की आवाज सुन आँख खुली। मैंने कहा—"एक चाय दो।"
वेंडर ने पूछा—"कौन सी? मसाला या इलायची?"
मैंने मसाला कह दिया।
उसने चाय दी और ₹20 लेकर चलता बना।
अगली बार वह फिर आया,
तो मैंने पूछ ही लिया—"भाई क्या बात है, जितने भी चाय वाले घूम रहे हैं सभी प्रीमिक्स ही बेच रहे हैं, ₹10 वाली रेडी चाय नहीं आएगी क्या?"
उसका जवाब सुनकर मेरा सर घूम गया!
बोला—"IRCTC ने बंद कर दी, अब यही बिकती है।"
मैंने वहीं उसका झूठ पकड़ा और
पैंतरा बदलते हुए कहा—"मैं खुद IRCTC से जुड़ा हूँ, तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ।"
यह सुनते ही वह घबरा गया
और बहानों की झड़ी लगा दी—"दूध नहीं है... चूल्हा खाली नहीं है... चूल्हा खराब है।"
मैंने कड़े लहजे में कहा—"तुम्हारा दिमाग खराब है! एलएचबी (LHB) पैंट्री में अब खाना बनाने का सिस्टम ही नहीं होता, सिर्फ वाटर बॉयलर होता है, तो चूल्हा कहाँ से खराब हो गया? पहले ₹10 वाली चाय लाओ और मैनेजर को भेजो, नहीं तो अभी शिकायत मेल करता हूँ।"
वह चला गया। मेरे सामने बैठे एक परिवार ने बताया कि वे 6 लोग हैं और सुबह से सिर्फ दो बार चाय पीने में उनके ₹200 खर्च हो गए! सोचिए, आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
थोड़ी देर में वही वेंडर आया और बोला—"लीजिए ₹10 वाली चाय।" उसने तुरंत एक 'एव्रीडे' का दूध पाउच फाड़ा, गर्म पानी में मिलाया, टी-बैग डाला और दे दिया। यानी दूध भी था और सामान भी, बस छिपाकर रखा था! मैंने पूछा—"मैनेजर कहाँ है?" तो बोला—"अभी सोकर नहीं उठे हैं।"
मैंने उसे साफ कहा—"तुम्हारा मैनेजर सोया है और तुम पैसेंजर्स को सुबह 5 बजे से चिल्लाकर जगा रहे हो? जबकि IRCTC का सख्त नियम है कि रात 11 से सुबह 6 बजे तक कोई वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेचेगा।" वह चुपचाप खिसक गया।
करीब सवा छह बजे पैंट्री कार के मैनेजर साहब खुद आए। चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थीं।
बनावटी मुस्कान के साथ बोले—"सर नमस्कार, मैं पैंट्री मैनेजर हूँ। वेंडर छोटा लड़का है, गलती हो गई।"
मैंने उन्हें सीधे शब्दों में आइना दिखाया—"गलती वेंडर की नहीं, तुम्हारी है। तुम लोग मिलकर पूरे सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे हो। एक तो सुबह 5 बजे चिल्लाकर नियम तोड़ रहे हो,
ऊपर से ₹10 वाली चाय छुपाकर ₹20 का प्रीमिक्स जबरन बेच रहे हो (Forced Selling)। स्टॉक कम होने का बहाना मत बनाना, क्योंकि मेरे टोकते ही तुरंत पाउच और टी-बैग बाहर आ गए।"
मैनेजर पूरी तरह सकपका गया और हाथ जोड़कर बोला—"सर प्लीज शिकायत मत कीजिए, आइंदा से पूरी ट्रेन में सबको ₹10 वाली चाय ही मिलेगी और टाइमिंग का पूरा ध्यान रखेंगे।"
मैंने कहा—"शिकायत तो मैं फिर भी करूंगा ताकि तुम लोगों को सबक मिले, लेकिन फिलहाल इस पूरे कोच में जो भी चाय मांगेगा, उसे ₹10 वाली ऑफिशियल चाय ही दोगे।
अगर दोबारा कोई ₹20 प्रीमिक्स चिल्लाता मिला, तो सीधा RailMadad' ऐप पर तुम्हारी पैंट्री का लाइसेंस सस्पेंड करने की कंप्लेंट डालूंगा।"
मैनेजर 'जी सर, बिल्कुल सर' करता हुआ वेंडर को लेकर दबे पाँव भाग खड़ा हुआ।
साथियों, यह लड़ाई सिर्फ ₹10 की नहीं है, यह हमारे हक की है। जब भी ट्रेन में सफर करें, सजग रहें:
1. सुबह 6 बजे से पहले और रात 11 बजे के बाद वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेच सकते।
2. ₹10 वाली साधारण चाय मांगना आपका हक है।
3. कोई वेंडर मनमानी करे तो बिल मांगिए। नियम है—"No Bill, No Earnings"।
4. वेंडर न माने तो तुरंत RailMadad' ऐप या टोल-फ्री नंबर 139 पर शिकायत दर्ज करें।
एक बात और ध्यान रखें कि आईआरसीटीसी के खाने की थाली की रेट 80 रुपये ही है अगली बार जब आप ट्रेन में खाना खरीदे तो 80 वाली थाली की ही मांग करें अगर नहीं देवें तो तुरन्त शिकायत करें. हाथ जोड़कर 80 वाली थाली देकर जाएगा
जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, ये पैंट्री वाले ऐसे ही आम यात्रियों को लूटते रहेंगे। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर रेल यात्री अपने अधिकारों को जान सके!
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Former Western Army Commander Lt Gen Manoj Katiyar (retd) argues in this well written piece on how Op Sindoor 2.0 should factor capturing objectives on the ground to blunt Pak propaganda.
“Sindoor 2.0 should be designed not merely to punish but to extract concrete concessions”.