मेहनत सिसक रही है, भ्रष्टाचार मुस्कुरा रहा है! 💔
किताबें छोड़कर सड़कों पर रोने को मजबूर हैं झारखंड के होनहार छात्र-छात्राएं।
JPSC और JSSC में लगातार हो रहे पेपर लीक और धांधली ने लाखों युवाओं के भविष्य पर पानी फेर दिया है।
JMM-कांग्रेस सरकार, अपनी नाकामी छुपाना बंद करो और छात्रों को न्याय दो!
भूख हड़ताल पर बैठे बच्चे रो रहे हैं, लेकिन हेमंत सोरेन और राहुल गांधी की सरकार की आँखों में ज़रा भी पानी नहीं है।
क्या झारखंड के छात्रों की पीड़ा भी अब राजनीति के तराज़ू पर तौली जाएगी?
"अब आरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए। SC, ST और OBC मिलकर बहुमत में हैं। वे देश चला रहे हैं और फैसले लेने वाले भी वही हैं। जनरल कैटेगरी अब अल्पसंख्यक हो गई है।"
आरक्षण को सामाजिक न्याय के एक साधन के तौर पर लागू किया गया था, न कि ऐसी नीति के तौर पर जिस पर कभी सवाल न उठाया जा सके।
अगर नीतियां बदलती हुई हकीकत के साथ बदलनी चाहिए, तो आरक्षण नीति की भी समय-समय पर मौजूदा डेटा, प्रतिनिधित्व और नतीजों के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए, न कि इसे ऐसी चीज़ माना जाए जिस पर चर्चा ही न हो सके।"
-ये कहना है विकास सिंह, पूर्व Additional Solicitor General of Indian का
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल), जो अपनी राजनीतिक विफलताओं के बोझ तले दबे हुए हैं, एक बार फिर अपने समर्थकों की मुट्ठी भर भीड़ के साथ अपना पुराना नाटक रचाते और अपने चिर-परिचित अंदाज में बेबुनियाद व गैर-जिम्मेदाराना आरोप लगाते नजर आए।
वह खुद को एक उच्च शिक्षित नेता और IIT स्नातक होने का दावा करते हैं, फिर भी बिना किसी तथ्यात्मक आधार के गंभीर मुद्दों पर बोलने की उनकी आदत रही है।
मैं सभी को याद दिलाना चाहूंगा कि कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने सवाल उठाया था कि वैक्सीन का फॉर्मूला सभी के साथ साझा क्यों नहीं किया जा रहा है?
ध्यान देने योग्य बात यह है कि वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। इसके बावजूद, E20 ईंधन के मुद्दे पर उन्होंने बिना किसी शोध या तथ्यात्मक साक्ष्य के दावे किए हैं और एक बार फिर छोटी सी सभा के सामने नाटक का सहारा लिया है।
इससे यह साफ पता चलता है कि वह एक बार फिर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
- डॉ. @SudhanshuTrived
यह वीडियो देखने के बाद मोदी-शाह की जोड़ी के प्रति सम्मान और भी बढ़ गया।
खतरे की भनक लगते ही आंदोलन समाप्त करवाकर उन्होंने देश को जलने और Gen Z की जान को खतरे में पड़ने से बचा लिया।
दीपके भाई साहब को झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन में जाने के लिए इतना समय क्यों लग रहा है।
इतना समय तो इन्हें अमेरिका से भारत आने में भी नहीं लगा था।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाने में भी इतना समय नहीं लगा था।
लेकिन अभी भी उनकी तरफ से झारखंड की सरकार में बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
झारखंड आने के लिए छात्र उनसे विनती कर रहे हैं लेकिन वो टाइफाइड का बहाना दे रहे हैं। अपने प्रवक्ताओं को भी नहीं भेज पा रहे हैं।
इसलिए जरूरी था अनुच्छेद 370 का हटना! 🇮🇳
कश्मीर के नाम पर दशकों तक अपनी राजनीति चमकाने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीडीपी (PDP) का असली चेहरा एक बार फिर देश के सामने बेनकाब हो चुका है।
एक तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस के सासंद चौधरी मोहम्मद रमजान देश की अखंडता को चुनौती देते हुए PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को अलग देश बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति अनादर और उदासीनता साफ झलक रहा है।
जो राजनीतिक दल भारत के अभिन्न अंग PoK को पराया समझते हैं और राष्ट्रध्वज की गरिमा का सम्मान तक नहीं कर सकते, उनसे जम्मू-कश्मीर के विकास और देश के प्रति वफादारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अनुच्छेद 370 के हटने से इन राजनीतिक परिवारों की दुकान बंद हो चुकी है, और यही बौखलाहट अब इनके बयानों और हरकतों में साफ नजर आ रही है।
भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा — कश्मीर से कन्याकुमारी तक!
रवीश कुमार ने कहा "हम झारखंड के विरोध-प्रदर्शनों को कवर नहीं कर सकते।
हमारे पास इतने संसाधन नहीं हैं।" 🤯
लगता है इस प्रदर्शन के लिए फंडिंग नहीं पहुँच पाई ?
CM हेमंत सोरेन का विरोध करना हमारा हक है।
लेकिन CM हेमंत सोरेन को गाली देना हमारा हक नहीं है।
झारखंड के छात्र आंदोलन में और CJP के आंदोलन में बहुत अंतर है।
हम यहां किसी को गाली नहीं दे रहे हैं, हम भी छात्र हैं, हम भी GenZ हैं।
: झारखंड छात्र आंदोलन का एक छात्र
एक समय था कि भाजपा की हार पर कार्यकर्ताओं का दुःख ख़त्म नहीं होता था ।
और आज भाजपा शीर्ष नेतृत्व और RSS नेतृत्व की हठधर्मिता और सवर्ण विरोधी राजनीति के कारण मूल कोर कार्यकर्ता संवेदना शून्य हो गया है । उसको अब दुःख नहीं हो रहा है ।
जो तुम्हारा था उसकी इज़्ज़त नहीं की ।
और जिनके लिए तुम सर्वस्व लुटा रहे उन्होंने तुम्हें छात्र आंदोलन की आड़ में औक़ात दिखा दी।
वर्तमान भाजपा और मोदी जी पर एक शेर याद आ गया।
”हम चाहें तुम्हें, तुमने चाहा किसी और को।
भगवान करे तुम चाहो जिसे, वो चाहे किसी और को”
जयपुर में सवर्ण समाज के जनसैलाब के बीच करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने लोगों को बीजेपी को वोट न देने की शपथ दिलाई।
अब बीजेपी गई काम से?
"मोदी जी के आवाज़ पर 3 बार वोट कर दिया, अब नहीं करेंगे! UGC कौन लाने बोला था?
BJP में अहंकार हो गया है कि हम जो बोलेंगे वही होगा, इसलिए अपने ही वोटरों को दुत्कार रही है!
अच्छा रोड या गैस लेकर क्या करेंगे अगर UGC जैसे नियमों में जेल चले गए?"
भरत तिवारी पर भी ये बोल रहे हैं कि ये बड़ा फैक्टर रहा वोट decide करने में!
वोटर ये भी कह रहे हैं कि नीचे के लोग corrupt हैं, काम नहीं करते तो ऊपर के नेताओं का चेहरा देखकर कबतक वोट करेंगे??
ये है सच्चाई!
जो भाजपा को दिखती नहीं!
"हम फॉरवर्ड कास्ट का गर्दन काटने पर लगा था, काहे वोट दें BJP को?? हमारे बाल बच्चों का गर्दन काटने पर लगा है, इसलिए वोट दिए थे BJP को?
उ रविशंकर भी UGC पर साइन किया था, नहीं देंगे वोट!"
-ये बोलना है एक वोटर का
UGC पर GC वोटरों की नाराजगी अब दिख रही है!
सब कुछ साफ है अब-आँखे बंद करने से सच्चाई नहीं बदलेगी!
विरोध क्या होता है, अब भाजपा भी समझेगी। शायद मोदी सरकार को लगा था कि जनता चुप है और डर के सहारे शासन चलता रहेगा। लेकिन अब सवाल आरक्षण, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर भी उठेंगे। देश में चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? क्या कानून-व्यवस्था विफल हो चुकी है?
(यह बात बिहार के एक सवर्ण नागरिक ने कही है, जो मौजूदा व्यवस्था और प्रशासन से नाराज़ है।)