इन बेटियों के रास्तों पर कांटे बोने वालों, ये बेटियां फिर खड़ी होंगी और फिर लड़ेंगी. ये बेटियां जीतेंगी जरूर!
क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।
चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।🇮🇳🇮🇳🫡🫡 @Phogat_Vinesh
जिस विनेश को मिल कर सब हराने में लगे थे उस विनेश ने आज सभी को हरा दिया। तुम शानदार हो विनेश। तुम्हारा जलवा क़ायम रहे। बधाई । नंबर हो सके तो देना, फ़ोन करूँगा !
बाल्टी राष्ट्रवाद
मुझे भारत से कोई शिकायत नहीं है। शिकायत करने वालों से शिकायत है। बारिश होते ही वीडियो की बारिश होने लग जाती है। मैं तय नहीं कर पाता हूं कि बारिश ज़्यादा हो रही है या वीडियो ज़्यादा वायरल हो रहे हैं।बारिश के दिनों में वारयल वीडियो को वायरिश कहना चाहिए। ऐसे वीडियो जो केवल बारिश के समय वायरल होते हैं। मैं मानता हूं कि संसद की छत से बारिश के पानी का टपकना अच्छा नहीं है लेकिन इसमें दोष वास्तु का नहीं है, बाल्टी का है। बाल्टी ने संसद की कमियों की शोभा बिगाड़ दी है। मैं स्पीकर होता तो व्यवस्थापकों को बुलाकर हड़काता कि सदन के भीत�� बाल्टी कहां से आ गई। वह भी नीले रंग की बाल्टी। संसद है ये। मोहल्ले की शादी का तिलक नहीं है कि कहीं से चौकी ले आए, कहीं से बाल्टी। मैं गिनती करवाता कि संसद में प्लास्टिक की कितनी बाल्टी है, कितने मग हैं? और क्यों हैं? ये बाल्टियां कहीं वहां तो नहीं पहुंच गई हैं, जहां शावर लगे थे। जेट लगा था। अगर ज़्यादा हैं तो एक-एक बाल्टी सांसदों के साथ उनके घर भिजवा देता। हर सांसद अपने घर बाल्टी लेकर जाता। आप सोच��ए अगर बाल्टी नहीं होती तो वीडियो इतना ख़राब नहीं लगता। बारिश का भी अपना क्लास है। बाल्टी लगाकर बारिश का क्लास ख़राब कर दिया गया है।
दोष बाल्टी का और गुस्सा बिमल पर। बिमल पटेल वास्तुकार हैं। बाल्टीकार नहीं हैं। दो मिनट भी लोग अपने प्वाइंट पर टिक कर बहस नहीं करते हैं। बाल्टी-बाल्टी करते हुए बिमल पर आ गए।अगर वह बाल्टी बिमल छाप है तब अलग बात है। संसद परिसर में पानी भर गया, उस पर इतना गुस्सा, उसी परिसर में पत्रकारों को एक पिंजड़े में बंद कर गिया तब किसी ने पूछा कि इसका वास्तुकार कौन है? कंटेनर बनाने का विचार किसका था और वास्तुकार कौन था? इतनी जल्दी पिंजड़ा किसने बनाया? गोदी मीडिया को भी डिब्बे में बंद कर दिया? क्या इसी दिन के लिए पत्रकारिता बंद की थी? क्या उस पिजड़ें को देखकर शर्म नहीं आ रही थी जो आप बाल्टी को देखकर शर्म करने लगे? इसलिए मुझे भारत से ��िकायत नहीं है। शिकायत करने वालों से शिकायत है।
मैं स्पीकर होता तो सबको बुलाकर हड़काता कि यहां कोई बाल्टी नहीं होगी। मग्गा भी नहीं होगा। जी-20 में चांदी की थाली में भोजन परोसा गया था, उन सबको लाओ। दाल परोसने के लिए चांदी की बाल्टी ज़रूर बनी होगी, उससे पानी रोको। पानी पिलाने के लिए चांद का जग होगा, उन सबको लाओ और जहां-जहां से पानी टपक रहा है, वहां-वहां चांदी का जग रख दो। जी-20 के गोदाम में सब रखा होगा, अभी निकाल कर लाओ। फिर विपक्ष कभी इसका वीडियो नहीं बनाएगा क्योंकि उस वीडियो से जनता को गर्व होगा कि भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। चांदी की बाल्टी से बारिश का पानी रोक रहा है। इस डर से विपक्ष कभी वीडियो बनाएगा ही नहीं।
कितनी अच्छी बात है कि बारिश में दिल्ली दूसरे शहरों से अलग नहीं लगती। इससे उन शहरों के लोग अब ईर्ष्या नहीं करते जिनके यहां की सड़कें तीन-तीन दिन डूबी रहती हैं, बिजली नहीं आती है और एक वीडियो भी वायरल नहीं होता है। अब जाकर दिल्ली का शहरीकरण हुआ है। अभी तक उसका राजधा���ीकरण हो रखा था। गुरुग्राम की सड़कों पर पानी भर जाता है। इसमें क्या ब्रेकिंग न्यूज़ है? कब से भर रहा है। गुरुग्राम वालों को पता होना चाहिए कि ज़माना चेंज हो चुका है। वे अभी तक मिलेनियम की खुमारी में डूबे हैं, इधर ज़ेन-जी को कोई पूछ ही नहीं रहा। मिलेनियम सिटी पुरानी हो चुकी है। उस सिटी में जब तक थाली है और बालकनी है, बारिश की चिंता मत करें। टास्क मिलेगा। जल्दी मिलेगा। उन्हें भी पता है कि आप ITR भरने�� में बिज़ी हैं। घर-घर तिरंगा ��भियान के तहत आपको गर्व करने का मौक़ा मिलेगा। अभी हम लोगों को एक दूसरे की सोच को भारतीय बनाना है, इसी से फुर्सत नहीं है, प्राचीन काल का सिलेबस पूरा नहीं हुआ और मार्डन टाइम का सिलेबस निकाल लाए हैं। हम देश को फार्वर्ड करना चाहते हैं और ये लोग वीडियो फारवर्ड करने में लगे हैं। राष्ट्रवाद के अविरल प्रपात को बाल्टी से रोकना चाहते हैं। ऐसे लोगों को दिन में दस डिबेट दिखाओ। हर मुद्दे पर एक ही बात करने लग जाएंगे। बाल्टी से बाल्टीमोर पहुंच जाएंगे। रवीश कुमार असली नाम टोबा टेक सिंह रिपोर्टिंग लाइव सर फ्राम अगड़म-बगड़म चौपाल।
देख रहा है बिनोद!
कैसे पत्रकारिता के नाम पर बेसमेंट में क्लास चलाने वालों की रैंक बताकर छात्रों को बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है!
ग़ज़ब टोपीबाज आदमी हो यार!
सबका कुत्ता कुत्ता…मेरा कुत्ता टॉमी!
आपकी बेसमेंट इतनी ही सुरक्षित थी तो MCD ने सील क्यों कर दी?
वर्धमान प्लाज़ा के जिस बेसमेंट में आपकी क्लासेज़ चलती थीं, उस प्लाज़ा की हालत बेहद ख़राब है.
नेहरू विहार के विशालकाय नाले और आपके बेसमेंट के बीच एक ऊँची सड़क भर की दूरी है…ये बात मुखर्जी नगर का हर बाशिंदा जानता है.
गलती मान लेने से कोई छोटा नहीं हो जाता! आप ��ी कहा करते थे!
#VikasDivyakirti #UPSC
ब्रह्मचर्य पर सालोंसाल प्रवचन देने वाला व्यक्ति अगर रंगेहाथ पकड़ा जाये तो उसके अनुयायियों की क्या दशा होगी?
दुर्भाग्यवश ��पसे जुड़ाव रखने वाले स्टूडेंट्स की भी वैसी ही दशा हुई है सर.
उनका सारा भावनात्मक निवेश डूब गया…विश्वास करने की क्षमता ख़त्म हो गई… और अब आप कह रहे हैं कि आपको जान-बूझकर टारगेट किया जा रहा है!
आपने नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातों की आड़ में विद्यार्थियों की जान जोखिम में डालकर अपना मुनाफ़ा बढ़ाया…और आपको लगता है कि विद्यार्थी ये बात नहीं समझेंगे!
पचासों क्लासरूम सील किए गए, पर स्टूडेंट आपसे ही नाराज़ क्यों हैं! ये सवाल आप दूसरों से नहीं ख़ुद से पूछिये.
वो आहत हैं अपने साथ हुए धोखे से…गुरु से मिला धोखा भी एक तजुर्बा ही है…क्या खूब तजुर्बा मिला है बेचारों को! सारा भ्रम ही टूट गया!
#UPSC #VikasDivyakirti
मीठा मीठा गप
कड़वा कड़वा थू!
ऐसे कैसे चलेगा सर!
सारी दिक़्क़त दूसरों में है क्योंकि वो आपको बदनाम करना चाहते हैं, आपसे जलते हैं और आपके ��ाम पर व्यूज़ पाना चाहते हैं!
और आप सालों से बेसमेंट में क्लासेज़ चलाकर बेदाग़ हैं?
दृष्टि संस्थान में आपके अतिरिक्त तमाम अध्यापक हैं पर आपके अलावा छात्र कितने अध्यापकों का नाम जानते हैं?
UPSC मेंटरशिप का चेहरा आप बने हुए हैं…दुनिया भर का तजुर्बा, नैतिकता और उचित-अनुचित का ज्ञान आपके पास है, फिर भी नियमों के ख़िलाफ़ बेसमेंट में क्लासेज़ चलाकर बच्चों की जान आप जोखिम में डाल रहे हैं…
…लेकिन गलती दूसरों की है कि आपसे सवाल क्यों पूछा जा रहा है?
वाह मोदीजी वाह..!
#UPSC
भारतीय मीडिया की आज के समय की स्थिति क्या हे देख लो😏
1.शर्म लज्जा खत्म हो चुकी हे
2.झूठी खबरें फेलाने में नंबर 1
3.इनको भगवान का डर खत्म हो चुका हैं
4.चंद पैसे के लिए बिक जाते हे
#झूठीमीडिया_शर्म_करो लोग तुम्हारे ऊपर थूकते हे
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