सोचिए, मात्र 22 साल का लड़का था देवा द्विवेदी। 22 साल क्या age होती है? कॉलेज का लड़का, पढ़ने-लिखने वाला और ब्राह्मण था और मोदी एक्ट, जिसे SC-ST Act भी कहा जाता है कुछ लोगों के द्वारा, उसमें उसे फँसाया गया और अंत में उसने आत्महत्या कर ली।
अब एक और नाम याद आता है, विष्णु तिवारी का। विष्णु तिवारी वो भी 22 ही वर्ष के थे। जब वो आगरा सेंट्रल जेल से बाहर निकले तो 45 के हो चुके थे।
माता-पिता, दो भाई की मृत्यु हो चुकी थी, परिवार की ज़मीन बिक गई और रिहाई के बाद उनके सामने फिर से जीवन आरंभ करने का प्रश्न खड़ा हो गया।
सरकार को समझना चाहिए कि सबके सहने की एक सीमा होती है, और उसके बाद आम नागरिक क़ानून अपने हाथ में लेने लगता है।
मूर्ख मत बनाइए। आपका मंत्र है: दलीत देवो भव! पीड़ीत देवो भव! वंचीत देवो भव! शोषीत देवो भव!
जन्म-माह के दीये नहीं दिख रहे ‘नए वाले राम’ जी! चल नहीं पाया @PMOIndia का मायक्रो मैनेजमेंट! वो वडनगर-बनारस बाइक रैली को फिर से कब संबोधित करेंगे?
2025 तक सब मिलकर लव जिहाद, लैंड जिहाद, घुसपैठ, धर्मांतरण और जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून मांग रहे थे
लेकिन अब आपस में लड़ रहे हैं और जनसंख्या असंतुलन का मुद्दा खत्म हो गया।
इस खेल का असली खिलाड़ी कौन है?
याद रखिए,
डेमोग्राफी प्रतिदिन बदल रही है और परिणाम भयानक होगा।
अब एक समाचार 'सूत्रों' के नहीं, 'उच्च पदस्थ सूत्रों' के हिसाब से फैलाया जा रहा है कि सरकार UGC रोलबैक नवंबर के मध्य में करेगी। यह कोई समाचार नहीं है, यह वही धूर्तता है जो इनके प्रवक्ताओं के मुँह में माइक देने पर ये कहते हैं कि 'विषय कोर्ट में है'।
ध्यान रहे हमारी तीन माँगें हैं:
1. UGC रोलबैक
2. मोदी एक्ट में समुचित संशोधन
3. वर्तमान आरक्षण में समीक्षा
कोई एक माँग से कुछ नहीं होने वाला। संघर्ष चलता रहेगा। 5 महीना लगे, 2 साल लगे, 10 साल लगे।
Dr Doolla is an acclaimed professor of Energy Sciences at IIT Bombay. An MTech and a PhD from IIT, he has received excellence in teaching award twice. He recently caught a student cheating. The student committed suicide.
Dr Doolla has now been charged under the SC/ST Act.
किसी भी बच्चे की मौत से ज्यादा दुखद क्या हो सकता है लेकिन बच्चा जाकर सुसाइड ना कर ले इसकी आशंका या डर के चक्कर में प्रोफेसर को चीटिंग करते बच्चे को रोकना नहीं चाहिए?
क्या और कैसा सिस्टम बनाना चाह रहे हैं हम?
प्रोफेसर दुल्ला को कई बार उनकी टीचिंग के लिए ही अवॉर्ड मिल चुका है.. इसलिए बिना जांच पूरी हुए ये मान लेना कि अचानक रातों रात वो जातिवादी हो गए होंगे और जातिसूचक गालियां देने लगे होंगे, यकीन से परे लगता है..
SC/ST एक्ट का इस्तेमाल जिस तरह से हो रहा है वो इस देश के लिए महाघातक साबित होता जा रहा है। ऐसे डर के माहौल में टीचर/प्रोफेसर क्या ही पढ़ाएंगें बच्चों को..
IITs में बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं इसको जरुर देखिए लेकिन उसके साथ ये भी देखिए कि SC/ST एक्ट पर चर्चा क्यों ना हो?