माफ करना ऐ जिंदगी तुझे ही वक्त नही दे पा रहे हम तुम्हें बेहतर बनाने की कोशिश में तुम्हें ही नहीं जी पा रहे हम Master Degree in Economics UGC NET qualified
@rvineel_krishna@BJP4Haryana@mlkhattar@anilvijminister@Dchautala हरियाणा में ऐसी फुटबॉल academy ya ग्राउंड कब बनेगी sir odisha से ज्यादा स्कोप है हरियाणा में फुटबॉल का और ओड़िशा से ज्यादा जीडीपी ग्रोथ है हरियाणा ।की प्लीज आप हरियाणा निवासियों को बता सकते हैं क्यों हरियाणा सरकार ऐसी सुविधा नही
मुर्दा है वो, जो घर की बहन-बेटियों पर बात आ जाए तो भी चुपचाप सहता रहे। हमारी परंपरा ने हमें सिखाया है कि अगर कोई दुर्योधन किसी द्रौपदी को अपने जंघे पर बिठाने की बात करे तो तुम उसकी जंघा चीर डालो। अगर कोई रावण किसी सीता को हर ले जाए तो समंदर पार करके उसकी नाभि में तीर मारो।
जब बात घर की बहन-बेटी पर आ जाए तो प्रतिकार करना चाहिए, संविधान और क़ानून से भी ऊपर आता है स्वाभिमान। जिसका स्वाभिमान मर गया, उसके लिए क्या करेगा क़ानून और क्या करेगा संविधान। अजीत भारती की बहन पर टिप्पणी हुई। उन्होंने टिप्पणी करने वाले को उसी की भाषा में जवाब दिया। सामान्य वर्ग की बहन-बेटियों को भोग की विषय-वस्तु समझकर माँगने वालों को उसकी औक़ात दिखाई। यही होना चाहिए।
स्वाभिमान, अहंकार नहीं है। "मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ" - ये अहंकार है। "मेरी बहन-बेटियों का सम्मान मेरे लिए सर्वोपरि है" - ये स्वाभिमान है। "मेरी बहन-बेटियों पर टिप्पणी करने वाले के मुँह पर थूक दूँगा" - ये उस स्वाभिमान का प्राकट्य है। अगर उस प्राकट्य की परिणति एकतरफ़ा SC/ST एक्ट और फिर जेल है तो वही सही।
जहाँ तक चंद्रशेखर 'रावण' की बात है, उसने वाल्मीकि समाज की लड़की रोहिणी घावरी को धोखा दिया है। बेचारी कई महीनों से आवाज़ उठा रही है न्याय के लिए, कोई नहीं सुन रहा। कोई एक्ट नहीं लग रहा। कारण - चंद्रशेखर 'रावण' के पास वोट बैंक है, इसीलिए वह अधिक दलित है। रोहिणी घावरी सफाईकर्मी की बेटी है, इसीलिए उसका दलित वाला सर्टिफिकेट आधी साइज का ही है।
बहन-बेटी भी खैरात में चाहते हैं, कम अंक लाकर भी एडमिशन-नौकरी पाने से मन नहीं भर रहा।
सलमान तासीर पाकिस्तान के काफी धनी कारोबारी थे और राजनीति में भी एक्टिव थे ...बाद में 2008 से 2011 तक पंजाब पाकिस्तान के गवर्नर रहे...
उसकी अपनी दो शादियाँ हुई थीं ,पहली यास्मीन सहगल से और दूसरी आमना तासीर से और बाल बच्चे भी थे..
पर उनका एक जैविक बेटा भी था..आतिश तासिर,लंदन में पला बढ़ा और एंटी इंडिया माइंडसेट वाला लिबरांडू...
पर उसकी मां यानि जानी मानी हस्ती
तवलीन सिंह, भारतीय पत्रकार और स्तंभकार हैं...तवलीन सिंह और सलमान तासीर की शादी नहीं हुई थी... दोनों के बीच 1980 में एक संक्षिप्त संबंध था, जिससे आतिश तासीर का जन्म हुआ... दोनों कभी विवाहित नहीं थे और तवलीन सिंह ने आतिश को लंदन में पाला...
पर फिर भी उन्होंने कभी डिनाय नही किया कि आतिश का बाप कौन है...
पर कपिल सिब्बल जो सौरव दास के वकील है कोर्ट में कहते हैं कि
सौरव दास की पर्सनल फाइनेंस, उनकी इनकम, वो कहाँ रहते हैं, उनके माता-पिता कौन हैं , ये सब नहीं बताया जा सकता क्योंकि वो जर्नलिस्ट हैं...
पर सौरव दास सुप्रीम कोर्ट जजों की संपत्ति इनकम, पीएम की डिग्री और निजी जिंदगी जानना चाहते हैं…लेकिन खुद के बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहते...
मतलब दुनिया में कौन ऐसा जर्नलिस्ट है जो अपने माँ बाप का नाम छुपाता है...
तलवीन सिंह से बड़ा जर्नलिस्ट तो नही है,हां पर ऐसा जर्नलिस्ट जरूर है तो कपिल सिब्बल जैसा वकील अफोर्ड कर सकता है,तो अपनी जानकारी पब्लिक करने में किस बात का डर है ...
रिजर्वेशन की बात करते उसे जनरल कास्ट Vs SC/ST/OBC की लड़ाई बनाने की साज़िश वही लोग करते हैं जिन्हें इस वीडियो में बतायी सच्चाई पता है।
देखिए कैसे ओबीसी की 75% जातियों को 3% हिस्सा भी नहीं मिला आरक्षण के फायदे का और 25% जातियां 97% फायदा ले गईं।
उन्हें पता है समीक्षा होगी तो पूरे देश का सच सामने आ जाएगा
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
"ब्राह्मणों की लड़कियों का विवाह दलितों से होगा तभी जातिवाद खत्म होगा और तभी आरक्षण खत्म होगा" ऐसा बहुत से दलित थिंकर्स, दलित लीडर्स , दलित इंफ्लूएंसर कहते बोलते देखे जा सकते हैं।
इस पर कुछ बिंदु।
१. क्या ब्राह्मण की बेटी से विवाह करके दलित की जाति बदल जाएगी? यदि ऐसा है तो चिराग़ पासवान की माता का नाम रीना शर्मा है, वो एक पंजाबी ब्राह्मण परिवार से आती हैं। किंतु आज भी चिराग पासवान एक दलित आरक्षित सीट से चुनाव लड़ता है। जब ब्राह्मण की बेटी से विवाह करके चिराग पासवान की जाति नहीं बदली, वो अभी भी दलित ही हैं तो बाकी के दलितों की जाति या सम्मान में वृद्धि कैसे होगी? दूसरा उदाहरण, अखिलेश यादव ओबीसी हैं, उनका विवाह क्षत्राणी डिंपल से हुआ डिंपल अब यादव हो गईं, अखिलेश डिंपल के बच्चे अभी भी ओबीसी हैं, तो जाति लड़की की बदली ना कि पुरुष की और ना ही बच्चों की।
तो ब्राह्मण, क्षत्रिय महिलाओं से विवाह करके तुम जातिवाद को कैसे हरा पाओगे? हां अपनी बेटियां ब्राह्मण, बनिया, क्षत्रियों को ब्याहोगे तो बच्चे सवर्ण पैदा हो सकते हैं । आपका तरीका थोड़ा उल्टा है।
२. विवाह पर आप किसी पर रोक नहीं लगा सकते हो कि आपको दलितों से ही, सवर्णों से ही विवाह करना होगा। लड़की की, लड़के की इच्छा को सम्मान करना आवश्यक है। हां, यदि ब्राह्मण की लड़की किसी जाटव से प्रेम में है और जाटव की लड़की ब्राह्मण से प्रेम में है और दोनों विवाह करने की इच्छा रखते हैं तो मात्र जातीय आधार पर इस विवाह को रुकवाना गलत है (हां अन्य कई कारण हो सकते हैं परन्तु मात्र जाति नहीं)
३. आप ब्राह्मण की बेटी केवल ब्राह्मणों को उकसाने के लिए मांग रहे हैं, इसका और कोई भी कारण नहीं है
४. दलित अपनी से अधिक दलित जाति में स्वयं विवाह नहीं करा रहे जैसे जाटव पासी में विवाह नहीं करा रहे परंतु गलत ब्राह्मण है।
मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?
मनुस्मृति कहती है - विन्देत सदृशं पतिम्। कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?
पुत्रेण दुहिता समा। पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?
बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः। मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती हैं, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।
धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?
पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः। आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?
तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः। धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है 'आधी आबादी'। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का सन्देश दे सकते हैं आप? अन्योन्यस्य। एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।
मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्यशालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृहदीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।
अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते… रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसङ्ग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुःखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।
लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। क़ुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गाँधी आज 'स्त्रीवादी' बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसीलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी।
मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन ही है।
सैनिक स्कूल से पढ़ाई, किरोड़ीमल कॉलेज के टॉपर, UGC-NET क्वालिफाइड और जर्नलिज्म के प्रोफेसर.....
जब इतने तगड़े क्रेडेंशियल्स वाला इंसान सरकार और व्यवस्था की नीतियों पर तर्क के साथ सवाल उठाता है, तो 'दो कौड़ी के ट्रोलर्स' का लॉजिक पानी मांगने लगता है!
कल सुबह से जनरल केटेगरी प्रोटेस्टर, उनके प्रोटेस्ट के समर्थक अजीत भारती और हम लोगों को गालियाँ देनें वाले आईटी सेलियों और उनके चूजों से कुछ सवाल :
— क्या 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटना सही था?
— क्या फ़र्ज़ी SC/ST Act के तहत मिलने वाली पेंशन और लाखों रुपये के मुआवज़े की व्यवस्था उचित है?
— कुछ दिन पहले मुआवज़े की राशि में 40% बढ़ोतरी के प्रस्ताव को आप सही मानते हैं?
— 3 लाख करोड़ की स्कीम हर साल SC ST वेलफेयर और स्कीम में बांट दिए जाते हैं, सही है क्या?
— –40 नंबर पाने वाले से अपनी माँ का इलाज करा लोगे क्या?
— –9 नंबर पाने वाले से अपने बच्चों को पढ़वा लोगे क्या?
— क्या किसी रैली में यह कहना उचित है “हिसाब तो चुकता करना ही होगा”? आखिर General Category ने ऐसा क्या अपराध किया है?
— अगर किसी General Category छात्र या युवा के साथ अन्याय हो, तो उसकी शिकायत के लिए क्या समान रूप से मजबूत व्यवस्था है?
— UGC की नई Equity Guidelines में क्या General Category छात्रों की शिकायतों और अधिकारों को भी उतनी ही गंभीरता से संबोधित किया गया है?
— क्या किसी छात्र को उसकी जाति के आधार पर पहले से ही संदिग्ध या दोषी मानना उचित है?
— क्या समानता की बात करने वाले नियमों में भी सभी वर्गों के लिए समान अधिकार और निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए?
— अगर General Category के छात्र इन प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते हैं, तो क्या उन्हें चुप करा देना लोकतंत्र है?
— क्या शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार सिर्फ देशविरोधियों और CJP के लिए है?
एक आम आदमी आपको वोट देता है, आपका समर्थन करता है और आपके लिए लाठियाँ तक खाता है लेकिन जब वही व्यक्ति अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सवाल पूछता है, तो उसे लट्ठ मारते हो, ज़मीन पे घसीटते हो और महिलाओं से बदसलूकी करते हो।
कोई भी चाटुकार इन तीखे सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा।
यह भारत के असल में प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे वर्ग का एकमात्र विरोध-प्रदर्शन है।
यहाँ तक कि 100 दिलीप मंडल भी उनका मुकाबला नहीं कर सकते।
हरियाणा कांग्रेस का #SajjanKumar पर इतना प्यार उमड़ना सिर्फ उन हज़ारों सिख पीड़ित परिवारों पर ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा पर हुए ज़ख्मों पर नमक रगड़ना है।
हज़ारो परिवार उजाड़ने का अपराधी ज़िंदा दिल नहीं मरी आत्मा का होता है। वो मिट्टी की नहीं लहू की ख़ुशबू से जुड़ा होता है। 😡😡
दीदी, तब भी कांग्रेस जिन्ना और मुस्लिम लीग के सामने झुकी थी और वंदे मातरम् का हिस्सा काट दिया था …आज फिर कांग्रेस ‘जिन्ना जैसे’ लोगों को ख़ुश करने के लिए फिर झुक गई है और वंदे-मातरम की तौहीन कर रही है…जिन्ना कब्र से राहुल गाँधी/सोनिया जी को शाबाशी दे रहा है !
यह रहा नेहरू जी का जिन्ना के नाम पत्र 👇
अरे अरे अरे भोली भाली सुप्रिया जी. जनता को यह बतलाएँ कि 1937 में आजादी के महानायकों ने वंदे मातरम के दो छन्द ही गाए जाने का फैसला क्यों लिया था?
आप नहीं बतलाएँगी मैं बतला देता हूँ.
वंदे मातरम् स्वतंत्रता सेनानियों का सबसे पसंदीदा नारा हुआ करता था. हर सभा में वंदे मातरम् का गायन होता था. कांग्रेस की सभाओं में भी पूरे वंदे मातरम् का गायन होता था. मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा.
धीरे- धीरे वंदे मातरम की व्यापकता ने अंग्रेजों को इतना परेशान किया कि उन्होंने इसपर प्रतिबंध लगा दिया. बैन के बाद भी वंदे मातरम् का गायन बंद नहीं हुआ.
1923 की बात है कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर ने काकीनाडा (Kakinada) (जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश में है) में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में मंच से इस गीत का विरोध किया था. विरोध ऐसा कि वे सभा से बाहर चले गए थे.
कांग्रेस के लगभग सभी मुस्लिम नेताओं को इसपर आपत्ति थी. 1930 के दशक में मुस्लिम लीग ने इस गीत के खिलाफ देशव्यापी विरोध तेज कर दिया. मोहम्मद अली जिन्ना इसका अगुआ बना.
इसी गतिरोध और सांप्रदायिक मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने 1937 में केवल शुरुआती दो छंदों को गाने का बीच का रास्ता निकाला, क्योंकि शुरुआती पदों में केवल मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन था, किसी धार्मिक देवी का नहीं.
आगे वंदे मातरम् का विरोध करने वालों ने अलग देश ले लिया. वहाँ वंदे मातरम् नहीं गाया जाता. जिनको वंदे मातरम् नहीं गाना था वे चले गए. आप इस देश में बैठकर वंदे मातरम् के छन्दों का विरोध क्यों कर रही हैं? देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाला आपका मालिक इस वंदे मातरम् का विरोध क्यों कर रहा है?
My dear lady,
Soldiers pay their taxes in advance, even before they get their pay.
You can go for vacation to such areas bcoz our soldiers are guarding it day & night, even at the cost of their lives.
Your Language is the reflection of good parenting & schooling. Be respectful always.
Learn to be a good law abiding citizen before asking for entitlement.
And lastly ….
“Get Well Soon”
Jai Hind 🇮🇳
CIA पुलिस स्टाफ....
इनके लिये संविधान की एक अलग किताब है जो इन्होंने खुद लिखी है।
आज हर गाम में 5_10 अवैध हथियार हैं, जो इनकी कृपा से हैं।
ये ना वर्दी में होंगे ना इनकी गाड़ी पर नंबर प्लेट होगी।
रात को ज्यादातर नशे में होंगे।
अपराधी के सरेंडर करने पर भी ये गोली मार देते हैं।
आज हर गाम में गांजा, सुल्फा बड़े ही आराम से इनकी ही कृपा से आसानी से उपलब्ध हो जाता है।।
किसी भी एरिया में मांगी गई फिरौती में लगभग इनकी सहमति पाई जाती है।।
अपराधी तो इनके लिये कस्टमर हैं, और आम नागरिक कीड़े मकोड़े।
अगर इस महकमे पर निगरानी और सख्ती रखी जाये तो 90% अपराध खत्म हो जायें।।
🚨 OPERATION SINDOOR DOCUMENTARY (PART 1) 🚨
Look how Pakistani Military General was begging for cease-fire and how India's BrahMos became Pakistans nightmare 🇮🇳🔥
A must watch documentary 👇🏻 https://t.co/iRdq9wK59t
This kid is back, he has literally become a NIGHTMARE for left-liberals🔥
He is exposing CJP, Dhruv Rathee, Communists, Congress all at once brutally.
Dhruv Rathee tried to silence him with copyright strikes, but now he’s roasting them at 10× speed
More power to him! 🙌🔥
किसने कह दिया गांधीजी अहिंसा के पुजारी थे? अहिंसा का पुजारी कहकर खामखा गांधी जी को बदनाम किया जा रहा है… गांधीजी हिंसा के जबरदस्त समर्थक थे… बस उनकी हिंसा और अहिंसा सेलेक्टिव होते थे अर्थात वह अपने फायदे अनुसार हिंसा और अहिंसा करते।
• जब कोई हिंसा अंग्रेजों के विरुद्ध होती वह अहिंसा के पुजारी बन जाते… मसलन, जैसे ही अंग्रेजों के विरुद्ध कोई आंदोलन विशाल रूप ले लेता था… तभी गांधी जी भारतीयों को अहिंसा का पाठ पढ़ाते हुए आंदोलन समाप्त करवा देते थे। अपने इसी आर्ट के कारण गांधी जी को अंग्रेजों का ‘प्रेशर कुकर’ की उपाधि मिली थी। अंग्रेजों के विरुद्ध के देश के उबाल को शांत करके ठंडा कर देना गांधीजी की कला थी।
• जैसे ही कोई हिंसा अंग्रेजों के हित में होती थी गांधी जी हिंसा के समर्थक हो जाते थे… वर्ल्ड वॉर में यूरोपियों और डचों के विरुद्ध हथियार उठाने के लिए गांधीजी ने देश घूम घूमकर भारतीय सैनिकों की भर्ती करवाई थी ब्रिटिश आर्मी में।
• विभाजन के समय जैसे ही मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन की घोषणा कर हिन्दुओं के कत्लेआम का आव्हान किया… गांधी जी हिंसा के समर्थक हो गए और मुस्लिम लीग का पक्ष लेने लगे। दंगों में मारे गए हिन्दू गणेश की मृत्यु पर गांधी जी ने कहा… ऐसे लाख हिन्दू कुर्बान, लेकिन मैं मुस्लिम लीग और जिन्नाह को गले लगाऊंगा। नतीजन, मुस्लिम लीग के हौंसले इतने बुलंद हो गए के लाखों हिन्दू मारे गए।
• तब जैसे ही क्रिया की प्रतिक्रिया में मुस्लिम लीग के गुंडों के विरुद्ध उठ खड़े हुए हिन्दू संगठन… गांधी जी फटाफट अहिंसा के पुजारी बन जाते हैं, हिन्दुओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाने लगे।
…सो, ऐसी थी गांधी जी की मनपसंद हिंसा और मनपसंद अहिंसा।
What a brilliant DOCUMENTARY ON HYPOCRISY OF INDIAN LIBERALS 🔥
He explains the concept of Reverse Andhbhakti through this masterpiece.
Do watch this, Kudos to the creator 👏