मैंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लड़ते हुए नहीं देखा, लेकिन कल दिल्ली की सड़कों पर इस देश के भविष्य के लिए लड़ते हुए युवाओं को जरूर देखा। उनकी आँखों में उम्मीद थी, दिल में जुनून था और आवाज़ में बदलाव की गूंज थी। यही युवा भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। 🇮🇳
छात्रों की आवाज़ उठाने और उनके हक़ की बात करने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी के साथ जिस तरह का दिल्ली पुलिस द्वारा व्यवहार किया जा रहा है, यह लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
एक समय था जब नरेंद्र मोदी अनशन को लोकतंत्र की ताक़त बताते थे और अनशनकारियों पर बल प्रयोग की आलोचना करते थे। आज वही सत्ता शांतिपूर्ण विरोध और अनशन को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर कुचलने की कोशिश करती दिखती है। क्या सिद्धांत सत्ता बदलते ही बदल जाते हैं? लोकतंत्र की असली परीक्षा सत्ता में रहते हुए असहमति का सम्मान करने में होती है, उसे दबाने में नहीं।
दौसा के लालसोट क्षेत्र के राहुवास में बच्चियों के साथ हुई घटना बेहद निंदनीय और चिंता जनक है।
मेरी सरकार व प्रशासन से मांग है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल, निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए।
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पीढ़ियों से जिन जंगलों और जमीनों पर आदिवासी समुदाय रहते आए हैं, उन्हें अचानक "अतिक्रमण" और "अवैध कब्जा" बताकर उजाड़ देना बेहद चिंताजनक है। जंगल आदिवासियों के लिए केवल भूमि नहीं, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति, आजीविका और अस्तित्व का आधार हैं। बिना न्यायपूर्ण प्रक्रिया, ग्राम सभा की सहमति और उनके पारंपरिक वन अधिकारों की मान्यता के बेदखली लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
मुंबई लोकल में रोज़ाना लाखों लोग इंसानों की तरह नहीं, “कॉकरोच” की तरह धक्के खाकर सफर करने को मजबूर हैं। 2025 में ही मुंबई रेलवे में 2200+ मौतें होना बताता है कि आम जनता की जान की कीमत आज भी सबसे कम है।
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मध्यप्रदेश से लेकर ओडिशा तक आदिवासी समुदाय अपनी जमीन बचाने के लिए बीजेपी सरकार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर मीडिया में कोई बहस तक नहीं हो रही है।
मणिपुर से ओडिशा तक आदिवासी समुदायों पर हो रहे अत्याचार पर मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग जैसी जिम्मेदार संस्थाएं आखिर कब जागेंगी? क्या सत्ता इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि मूलनिवासियों की आवाज ही दबा दी जाए? आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा