बहुजन समाज पार्टी 2027 मिशन के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर चुकी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती जी ने साफ किया है कि BSP अपने दम पर चुनाव लड़ेगी, साफ-छवि वाले उम्मीदवार उतारेगी और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेगी। बहुजन आंदोलन की ताकत ही असली परिवर्तन की गारंटी है।
@Mayawati
#राजस्थान: माननीय आकाश आनंद जी (राष्ट्रीय संयोजक, बसपा) 15 मार्च 2026 को बहुजन दिवस व मान्यवर कांशीराम साहब जी जयंती के अवसर पर भरतपुर में जनसभा को संबोधित करेंगे।
सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों व युवाओं से अनुरोध है कि अधिकतम संख्या में पहुँचकर कार्यक्रम को सफल बनाएं।
@bspindia
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए (PDA) भी अच्छी तरह से जानता है।
साथ ही, ’बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाज़ी के सिवाय कुछ भी नहीं है अर्थात् सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है, जैसाकि अन्य विरोधी पार्टियाँ भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नज़र आती हैं।
वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बी.एस.पी.-विरोधी रवैये के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज़्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है।
वैसे सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत ख़ासकर सन 1993 में सपा व बी.एस.पी. की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीएम श्री मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बी.एस.पी. को दिनांक 1 जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर श्री कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया ज़िला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था।
और जब बी.एस.पी. की सरकार ने कासगंज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?
इतना ही नहीं बल्कि सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को साथ मिलाकर इन्हें सत्ता की मास्टर चाबी दिलाकर इन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के मिशन के लिये अपना पूरा जीवन इसी संघर्ष में लगा देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिली ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दिया था।
साथ ही, मुस्लिम समाज को दिये गये वादे के मुताबिक मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम से नया उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आईआईएम के पास बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंगवेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचारित करती है।
सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान?
इसके अलावा, अपने इस दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभावित हुये हैं।
हक़ीक़त में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण बीजेपी को राजनीतिक रोटी सेंकने का भरपूर मौक़ा मिलता रहा और इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज तथा साथ ही हर प्रकार से त्रस्त प्रदेश की करोड़ों आमजनता है।
कुल मिलाकर, सपा का दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व बहुजन समाज विरोधी जो जातिवादी व साम्प्रदायिक रवैया शुरू से अभी तक भी रहा है तो यह किसी से छिपा नहीं है।
इसके साथ ही सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तथा बहुजन एकता के लिये उनके योगदान की सराहना करना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहान्त के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित की गयी थी? सपा बहुजन समाज को जवाब दे।
अतः सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये, यही बी.एस.पी. की अपील है। धन्यवाद। जय भीम, जय भारत।
UGC के विरोध में "सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पार्थ यादव" ने पिटीशन दायर की थी,जबकि
UGC में ओबीसी पर भेदभाव न हो इसलिए शामिल किया जा रहा था !!
अब फिल्म "यादव की की लव स्टोरी" में जो अपमान हुआ उसके लिए पिटीशन दायर करने नहीं गए आखिर क्यों ?
यादव भाइयों कुछ जवाब दो ?
मैं राजेश कुमार गौतम, एक समाजसेवी के रूप में, यह संकल्प लेता हूँ कि 01 जनवरी 2026 की पहली किरण से लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव तक, पूरे जनपद में दिन-रात सतत संघर्ष करते हुए बहुजन समाज को संगठित, जागरूक और सशक्त करने का कार्य करूँगा।
मेरा उद्देश्य पूर्णतः स्पष्ट है —
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदरणीय बहन मायावती जी को 2027 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना।
यह केवल मेरा व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, सम्मान और सत्ता में वास्तविक भागीदारी की उस साझा लड़ाई का हिस्सा है, जिसे बहुजन समाज वर्षों से लड़ता आ रहा है।
अब समय है निर्णायक बदलाव का।
और आप — क्या इस ऐतिहासिक परिवर्तन के साक्षी ही नहीं, सहभागी बनने को तैयार हैं?
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