मेरा मोदी जी से आग्रह है ज़्यादा लोड ना लें
यह करतब दिखाने की कोई ज़रूरत नहीं है
राहुल जी certified scuba diver हैं
आप ना कूद पड़िएगा पानी में
टास्क तो मिला है, पर आपने कुछ करना नहीं है!
भक्तों के चक्कर में लेने के देने ना पड़ जायें
🚨Narendra Modi in his address to the nation:
Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress Congress..
सम्राट चौधरी का जीवनी प्रशांत किशोर की जुबानी।
खैर बिहार को 7वी फेल मुख्यमंत्री मुबारक.
संघीयों को अभी और इंतजार करना होगा बिहार में खुद का सीएम बनाने के लिए अभी तो फिलहाल लालू यादव के पाठशाला से आए 7वी फेल का चाकरी करने का आदत डाल लेना चाहिए।
जय बिहार
ओ भाई ये तो @Pawankhera ने रेल दिया,
एंकर - पाकिस्तान का ईरान के साथ लंबा इतिहास है, इसलिए अगर वे मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं तो कोई बात नहीं।
पवन खेरा - आप क्या कह रहे हैं? भारत का ईरान के साथ उससे भी लंबा इतिहास है, हज़ारों साल पुराना।
एंकर - लेकिन विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि हम 'दलाल' नहीं हैं। पाकिस्तान है,
खेरा - तो क्या मोदी 'दलाल' थे जब उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 'वार रुकवा दी थी,
तब तो Paw Paw ने War रुकवा दिया था,
Trump पाकिस्तान के PM के पोस्ट को रीपोस्ट कर रहे हैं और उन्हें अमेरिका और Iran के बीच बातचीत कराने के लिए चुन रहे है।
एक समय था जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आते थे, भारतीय संसद में खड़े होकर पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए खुलकर लताड़ते थे।
डॉ. मनमोहन सिंह 🫡
नरेंद्र मोदी यह तो बताएं कि उन्होंने अमेरिका और इजरायल का क्यों साथ दिया? हमारी सारी ऊर्जा सप्लाई तो मध्य पूर्व से आती है। चाहे गैस हो, LPG, LNG हो... उन्हें पता था कि यह होगा फिर भी उन्होंने अपने समझौते खराब कर लिए
- कपिल सिब्बल
पूरी दुनिया का कोई भी लीडर अपनी ऑडियो म्यूट नहीं करवाता, पर ये फर्जी 'विश्वगुरु' अपनी हर वीडियो को म्यूट करवा देता है।
क्योंकि पूरा देश जान चुका है भैंस जब भी पूंछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी
कल प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत की और उसके बारे में लंबा-चौड़ा ट्वीट भी किया। लेकिन सवाल यह है कि जब हालात बिगड़ रहे थे तब वे चुप क्यों थे?
हम तो पहले दिन से कह रहे थे कि प्रधानमंत्री को तुरंत ईरान से बात करनी चाहिए, लेकिन मोदी जी उस समय United States और Israel की खुशामद में व्यस्त रहे।
ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या हुई, 160 से ज़्यादा मासूम स्कूली बच्चे मारे गए। भारत के मेहमान ईरानी नौसैनिक भी हमले में मारे गए, लेकिन तब प्रधानमंत्री की तरफ़ से एक शब्द तक नहीं आया।
इतना ही नहीं, ईरान पर अमेरिकी हमले से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री इज़रायल पहुँचे और वहाँ खड़े होकर इज़रायल और अमेरिका की तारीफ़ों के पुल बांधने लगे।
देश जानना चाहता है, क्या भारत की विदेश नीति अब देशहित से नहीं, बल्कि अमेरिका और इज़रायल की पसंद से तय होगी?
- @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP