Actually, NOBODY likes you when you're depressed. Plain and simple. We can talk all day about MENTAL HEALTH and how important it is but the moment you are depressed, people really start to distance themselves.
They see you as NEGATIVE, a BURDEN, and someone just too HEAVY to handle.
As the Founder of the Cockroach Janta Party, I hereby propose a resolution that if the CJP comes in power, no Chief Justice shall be granted a Rajya Sabha seat as a post-retirement reward.
All those in favour, say “Aye.”
नींद नहीं आ रही है , और सुबह के 4 बजने वाले हैं।
क्यों?
क्योंकि, आज एक उम्मीद टूट गई है कि इस देश में न्याय मिलेगा , अगर कोई सुप्रीम कोर्ट जाता है।
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने एक फैसले में जबरदस्ती रद्द की गई उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती को बहाल कर दिया है।
माई लार्ड, अगर यह भर्ती गलत तरीके से रद्द नहीं होती तो, आज हम 3200 अभ्यर्थी अपना interview देके इसमें से 910 लोग रोजगार पा जाते और आपके द्वारा दी गई कॉकरोच की संज्ञा में नहीं आते। आपसे उम्मीद है कि आप हमारे दर्द को समझे। जहां सचमुच में पेपर लीक हो रहे है वहां तो परीक्षा रद्द होती है, लेकिन एक परीक्षा ढंग से गलती से हो गई तो उसको जबरदस्ती रद्द कर दिया गया। ऐसे में अगर हम सब सफल होने के बाद भी बेरोजगार बना दिए जाए जबरदस्ती, तो आप हम लोगो को कॉकरोच कहेंगे?
आप क्यों नहीं एक कानून पारित करते है, कि कोई भी पेपर लीक न हो। कि कोई भी पेपर सिर्फ राजनीति की रोटियां सेकने के लिए निराधार तरीके से रद्द न किया जाए। कि जब रिजल्ट दे दिया जाए तो भर्ती प्रक्रिया एक माह के अंदर पूरी की जाए।
हम कॉकरोचेस को आप ही , इस देश के लिए कुछ करने के काबिल बना दें। आप तो सब के सकते है न? तो क्या यह नहीं कर सकते है?
अगर कर सकते हैं तो करें, लेकिन कॉकरोच न कहें। हम काकरोच नहीं हैं, मेहनत के बाद भी ज़बरदस्ती बेरोजगारी झेल रहे युवा हैं।
आप भी कभी युवा रहे होंगे, आप ने भी पढ़ाई की होगी। कभी आपको शायद वो समय नहीं देखना पड़ा जो हम लोग देख रहे हैं।
@amitkilhor@indSupremeCourt
@myogioffice@rashtrapatibhvn@htTweets@AmarUjalaNews@ravish_journo@yadavakhilesh@YogendraUpadhy@DainikBhaskar@JagranNews खुला पत्र
सेवा में,
माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश महोदय,
माननीय भारत के राष्ट्रपति महोदया,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार,
विषय: उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के संबंध में याचिका संख्या 368/2026 में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का पालन करने हेतु।
महोदय
मैं यह पत्र केवल एक अभ्यर्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक के रूप में लिख रही हूँ जिसे आज भी भारतीय संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, न्याय और समानता पर विश्वास है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 16/17 अप्रैल 2025 में सम्पन्न हुई असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का 7 जनवरी 2026 को रद्द किया जाना ,वो भी सितंबर 2025 में 2 चरणों में साक्षात्कार की तिथियां घोषित करने के 4 महीने बाद, हजारों ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत पीड़ादायक सिद्ध हुआ है। अभ्यर्थियों ने 2022 से 2025 तक कठिन परिश्रम किया, आर्थिक और मानसिक संघर्ष झेले, पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी तैयारी जारी रखी और अपने भविष्य को इस भर्ती प्रक्रिया से जोड़ा।
कोई भी जागरूक नागरिक पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अनुचित साधनों का समर्थन नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। परंतु न्याय का मूल सिद्धांत यह कहता है कि दंड व्यक्तिगत अपराध के आधार पर होना चाहिए, न कि सामूहिक रूप से निर्दोष लोगों पर थोपा जाए। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट है कि पूरी परीक्षा ( जिसमें 33 विषय शामिल हैं) को सिर्फ 19 लोगो के ऊपर संदेह होने के चलते रद्द किया गया, वो भी 9 महीने बाद।
यदि कुछ व्यक्तियों पर संदेह या आरोप हैं, तो कार्रवाई उन्हीं तक सीमित रहनी चाहिए जिनके विरुद्ध ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों। हजारों मेहनती युवाओं के सपनों और वर्षों की मेहनत को बिना व्यापक और निर्णायक प्रमाण के समाप्त कर देना न्याय, समानता और संवैधानिक मर्यादाओं के विरुद्ध प्रतीत होता है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में “प्रोपोर्शनट एक्शन” अर्थात “अनुपातिक कार्रवाई” के सिद्धांत पर बल दिया है, जिसके अनुसार दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर करना आवश्यक है। सामूहिक दंड किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का पहला विकल्प नहीं होना चाहिए।
आज अनेक अभ्यर्थी मानसिक तनाव, सामाजिक अपमान और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं। अनेक महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के कारण अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय टाल दिए। इस प्रकार की अनिश्चितता उनके जीवन पर स्थायी प्रभाव डाल रही है।
यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं है; यह देश के युवाओं के उस विश्वास का प्रश्न है जो वे सार्वजनिक संस्थाओं और मेरिट प्रणाली पर रखते हैं। यदि ईमानदार अभ्यर्थियों को भी बिना दोष सिद्ध हुए दंडित किया जाएगा, तो युवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
अतः इस खुले पत्र के माध्यम से मेरा विनम्र निवेदन है कि—
1. निर्दोष एवं ईमानदार अभ्यर्थियों को सामूहिक दंड से बचाया जाए।
2. किसी भी परीक्षा रद्दीकरण अथवा कठोर प्रशासनिक कार्रवाई से पूर्व निष्पक्ष, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
3. जांच एजेंसियां न्यायालय एवं जनता के समक्ष ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, केवल सामान्य आरोपों या धारणाओं के आधार पर कार्रवाई न हो।
4. दोषियों को दंडित करते समय निर्दोष अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों और भविष्य की रक्षा की जाए।
5. भविष्य में उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने हेतु ठोस सुधार लागू किए जाएं।
मुझे आशा है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं और उत्तर प्रदेश सरकार इस विषय को केवल प्रशासनिक मुद्दा न मानकर लाखों युवाओं के भविष्य और न्याय की भावना से जोड़कर देखेंगी।
इतिहास उन संस्थाओं को सम्मान देता है जो शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि निर्दोषों की रक्षा करते हुए न्याय सुनिश्चित करती हैं।
सादर,
समस्त चयनित अभ्यर्थी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा,2022 (16-17अप्रैल, 2025)
खुला पत्र
सेवा में,
माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश महोदय,
माननीय भारत के राष्ट्रपति महोदया/महोदय,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार,
**विषय: उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के संबंध में याचिका संख्या 368/2026 में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का अनुपालन करने के संबंध में।
महोदय
मैं यह पत्र केवल एक अभ्यर्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक के रूप में लिख रहा/रही हूँ जिसे आज भी भारतीय संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, न्याय और समानता पर विश्वास है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 16/17 अप्रैल 2025 में सम्पन्न हुई असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का 7 जनवरी 2026 को रद्द किया जाना ,वो भी सितंबर 2025 में 2 चरणों में साक्षात्कार की तिथियां घोषित करने के 4 महीने बाद, हजारों ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत पीड़ादायक सिद्ध हुआ है। अभ्यर्थियों ने 2022 से 2025 तक कठिन परिश्रम किया, आर्थिक और मानसिक संघर्ष झेले, पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी तैयारी जारी रखी और अपने भविष्य को इस भर्ती में देखा।
कोई भी जागरूक नागरिक पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अनुचित साधनों का समर्थन नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। परंतु न्याय का मूल सिद्धांत यह कहता है कि दंड व्यक्तिगत अपराध के आधार पर होना चाहिए, न कि सामूहिक रूप से निर्दोष लोगों पर थोपा जाए। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट है कि पूरी परीक्षा ( जिसमें 33 विषय शामिल हैं) को सिर्फ 19 लोगो के ऊपर संदेह होने के चलते रद्द किया गया, वो भी 9 महीने बाद।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में “प्रोपोर्शनट एक्शन” अर्थात “अनुपातिक कार्रवाई” के सिद्धांत पर बल दिया है, जिसके अनुसार दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर करना आवश्यक है। इस आधार पर निर्णय सुनाया,जिसे हम अभ्यर्थियों ने पूरे मन से स्वीकार किया। साथ ही भारतीय न्याय व्यवस्था पर विश्वास और बढ़ गया ।
आज अनेक अभ्यर्थी मानसिक तनाव, सामाजिक अपमान और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। कई अभ्यर्थी अन्य सेवाओं के विकल्पों की आयु सीमा पार कर चुके हैं।अब उन्हें बस इसी भर्ती से आस है।अनेक महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के कारण अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय टाल दिए। इस प्रकार की अनिश्चितता उनके जीवन पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव डाल रही है।
यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं है; यह देश के युवाओं के उस विश्वास का प्रश्न है जो वे सार्वजनिक संस्थाओं और मेरिट प्रणाली पर रखते हैं। यदि ईमानदार अभ्यर्थियों जो कि न्यायिक परीक्षण से गुजर चुके हैं ,के भविष्य को इस तरह माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जिम्मेदार संस्था द्वारा शीघ्र अनुपालन न कर अनावश्यक देरी की गई तो युवाओं का विश्वास इस व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
अतः इस खुले पत्र के माध्यम से मेरा विनम्र निवेदन है कि माननीय हाईकोर्ट के 368/2026 आदेश का अनुपालन त्वरित गति से कराया जाय, ताकि वर्षों से इस भर्ती का इंतजार कर रहे उच्च योग्यता प्राप्त व ऊर्जा से भरे युवा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में योगदान देकर विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। विदित है कि उत्तर प्रदेश में नए सत्र की शुरुआत जुलाई माह से होती है।यदि शीघ्र अनुपालन किया गया तो सत्र प्रारंभ होते ही महाविद्यालयों को नवचयनित युवाओं का सक्रिय योगदान प्राप्त होगा, जिससे प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार निश्चित है।
मुझे आशा है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं और उत्तर प्रदेश सरकार इस विषय को केवल प्रशासनिक मुद्दा न मानकर लाखों युवाओं के भविष्य न्याय की भावना , विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य से जोड़कर देखेंगी।
इतिहास उन संस्थाओं को सम्मान देता है जो शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि निर्दोषों की रक्षा करते हुए न्याय सुनिश्चित करती हैं।
सादर,
समस्त चयनित अभ्यर्थी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा,2022 (16-17अप्रैल, 2025)
@myogioffice@myogiadityanath@rashtrapatibhvn@upesscprayagraj@AmarUjalaNews@ravish_journo@dpradhanbjp@yadavakhilesh@RahulGandhi@kashikirai@sonker_ragini@BJP4UP
Upload the pledge of Non Cooperation on your social media, students.
You will need to snatch your future from the mouth of these demons. They are going to give you easy.
Make a pledge. Ask your teachers to make the pledge.
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