#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 4 पृष्ठ 100 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि यदि किसी का पति कमाने के लिए परदेस गया हो तो स्त्री 3 वर्ष बाद पर-पुरुष से नियोग (दुष्कर्म) कर संतान पैदा करे और वह संतान पहले पति की मानी जाएगी।
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सत्यार्थ प्रकाश,
समुल्लास 4, पृष्ठ 70 पर दयानंद सरस्वती ने
भूरे नेत्रों वाली, गंगा, यमुना आदि नदियों या पार्वती आदि पर्वतों के नाम वाली कन्या से विवाह वर्जित बताया और 24 वर्ष की युवती के लिए 48 वर्ष के प्रौढ़ पुरुष का विवाह उत्तम तय किया
‘भिखारी’ बनाते हैं। यहाँ दयानंद जी ने प्रभु राम, कृष्ण, नारायण, शिव, सीता, रुक्मिणी, लक्ष्मी और पार्वती को केवल हाड़-मांस का साधारण राजा-रानी बताकर उनके ईश्वरीय अस्तित्व को ही नकार दिया!
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सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें
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दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 2, पृष्ठ 31 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि प्रसूता स्त्री बालक को केवल 6 दिन दूध पिलाए, फिर स्तनों पर औषधि का लेप लगाकर दूध सुखा दे ताकि दो महीने में पुनः युवती हो
#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
प्रारब्ध कर्म और रक्षा का विधान
धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य अपने कर्म भोगता है। केवल धागा बांधने से प्रारब्ध नहीं कटता; पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति ही कर्म बंधनों और काल के चक्र से रक्षा कर सकती है।
Kabir is God
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प्रारब्ध कर्म और रक्षा का विधान
धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य अपने कर्म भोगता है। केवल धागा बांधने से प्रारब्ध नहीं कटता; पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति ही कर्म बंधनों और काल के चक्र से रक्षा कर सकती है।
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"सच्चा जीवन रक्षक: पूर्ण परमात्मा"
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 और ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मंत्र 1 में प्रमाणित है कि केवल पूर्ण परमात्मा (कविर्देव / Kabir is God) ही पापों का नाश करके, संकटों को हरकर साधक की आयु बढ़ा सकते हैं।
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जन्म-मरण के सबसे बड़े बंधन से मुक्ति
मानव जीवन का सबसे गंभीर बंधन जन्म, बुढ़ापा और मृत्यु का चक्र है। इस काल-चक्र से मुक्ति केवल तत्वदर्शी संत द्वारा बताए गए सत्य भक्ति मार्ग और मर्यादा से ही संभव है।
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पाप नाशक परमात्मा कविर्देव
यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मंत्र 1 और ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 20 मंत्र 1 के प्रमाण बताते हैं कि संकटों का निवारण करने वाले, पापों का नाश करने वाले और जीवों के सच्चे रक्षक कविर्देव (कबीर परमेश्वर) हैं।
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सच्चा रक्षक कौन?
राखी बांधने से जीवन की हर विपत्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा संभव नहीं है। वास्तव में सबका एकमात्र और सच्चा रक्षक पूर्ण परमात्मा (कविर्देव/कबीर साहेब) है, जो तीनों लोकों का भरण-पोषण करता है।
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पवित्र वेदों में आयु वृद्धि का प्रमाण
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 के अनुसार, यदि साधक की आयु समाप्त भी हो चुकी हो, तो पूर्ण परमात्मा कबीर देव उसकी आयु को बढ़ा सकते हैं और अकाल मृत्यु से बचाते हैं।