मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं।
तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई?
हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई,
उनका मरना देखा ज़माने ने,
एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई।
कुछ पद से बड़े होते हैं कुछ कद से बड़े होते हैं
जो झुक के खड़े होते हैं, वो खाक खड़े होते हैं
@ShashiTharoor one of the Tallest leader in Indian Politics.
~ विजय ढिल्लों।
#SpeakUpForJobs पूरे देश के युवाओं को एक सन्देश है। सरकार के सामने एक बहुत बड़ा क्वेश्चन मार्क है, 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रति वर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था और दुर्भाग्य से लगातार आर्थिक स्��ोडाउन हुआ, कोरोना आ गया, अर्थव्यवस्था पूरी पटरी से उतर गई।
मोदी जी का ‘कैश-मुक्त’ भारत दरअसल ‘मज़दूर-किसान-छोटा व्यापारी’ मुक्त भारत है।
जो पाँसा 8 नवंबर 2016 को फेंका गया था, उसका एक भयानक नतीजा 31 अगस्त 2020 को सामने आया।
GDP में गिरावट के अलावा नोटबंदी ने देश की असंगठित अर्थव्यवस्था को कैसे तोड़ा ये जानने के लिए मेरा वीडियो देखिए।