#RightWayToMeditate
Meditation is just a way to get temporary satisfaction of mind, it is not helpfull to complete salvation. According to our holy scriptures chanting of true mantras are the way to get eternal place which is called satlok.
@SaintRampalJiM
#కబీర్ పర��ాత్మ_యొక్క_జీవిత_ప్రమాణం
పూర్ణ ప్రభువు యొక్క పెంపకం కన్య ఆవుపాలతో అవుతుంది. ప్రమాణం ఋగ్వేద మండలం 9 సుక్తం 96 మంత్రం.17.
God Kabir Prakat Diwas
बढ़ती टेक्नोलॉजी के माध्यम से आज हम कई सारे काम Automatic कर सकते हैं इससे समय, ऊर्जा और धन की बचत होती है वहीं दूसरी तरफ कई देशों ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहे नुकसान पर अपनी चिंता व्यक्त की है। देखिए क्या सचमुच टेक्नोलॉजी एक वरदान है इस खास पेशकश में
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SA News #EPaper में इस सप्ताह पढ़ेंः
●असम राज्य के विभिन्न जिलों में गुंजा संत रामपाल जी महाराज का सत्संग
●गोवा में हो रहा है तत्वज्ञान का प्रचार
●समाज को नई दिशा दे रहे हैं संत रामपाल जी महाराज
●मोक्ष प्राप्त करना मनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य है सन्त रामपाल जी महाराज
#AlKabir_Islamic#SaintRampalJi
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#PollOfTheDay श्रीमद्भगवद्गीता (#BhagavadGita) अध्याय 15 के श्लोक 1 में बताए गए संसार रूपी उल्टे लटके वृक्ष का वर्तमान में पूर्ण ज्ञानी संत कौन है?
A. देवकीनंदन
B. श्री श्री रविशंकर
C. जग्गी वासुदेव (सद्गुरु)
D. संत रामपाल जी महाराज
अपना उत्तर हमें कमेंट में बताएं... #ฟรีนเบค
#GodMorningTuesday
सच्ची लगन
इन्द्री कर्म ना लगै लगारं, जो भजन करें निरदुंद रे । गरीबदास जग कीर्ति होगी, जब लग सूरज चंद रे ||
जो भक्त किसी प्रकार का राग द्वेष न करके सच्ची लगन से भक्ति करता है, उसको पाप कर्म नहीं लगते।
उसकी सदा कीर्ति होगी ।
#सत_भक्ति_संदेश@anitada23854181
गरीब, सत भक्ति परम पुरूष की, जे कर जाने कोय।
सतनाम तारी लगै, दिल दर्पण को धोय।।
यदि कोई मोक्ष चाहता है तो सतपुरूष (परम दिव्य पुरूष) की स��्य भक्ति शास्त्रों में वर्णित करे। यदि जो कोई सत्य साधना का ज्ञान रखता है तो परम पुरूष की भक्ति करो। सत्य नाम के स्मरण में लगन लगाकर स्मरण करके दिल के दर्पण यानि अंतःकरण को साफ करे।
गरीब, संख कल्प जुग जीवना, तत्त न दरस्या रिंच।
आन उपासा करते हैं, ज्ञान ध्यान परपंच।।
सरलार्थ:- यदि कोई संख कल्प तक जीवित रहे। ज्ञान जरा-सा भी नहीं है। तत्त्वज्ञान हीन है। सत्य भक्ति से वंचित है तो वह लंबा जीवन भी व्यर्थ है।(एक कल्प में एक हजार आठ चतुर्युग होते हैं यानि ब्रह्मा का एक दिन)