एक व्यक्ति कैमरे में पकड़े जाने के बावजूद कुछ ही दिनों में ज़मानत पा जाता है।
वहीं दूसरा व्यक्ति बिना किसी ट्रायल या सुनवाई के छह साल तक जेल में पड़ा रहता है
: अभिजीत दीपके, CJP फाउंडर
वो गुंडा, वो दंगाई, वो लंपट……… लेफ्ट की नेहा बोरा एक सिटिंग CM के लिए ऐसी शब्दावली का उपयोग कर रही हैं! ना उम्र का लिहाज, पद की गरिमा। क्या विरोध करने के लिए शब्द कम हो गए हैं? यही है वामपंथ के संस्कार?
इनमें होड़ मची हुई है कि जो जितना अभद्र शब्दावली बोलेगा वो उतना बड़ा नेता।
ऐसे गालियों से सामने वाले का जनसमर्थन और मजबूत होता है। ये बेहूदगी है।
मुख्यमंत्री जी,
मैं आज 'आपके विकसित मध्य प्रदेश' के आदर्श जिले #बालाघाट जा रहा हूं! कोशिश करूंगा कि सच/सबूत/सरोकार से आपका साक्षात्कार करवा सकूं!
@DrMohanYadav51
सोचिए सिर्फ एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से एक सवाल क्या पूछ लिया,
उनको कितना प्रताड़ित किया जा रहा है,
देश आज अघोषित आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा है,
अब इस देश के युवा ही इस बदहाल स्थिति को सुधार सकते हैं।
Gen Alpha Protest Prayagraj: बच्चों ने लल्लनटॉप की टीम को पूरा हॉस्टल दिखाकर स्कूल प्रशासन की पोल खोल कर रख दी.
Full Report: https://t.co/nY9rFeAQ8U
Prayagraj | Gen Alpha Protest | Hostel
@RajatpandeyJF@editor_yogeshy
"हम स्कूल ठीक करना चाह रहे, लेकिन BJP के गुंडे हिंसा फैला रहे"
◆ CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा
◆ पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति का वीडियो बनाने के बाद कथित हमले में घायल हुए एक बुजुर्ग की मौत हो गई
◆ मृतक के बेटे अब्दुल हाफिज CJP के समर्थक हैं और पार्टी के स्कूल ठीक करो अभियान में शामिल थे
◆ परिवार का आरोप है कि स्कूल की खराब हालत का वीडियो बनाने से नाराज कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर हाफिज और उनके पिता पर जानलेवा हमला किया
#AshutoshRanka | Ashutosh Ranka | #Abdhul | #WestBengal | West Bengal
ओ अंकिल ज़्यादा ज्ञान मत दो। जवाबदेही लो और जवाब दो कि स्टूडेंट्स पर लाठी, गोली और आँसू गैस क्यों चलवाए ?
वैसे भी तड़ीपार के मुँह से अनुशासन, मर्यादा और परंपरा जैसी बातें अच्छी नहीं लगती।
"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..."
@news24tvchannel छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए।
अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है।
बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।