@Shubhamshuklamp अरे भाई भील-भिलाला-सहरिया, गोंड, संथाल, मुंडा, उरांव, कोरकू, बैगा, खासी, गारो, नागा, मिजो, टोडा, बोडो को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने के लिए भी आवाज बुलंद करो, वो तुम नहीं करोगे
राजस्थान सरकार टाइगर रिजर्व सेंचुरी के प्रोजेक्ट को जल्दी रद्द कर दे, अन्यथा धौलपुर की जनता टाइगर सेंचुरी प्रोजेक्ट की भोगड़ली बनाकर मुख्यमंत्री के पिछवाड़े में डाल देगी।
📍सरमथुरा धरना स्थल, धौलपुर
@pantlp फिर सरकार किस लिए है, फ़ोकट का रौब दिखाने के लिए और यह सब तुम जैसे दलाल पत्रकार का किया धरा है जो कभी सरकारों से सवाल नहीं करते केवल नागरिक को जिम्मेदार ठहराते हैं
कल सरमथुरा में एक नवयुवक ने जिस शानदार तरीके से करौली-धौलपुर टाइगर रिज़र्व प्रोजेक्ट को लेकर अपनी बात रखी, वह काबिल-ए-तारीफ़ है. जब तक हमारे पास ऐसे नवयुवक हैं, तब तक कोई भी सरकार तथाकथित विकास के नाम पर हमारे जल, जंगल, ज़मीन और जीवन को हमसे छीनकर हमें विस्थापित नहीं कर सकती है.
@PremaramSiyag6 भाई साहब इन्हें पहले के लोगों ने बढ़ावा दिया है क्यूँकि वो सवाल नहीं करते थे, इनके हर लिखे को सही मानते थे लेकिन आज की पीढ़ी बिना किसी ठोस सबूत के कुछ भी नहीं मानती है और ये उसी दुनिया में जी रहे हैं, ये भ्रम भी जल्दी टूट जाएगा
धौलपुर-करौली टाइगर प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में आज शिरकत की और आंदोलनकारियों के बीच अपनी बात रखी.! इस दौरान युवा साथियों और बुजुर्गों द्वारा दिए गए मान-सम्मान और अपनत्व के लिए तहेदिल से शुक्रिया.! इंक़लाब जिंदाबाद.! 🙏
लंबे समय से संविधान प्रदत्त हिस्सेदारी की व्यवस्था यानी आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
कान खोलकर सुन लो—आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह सदियों से सामाजिक भेदभाव और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
भारत सरकार व लखनऊ दरबार में बैठे सत्ताधीशों, कान खोलकर सुन लो—आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरक्षण पर हमला यानी सामाजिक न्याय पर हमला है और सामाजिक न्याय से समझौता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) किसी भी कीमत पर नहीं करेगी।
हम यह भी देख रहे हैं कि इस पूरे माहौल को बनाने में मीडिया की बड़ी भूमिका है। हमारे हितों के विपरीत विचार रखने वाले लोगों को बार-बार बुलाकर एकतरफा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन याद रखिए—हमारे सब्र का इतना इम्तिहान मत लीजिए। अगर हमारी आवाज को लगातार दबाने और नजरअंदाज करने की कोशिश की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
हम जानते हैं कि मेनस्ट्रीम मीडिया में हमारा पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी।
और आरक्षण का विरोध करने वालों को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) खुली बहस के लिए आमंत्रित करती है।
अगर आपके पास आरक्षण के खिलाफ तर्क और तथ्य हैं, तो सामने आइए। बहस हो—तर्क से, तथ्यों से और संविधान के दायरे में।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!