ब्रेकिंग इटावा
भाजपा के महेवा मंडल उपाध्यक्ष अवनीन्द्र कुमार दुबे ने दिया इस्तीफा
भाजपा के महेवा मंडल उपाध्यक्ष अवनीन्द्र कुमार दुबे ने पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने लेटर पैड पर इस्तीफे की जानकारी लिखकर इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
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भाजपा के महेवा मंडल उपाध्यक्ष अवनीन्द्र कुमार दुबे ने पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने लेटर पैड पर इस्तीफे की जानकारी लिखकर इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
@swatntra_anuj bhai asar dekho or tension mat lo reservation end goall hai baaki reform ke jariye inhe todna padega jab tak ye st,sc,obc rahenge ulta badhega https://t.co/qiaKybK3cc
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इससे बेहतर इस मुद्दे पर लिखा नहीं जा सकता।
@ajeetbharti जी और उनकी बहन को भद्दी गाली दी गई। उन्होंने पलट कर गाली देने वाले के मुँह पर वही मारा है जो उनके सामने लाया गया। तो केस किस बात का भाई? सारे ट्रोलर्स बुद्धि से कुंद हैं क्या? उनको पता नहीं कि आज dataset सब याद रखता है!
हिंदू बँट गया है। पूरा हिंदू समाज टुकड़ों-टुकड़ों में बाँट दिया गया है। और अब सवाल सिर्फ एक है इस बँटवारे का फ़ायदा किसे होने वाला है?
UGC का ये 2026 वाला इक्विटी रेगुलेशन लाया गया। नाम रखा गया “प्रोमोशन ऑफ इक्विटी”। लेकिन असल में क्या किया? जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ SC, ST और OBC तक सीमित कर दी। सवर्ण छात्र, सवर्ण प्रोफेसर, सवर्ण कर्मचारी इनको उस परिभाषा से बाहर कर दिया। यानी अगर किसी सवर्ण के साथ जाति के नाम पर भेदभाव हो, तो वो शिकायत भी नहीं कर सकता। दीवारों पर “सवर्णों का नरसंहार” लिख दिया जाए, नारे लगें, तो भी वो “कास्ट बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन” नहीं माना जाएगा। ये कैसा न्याय है?
सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, सरकार कह रही है “रीकंसider कर रहे हैं”, लेकिन नुकसान तो हो चुका। हिंदू समाज के अंदर फिर से वही पुरानी दीवारें खड़ी हो गईं। एक तरफ दलित-पिछड़े, दूसरी तरफ सवर्ण। एक तरफ “शोषित”, दूसरी तरफ “शोषक”। हिंदुत्व की बात करने वाले लोग भी चुप। संघ वाले भी “उगलते बन रहा न निगलते” वाली भाषा बोल रहे हैं। मतलब साफ है वोट बैंक बचाना है।
सोचो जरा। 10 प्रतिशत EWS आरक्षण दे दिया, तो क्या सवर्ण खुश हो गए? नहीं। क्योंकि असली समस्या आरक्षण की प्रतिशतता नहीं, असली समस्या ये मानसिकता है कि हिंदू समाज को जाति के नाम पर हमेशा बांटे रखना है। मुसहर का बच्चा आज भी भूखा है, लेकिन कुछ चुनिंदा जातियों के नेता आरक्षण का सारा मलाई खा रहे हैं। क्रीमी लेयर नहीं लगाएंगे। मेरिट की कोई गारंटी नहीं देंगे। और फिर कहेंगे “हिंदू एक हैं”।
फ़ायदा किसे हो रहा है?
- उन नेताओं को जो सिर्फ अपनी जाति का वोट बैंक पालते हैं।
- उन पार्टियों को जो जातिवाद वाला कार्ड खेलने के साथ-साथ हिंदू-हिंदू वाला कार्ड भी खेलती हैं।
- उन लोगों को जो सवर्ण युवक-युवती को “जातिवादी” साबित करके उनकी जगह हथियाना चाहते हैं।
और नुकसान किसे हो रहा है? पूरे हिंदू समाज को। क्योंकि जब घर के अंदर लड़ाई चल रही हो, तो बाहर का दुश्मन कितना भी कमजोर क्यों न हो, वो मजबूत हो जाता है।
मैं बार-बार कह रहीं हूँ व्हाइट पेपर लाओ। 70-80 साल के आरक्षण का हिसाब दो। कितने प्रतिशत लाभ सही जरूरतमंदों तक पहुँचा? कितने क्रीमी लेयर वाले बार-बार खा रहे हैं? मेरिट को क्यों कुचला जा रहा है? UGC वाले नियम में सवर्णों को भी सुरक्षा दो, नहीं तो ये नियम वापस लो।
हिंदू बँट गया है। ये बँटवारा कोई दुर्घटना नहीं है। ये योजनाबद्ध है। और जब तक हम सवर्ण, पिछड़े, दलित सब मिलकर ये नहीं कहेंगे कि “जाति से ऊपर हिंदू है”, तब तक ये खेल चलता रहेगा।
फ़ायदा किसी और को हो रहा है। नुकसान हम सबका हो रहा है।
ये समझो।
@Akhilesh180519 yahi toh hum chahte hai arakshan tabhi khatam hoga jab seat kam hogi isliye reform pe raho nahi yadav,kurmi,kushwaha obc me saari seat lega or roj reservation badhane bolega
अरबिंद राजभर सुहैल देव समाज पार्टी महासचिव ने कहा आरक्षण आर्थिक आधार पर हो हम इसके समर्थक है -
इसको कहते है कलेजा ना कि गला फाड़ के चिल्लाओ चिराग पासवान की तरह की जब तक हम जिंदा है कोई हाथ नहीं लगा सकता आरक्षण को ।
बहुत दिन ऐसे नहीं चल पाओगे चिराग जी आपके वक्तव्य के वजह से सवर्ण नेता जो आपकी पार्टी में है ओ शर्म करें।
ना ऐसी गलीच टिप्पणी सहनी चाहिए और ना ही graceful language की आड़ में शठ की शठता को शह देनी चाहिए!
एक limit cross होने तक दुर्गा ने भी महिषासुर का प्रलाप बर्दाश्त किया और उसके बाद जब मारने के पहले उसको संबोधित किया तो उन श्लोकों में फूल नहीं बरस रहे थे।
ये भाषायी शुचिता वाले भाषा की पवित्रता का निर्बाध ढोंग करें। as if इन दोहरे चरित्र वालों ने जीवन में कभी गाली दी ही नहीं है!
गाली का जवाब एक peer reviewed article नहीं होगा! जिसकी जैसी काबिलियत और औक़ात है उसी हिसाब से उसको समझाना चाहिए और समझाया जाएगा।
कुछ महानुभाव तो ऐसे behave कर रहे हैं जैसे किसी तीन साल के बच्चे के अगर पूछ लिया कि potty कैसे बनता है तो उसको भोजन के chyme बनने की प्रक्रिया तक समझा डालें!!
सब के सब कुंद हैं क्या यहाँ?