आपातकाल 1975 जनसंघ कार्यकर्ता भाजपा प्रथम अध्यक्ष विधानसभा गोगुंदा पूर्व अध्यक्ष कृषि उपज मंडी उदयपुर पूर्व सरपंच तीन बार पूर्व जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा
कांग्रेसी चम्मचों का नया ट्रेंड शुरू हुआ है, एक गधे को Re-Promoted के लिए और भिड़ जुटाने के लिए लोगों को जबरदस्ती 25000 रुपए देकर बुला रहे हैं 😂
फिर भी गधा मंच पर आ कर ढेंचू ढेंचू करके के चम्मचों के अरमानों पर पानी फेर दिया 🤲🏻
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भाजपा की कट्टर दुश्मन मानी जाने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) की नेत्री सुहासिनी अली ने राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बारे में ये क्या कह दिया।
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🇮🇳🚩केजरीवाल की सरकार, पंजाब का हाल बेहाल।
दिल्ली की गलियों में अब ठेकों की कतारें दिखती हैं,
और पंजाब के युवाओं की नसें सिर्फ चिट्ठे (ड्रग्स) से बिकती हैं।
एक सूबे की तरक्की को शराब के ठेकों में तौल दिया,
और दूसरे सूबे में ड्रग्स के सौदागरों के लिए रास्ता खोल दिया।
लंका के द्वार पर हनुमान जी और लंकिनी :
लंका उस समय रावण के वैभव, सामर्थ्य और अहंकार का प्रतीक थी। उसके मुख्य द्वार की रक्षा लंकिनी नामक राक्षसी करती थी, जिसे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त होने की मान्यता है। उसका विश्वास था कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी लंका में प्रवेश नहीं कर सकता।
जब रावण माता सीता का हरण करके उन्हें लंका ले गया, तब श्री राम ने उनकी खोज का दायित्व वानर सेना को सौंपा। दक्षिण दिशा में खोज करते हुए हनुमान जी को पता चला कि माता सीता लंका की अशोक वाटिका में हैं।
जांबवान ने हनुमान जी को उनकी दिव्य शक्तियों का स्मरण कराया। श्री राम का नाम लेकर हनुमान जी समुद्र पार कर लंका पहुँचे। नगर में गुप्त रूप से प्रवेश करने के लिए उन्होंने अपना रूप छोटा कर लिया लेकिन लंका के द्वार पर लंकिनी ने उनका मार्ग रोक लिया। हनुमान जी ने शांतिपूर्वक रास्ता माँगा, लेकिन जब वह नहीं मानी तो हनुमान जी ने एक प्रहार करके उसे भूमि पर गिरा दिया।
तभी लंकिनी को ब्रह्मा जी की भविष्यवाणी याद आई कि जिस दिन कोई वानर उसे पराजित करेगा, उसी दिन लंका के विनाश का समय निकट आ जाएगा। वह समझ गई कि हनुमान जी साधारण वानर नहीं, बल्कि श्री राम के दूत हैं।
लंकिनी ने हनुमान जी से क्षमा माँगी और उन्हें लंका में प्रवेश करने दिया। इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुँचे और माता सीता को श्री राम की मुद्रिका देकर उनका संदेश सुनाया।
इस प्रसंग से यह सीख मिलती है कि लंकिनी की हार केवल एक रक्षिका की पराजय नहीं थी, बल्कि रावण के अहंकार के साम्राज्य में धर्म के प्रवेश का संकेत थी।
हनुमान जी ने दिखाया कि जब हृदय में भक्ति, मन में विश्वास और उद्देश्य धर्म का हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय धर्म की ही होती है।
🙏 जय श्री राम 🙏
🙏 जय बजरंग बली 🙏