मैं इस प्रकार की बातें करता नहीं... लेकिन आज अखबार में देखा तो लगा कि 10 के सामने 10 है, 16 के सामने 16 है, 12 के सामने 12 है और 5 के सामने 5 लिखा है तो इस गणितीय हिसाब से 57 के सामने 21 क्यों है ?
अभी नही जागे तो ओबीसी खत्म है आगे से
@meelrajaram@TheUpenYadav
हमारे हकों की लड़ाई खुद को लड़नी होगी।
रोस्टर व OMR घोटाले के नाम से बेरोजगार युवाओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ विशाल धरना प्रदर्शन रखा ��या है जिसमें आप सभी उपस्थित होकर अपने हक की आवाज को मजबूत करें
📍 जिला कलेक्ट्रेट - बाड़मेर
#27_जनवरी_बाड़मेर_चलो #27_जनवरी_बाड़मेर_चलो
@alokrajRSSB ji
बोर्ड में पेपर बनाने वाले लोग है कौन.?
कहीं से किसी अनपढ़ को पकड़ लिया है क्या,
सिलेबस और पेपर का कोई लेना देना ही नहीं, फिर भी जो है उसे तो करना है, लेकिन ऐसे बहुत से प्रश्न है, जिनके ऑप्शन ही गलत दे रख��� है
प्रश्न पूछ आरोही का रहा है लेकिन नीचे ऑप्शन अवरोही के
चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा कट ऑफ
कहीं न कहीं जब इतने प्रश्न उठ रहे हैं, तो उनका उत्तर देने वाला भी कोई होना चाहिए।
120 प्रश्नों की परीक्षा में सामान्यतः कोई भी अभ्यर्थी लगभग 10 प्रश्न तो छोड़ ही देता है। शेष 110 प्रश्नों में से 10–12 प्रश्न गलत हो जाते हैं। 1/3 नकारात्मक अंकन के कारण 12 गलत प्रश्नों पर लगभग 4 अंकों की अतिरिक्त कटौती हो जाती है। ��स प्रकार कुल मिलाकर लगभग 96 प्रश्न ही शुद्ध रूप से शेष बचते हैं।
यह आकलन उन प्रतिभाशाली छात्रों के संदर्भ में है, जो शीर्ष दस हजार अभ्यर्थियों में स्थान बना सकते हैं। किंतु यहाँ भर्ती प्रक्रिया में लगभग दोगुनी संख्या में, अर्थात कम से कम एक लाख अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। ऐसे में जब चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट लगभग 87 प्रश्नों के आसपास बताई जा रही है, तो यह उच्च कट-ऑफ स्वाभाविक रूप से गंभीर संशय को जन्म देती है।
पूर्व में, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, तब डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जैसे सजग और सक्रिय विपक्षी नेता प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया की गहराई तक जाकर ठोस प्रमाणों के साथ संदेहों को उजागर करते थे और उन्हें जनहित का मुद्दा बनाते थे। उस समय सरकार भी दबाव में आकर जांच कराती थी, जिससे कई परतें खुलकर ��ामने आती थीं। आज का विपक्ष इतना कमजोर प्रतीत होता है कि उसने जनता को लगभग ईश्वर भरोसे छोड़ दिया है।
यदि छात्रों के बीच इतना गहरा असंतोष और संदेह व्याप्त है, तो संबंधित संस्था और सरकार का दायित्व बनता है कि वह पूर्ण पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखे।
यदि किसी के पास संदिग्ध चयन या अनियमितताओं से जुड़ी कोई ठोस जानकारी है, तो उसे अवश्य ही SOG तक पहुँचाया जाना चाहिए और इस विषय को मुखरता के साथ उठाया जाना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्र नेताओं, अनेक परीक्षार्थियों और संबंधित विषय के जानकारों के बीच इस उच्च कट-ऑफ को लेकर लगातार विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ चल रही हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना आवश्यक है।
मुझे समझ में नहीं आ रहा है.. चतुर्थ श्रेणी में हुआ किसका है...??
ना लाइब्रेरी से किसी का, ना आस पास से किसी का सुनने का आ रहा है... तो यह 54000 है कौन..?
Hello @alokrajRSSB#चतुर्थ_श्रेणी_परिणाम
मुझे समझ में नहीं आ रहा है.. चतुर्थ श्रेणी में हुआ किसका है...??
ना लाइब्रेरी से किसी का, ना आस पास से किसी का सुनने का आ रहा है... तो यह 54000 है कौन..?
Hello @alokrajRSSB#चतुर्थ_श्रेणी_परिणाम
@MohitBharatYBP अच्छा मतलब जाटों के सिवाय किसी के पास जमीन नही है सब सड़क पर बैठे है
अरे भाई हमारे बा��़मेर में सब जातियों के पास पर्याप्त जमीन है जो सक्षम है उनके खेत में कुएं भी है
और बात रही है पढ़ने की तो भाई, उनका पढ़ने का अनुपात तो 10% भी नहीं है, और जो पढ़ते है किस जाति में सारे नौकरी लगे
धोरीमन्ना व गुड़ामालानी को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा में मिलाने के नुकसान
1. बाड़मेर बॉर्डर जिला था
सीमावर्ती जिला होन�� से प्रशासनिक, सुरक्षा और विकास में special priority मिलती थी
जिला बदलते ही बॉर्डर एरिया का दर्जा खत्म
2 Border जिला का Extra Fund अब नहीं
सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल के लिए अलग बजट मिलता था
अब ये तहसीलें सामान्य जिले में चली गईं विकास पर सीधा असर
3 स्टूडेंट्स का भविष्य प्रभावित
बॉर्डर जिला होने पर मिलने वाला आरक्षण/छूट/स्कॉलरशिप समाप्त
Competitive exams और सरकारी योजनाओं में नुकसान
4 दूरी 60 KM से बढ़कर 150 KM
पहले बाड़मेर पास था, अब बालोतरा बहुत दूर
एक सरकारी काम के लिए पूरा दिन + ज्यादा खर्च
गरीब, किसान, बुज़ुर्ग सबसे ज्यादा परेशान
तहसील, कलेक्टर, कोर्ट, अस्पताल के लिए लंबा सफर
पैसा + समय + मानसिक तनाव
5 आपदा व सुरक्षा प्रबंधन कमजोर
बॉर्डर जिले में सूखा, बाढ़ और सुरक्षा के लिए अलग व्यवस्था होती थी
अब ये इलाके priority list से बाहर 6जनता से बिना पूछे फैसला
न सहमति, न संवाद
जनता की सुविधा नहीं, बल्कि तुगलकी फरमान
धोरिमन्ना व गुड़ामालानी उपखंड को लेकर राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ धोरिमन्ना में आमजन का शांतिपूर्ण धरना जारी है।
फैसले के बाद से क्षेत्रवासियों में गहरी चिंता देखी जा रही है और लगातार विरोध की आवाज़ उठ रही है। लोगों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक सीमाओं का मामला न���ीं, बल्कि आमजन की सुविधा, सुरक्षा और न्याय से जुड़ा गंभीर विषय है।
धरना स्थल पर हेमाराम चौधरी भी बैठे हुए हैं और जनभावनाओं के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं। राजस्व, प्रशासन, पुलिस व न्यायालय से जुड़े कार्यों के लिए दूर-दराज़ भेजे जाने को जनहित के विरुद्ध बताया जा रहा है।
राजस्थान सरकार द्वारा जनभावना के विरुद्ध बाड़मेर तथा बालोतरा जिलों में किए गए पुनर्सीमांकन के विरोध में धोरीमन्ना मुख्यालय पर आयोजित धरने में उपस्थित हुआ। जनविरोधी निर्णय के ख़िलाफ़ हर वर्ग आक्रोश में है। यह निर्णय व्यक्ति विशेष नहीं बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के लिए बेहद चिंता का विषय है।
यह प्रदर्शन राजनै��िक नहीं वरन् इस क्षेत्र के नागरिकों की हक़ अधिकार की लड़ाई का है। हम तमाम नागरिक राज���य सरकार से मांग करते हैं कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा क्षेत्रवासियों को न्याय प्रदान किया जाए। इस मौके पर हमारे मार्गदर्शक आदरणीय हेमाराम चौधरी जी, चौहटन से पूर्व विधायक पदमाराम जी मेघवाल व क्षेत्र के वरिष्ठजन उपस्थित रहे।