@_ISupportBapuji भाजपा ने हिंदुत्व के नाम पर समर्थन और सत्ता तो हासिल की, लेकिन उसके कई फैसले अलग तस्वीर दिखाते हैं। दिखाने के लिए चर्च के अवैध विदेशी फंडिंग पर सख्ती की जाती है, लेकिन चुनाव आते ही राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार रुख नरम कर दिया जाता है।
No. 294
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हिंदुत्व बेचकर कुर्सी ली
विदेशी फंडिंग पर रोक लगाकर BJP ने खुद को हिंदुत्व की पार्टी बताया।
लेकिन गोवा चुनाव से पहले Missionaries of Charity का FCRA लाइसेंस बहाल कर विदेशी फंडिंग की अनुमति दे दी गई ।
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@_ISupportBapuji BJPईसाई मिशनरियों के दबाव या राजनीतिक हितों के कारण काम कर रही है?आश्रमों पर कार्रवाई और पादरियों को सहयोग, साधकों को पीटा गया ,जिसका विरोध उस समय विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रहे श्री अशोक सिंघल जी किया था।उन्होंने नरेंद्र मोदी से मिलकर इसे सुनियोजित साजिश बताया था।
No. 293
क्या मिशनरियों के इशारे पर चल रही है सत्ता?
2009 में संत आसाराम बापूजी आश्रम पर कार्रवाई के बाद अशोक सिंघल जी ने कहा था कि बापू के कार्यों से चर्च को कठिनाई हो रही है और नरेंद्र मोदी मिशनरियों के इशारे पर काम कर रहे हैं।
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@_ISupportBapuji जिन्हें हम हिंदुवादी समझते रहे, वे सत्ता और स्वार्थ के अवसरवादी निकले।
पालघर साधु हत्याकांड में जो लोग विपक्ष में रहते हुए CBI जांच की मांग कर रहे थे, सत्ता में आते ही उसी मामले के आरोपित व्यक्ति को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।कथनी और करनी के इस अंतर ने बहुतों को निराश किया है।
No. 292
सत्ता बदली, पर काम ईसाई मिशनरियों के इशारे पर ही किया जा रहा है।
पालघर साधु हत्याकांड पर विपक्ष में रहते हुए CBI जाँच की माँग की गई थी। लेकिन सरकार बनने के बाद यह मुद्दा ही गायब हो गया।
आखिर संतों को न्याय कब मिलेगा?
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@_ISupportBapuji "नाम में 'जनता' और 'हिंदू हित' की बात, लेकिन जहाँ राजनीतिक लाभ दिखे वहाँ वही प्राथमिकता? यदि कंधमाल में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के बलिदान से जुड़े मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग उठ रही है, तो सरकार को बिना किसी दबाव के सच्चाई सामने लानी चाहिए।
No.291
क्या स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के बलिदान को दबाने की कोशिश हो रही है?
23 अगस्त 2008 के कंधमाल हत्याकांड की जाँच रिपोर्ट सरकारी रिकॉर्ड से गायब बताई जा रही है।अब इस मामले में ओडिशा हाईकोर्ट में CBI जाँच की माँग की गई है।
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@_ISupportBapuji हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगना आसान है, लेकिन उसके मूल मुद्दों पर खड़े रहना कठिन। अगर संतों, गौ-रक्षा और हिंदू समाज से जुड़े प्रश्नों पर चुप्पी साध ली जाए, तो लोग इसे वादों और कर्मों के बीच का अंतर मानेंगे। जनता सवाल पूछेगी और जवाब भी चाहेगी।
No.290
क्या 2014 के बाद स्वदेशी,धर्मांतरण और हिंदू हितों के मुद्दे पीछे छूट गए?
राजीव दीक्षित और आसाराम बापू स्वदेशी व घर-वापसी जैसे अभियानों के प्रमुख चेहरे थे।
क्या हिंदुत्व के नाम पर उठे कई बड़े मुद्दे समय के साथ पीछे छूट गए?
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@_ISupportBapuji 2008 से संत को विवादों में घेरने की कोशिशें शुरू हुईं, जो सफल नहीं हुईं। 2012 में दर्ज मामले के बाद वर्षों से वे जेल में हैं और आज तक जमानत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई प्रतिष्ठित वकीलों, संतों ने उनके पक्ष में सवाल उठाए हैं। न्याय में देरी भी गंभीर चिंता का विषय है।
No. 57
2008 में आसाराम बापू को झूठे बलात्कार आरोपों में फँसाने की सुनियोजित साजिश रची गई।
दुर्गा को ₹5 लाख का लालच दिया गया, मीडिया सवाल-जवाब पहले से तय थे।
लेकिन दुर्गा-विक्रम ने स्टिंग कर सबूत पुलिस को सौंप दिए, साज़िश नाकाम हुई।
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@Voice_Hinduism 29 नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू पादरी गिरफ्तार. लेकिन मीडिया खामोश!
अगर यही मामला किसी आश्रम से जुड़ा होता, तो 24×7 डिबेट, ब्रेकिंग न्यूज़ शुरू हो जाता। न्याय का पैमाना एक होना चाहिए, धर्म देखकर नहीं।मीडिया से सिर्फ एक सवाल—क्या पीड़ितों की अहमियत आरोपी का धर्म देखकर तय होती है?
जयपुर के ईसाई NGO "ग्रेस होम" से 29 नाबालिग मणिपुरी बच्चियां रेस्क्यू हुईं। मेडिकल में यौन शोषण और गंभीर बीमारियों की पुष्टि। आरोपी पादरी जैकब जॉन गिरफ्तार!
अगर यही किसी हिंदू आश्रम में होता तो मीडिया में तूफान आ जाता, फिर ये सन्नाटा क्यों? #VoiceOfHinduism#MediaHypocrisy
@Voice_Hinduism धर्म में उत्तराधिकार नहीं, पात्रता महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति शास्त्रों का ज्ञान रखता है और समाज का मार्गदर्शन करने योग्य है, तो उसके पिता कथावाचक हैं या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। योग्यता का सम्मान करें, पूर्वाग्रह का नहीं।
🚩 बेटा क्या बनेगा, ये फैसला परिवार करेगा या समाज? देवकीनंदन ठाकुर जी ने अपने पुत्र देवांश को कथा-वाचन के मार्ग पर आगे बढ़ाया है। इसमें गलत क्या है? पूरी बात पढ़ें👇 https://t.co/khUWeD3Xoa #JaiShriRam#Sanatan#DevkinandanThakur
@_ISupportBapuji मीडिया की कहानी कुछ और, कानूनी विश्लेषण कुछ और—ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है। निर्णय मीडिया नहीं, साक्ष्य और न्यायालय के आधार पर होना चाहिए। सत्य सामने आए और न्याय हो।
@_ISupportBapuji आशाराम बापूजी के मामले में मीडिया की प्रस्तुति और कुछ कानूनी विश्लेषणों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। जब अलग-अलग दृष्टिकोण इतने भिन्न हों, तो निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया का महत्व और बढ़ जाता है। यदि तथ्य और साक्ष्य उनके पक्ष में हैं, तो न्याय मिलना चाहिए !
आसाराम बापू मामले में मीडिया की खबरों और कानूनी विश्लेषण में बड़ा अंतर दिखाई देता है। 😳🧐
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता कीर्ति आहूजा के गहन कानूनी विश्लेषण और दृष्टिकोण ने कई ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जो गंभीरता से सोचने पर मजबूर करते हैं। 🤔
@_ISupportBapuji हिंदुत्व केवल भाषणों से नहीं, आचरण से सिद्ध होता है। एक ओर हिंदू संत और आश्रम कार्रवाई झेल रहे हैं, गो रक्षकों को दंड मील रहा हैं,दूसरी ओर जहाँ अनुमति नहीं होनी चाहिए, वहाँ भी शिल्पा शेट्टी के क्लब को अनुमति दी जाती है। यही दोहरा मापदंड लोगों के मन में सवाल खड़े करता है।