झारखंड के पारंपरिक हुनर को मुख्यमंत्री आजीविका संवर्धन योजना के माध्यम से नई पहचान और नया संबल मिल रहा है।
लोहार, कुम्हार, बुनकर, लाह, बांस, लकड़ी और डोकरा शिल्प से जुड़े कारीगरों को आर्थिक सहयोग के साथ प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, बेहतर कच्चा माल, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ग्रामीण विकास विभाग और जेएसएलपीएस की इस पहल से पारंपरिक कला को नया जीवन मिल रहा है। जो हुनर कभी सिमटता जा रहा था, वही आज आत्मनिर्भर आजीविका का मजबूत आधार बनकर झारखंड के गाँवों में नई उम्मीद जगा रहा है।
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झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री माननीय दीपिका सिंह पांडे के जन्म जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं बाबा बंशीधर से उत्तम स्वास्थ्य का कामना करते हैं @DipikaPS@HemantSorenJMM@MousamMandal9
दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर दोस्त बनकर मेरा साथ दिया। ❤️�बिना कहे मेरी हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश पूरी की और हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया।�आपका प्यार, भरोसा और साथ मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत है। Love you Papa! 👨👧✨
Happy father’s day papa 🧿❤️
दुर्ग छत्तीसगढ़)में प्रवासी मजदूर की दर्दनाक मौत,परिवार ने लगाई मदद की गुहार
गढ़वा जिले के पंचायत माझीगानवा,प्रखंड कांडी निवासी अंबिका रजवार पिता-देवकी रजवार)रोज़गार की तलाश में दुर्ग,छत्तीसगढ़ में मजदूरी करने गए थे।दुखद रूप से कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई
नेता प्रतिपक्ष के स्पष्ट आदेश के बाद भी ज़मीनी स्तर पर कोई कार्रवाई न होना इस व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। जब उच्च स्तर से निर्देश जारी हो चुके हैं, तब भी प्रशासनिक उदासीनता का यह हाल है कि पीड़ित व्यक्ति आज भी अपने हक के लिए दर-दर भटक रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से खुला मुंह मोड़ना है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सड़क चौड़ीकरण जैसे सरकारी कार्यों के लिए जमीन अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन उसका उचित मुआवजा आज तक नहीं दिया गया। यह सीधे-सीधे आम नागरिक के अधिकारों का हनन है। सरकार विकास के नाम पर जमीन तो ले लेती है, लेकिन जब भुगतान की बारी आती है तो फाइलें धूल खाती रह जाती हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह स्थिति और भी भयावह है। जिस जमीन के सहारे उसका जीवन चल रहा था, वही छिन गई और बदले में कुछ भी नहीं मिला। इससे न सिर्फ उसकी आजीविका प्रभावित हुई है, बल्कि उसके परिवार पर भी संकट गहरा गया है। यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।
अगर नेता प्रतिपक्ष के आदेश के बाद भी अधिकारी निष्क्रिय बैठे हैं, तो यह सवाल उठता है कि आखिर जवाबदेही किसकी है? क्या आदेश सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं? क्या आम जनता की समस्या सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा बनकर रह गई है? यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और पीड़ित को उसका हक तुरंत मिले। वरना ऐसे मामलों से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अगर आदेशों का भी कोई असर नहीं होता, तो फिर आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?
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दुर्ग छत्तीसगढ़)में प्रवासी मजदूर की दर्दनाक मौत,परिवार ने लगाई मदद की गुहार
गढ़वा जिले के पंचायत माझीगानवा,प्रखंड कांडी निवासी अंबिका रजवार पिता-देवकी रजवार)रोज़गार की तलाश में दुर्ग,छत्तीसगढ़ में मजदूरी करने गए थे।दुखद रूप से कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई
एक गरीब मजदूर अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर गया था, लेकिन अब उसका परिवार अंतिम संस्कार तक के लिए सहायता की प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे समय में प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ही पीड़ित परिवार को राहत दे सकती है।