"नहीं, sir plz सर, रजत के बिना मैं अधूरा हूँ। रजत आइये "
इरफ़ान के ये शब्द कृतज्ञता, संवेदनशीलता और रिश्तों की गरिमा का प्रमाण था। इरफ़ान के ये शब्द रजत के माध्यम से पत्रकारिता के हर उस माध्यम का ऋणी भी महसूस कराते हैँ जो इरफ़ान जैसे संघर्षशील चेहरे को पहचानकर , उसे सुनकर और फिर देश के सामने रखते हैँ l
आवाज़ चाहे कितनी भी दमदार क्यों न हो, उसे दूर तक पहुँचाने के लिए एक सच्चे माध्यम की आवश्यकता होती है। इरफान की आवाज़ और रजत की पत्रकारिता दोनों ने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है ।
नोट :- यह दृश्य तब का है जब राहुल गांधी इरफान से मिलने उनके घर पहुँचे, तब एक दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला। जिस पत्रकार रजत पांडे ने अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से इरफान की आवाज़ को पूरे देश तक पहुँचाया, उन्हें ही प्रोटोकॉल के चलते इरफ़ान के घर के भीतर जाने से रोका जा रहा था।
21 मिनिटांचा हा व्हिडिओ वेळ काढून नक्की बघा.
इरफान फक्त अंगणवाडीपर्यंत शिकला. त्यानंतरचं त्याचं विद्यापीठ म्हणजे Google, YouTube आणि स्वतःची जिज्ञासा.
त्याच्या बोलण्यातला अभ्यास, समाज-राजकारणाची समज, भाषेवरची पकड आणि कष्टकरी माणसांविषयीची संवेदनशीलता पाहिली की एक गोष्ट स्पष्ट होते—प्रतिभेला महागड्या पदवीची गरज नसते; संधीची गरज असते.
आणि लल्लनटॉपचा पत्रकार रजत पांडे… त्याने घेतलेली ही मुलाखत म्हणजे केवळ प्रश्नोत्तर नाही, तर एका दुर्लक्षित भारताला आवाज देण्याचा प्रयत्न आहे.
देशाच्या झोपडपट्ट्यांमध्ये, छोट्या गावांत आणि दुर्लक्षित वस्त्यांमध्ये असे कितीतरी इरफान आजही आहेत. प्रश्न त्यांच्या क्षमतेचा नाही, तर त्यांना व्यासपीठ मिळतं का याचा आहे.
दिल्ली पुलिस, मोदी-शाह की हुकूमत तो सुने ही, आम युवाओं! ये भाषण आपको ज़रूर सुनना चाहिए. इस आंदोलन में 23 दिन तक अनशन पर बैठी @neha_aisa का ये भाषण इस मोड़ पर बहुत ज़रूरी हस्तक्षेप है.
इलाहाबाद के छात्रों का अल्टीमेटम 🔥
अगर 24 तारीख तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो फिर 25 तारीख से अनिश्चितकालीन धरना चालू होगा।
इलाहाबाद जिंदा शहर है जो जुल्म,ज्यादती,अत्याचार,भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा सीना ताने खड़ा रहता है।
इलाहाबाद जिंदाबाद ✊
जवानी जिंदाबाद...
जंतर मंतर पर सबसे चर्चित भाषणों में से एक।
23 दिनों तक भूख हड़ताल पर रही आइसा नेता नेहा ने कहा कि मार्च के दौरान हम शांति से बैठे थे क्यों भूख हड़ताल के बाद चलने लायक स्थिति नहीं थी तो पुलिस ने उनकी तरफ आंसू गैस का गोला मारा। "छात्रों के शरीर पर पड़े निशान बताएंगे कि 'आतंक' क्या होता है... संसद तक अपनी मांगें लेकर पहुंचे तो हमारे सिर फोड़ दिए गए, इसे याद रखा जाएगा।"
आंदोलन के बीच उनका यह भाषण प्रदर्शनकारियों में जोश भरता नजर आया। #JantarMantar https://t.co/fGfGncU5WX
"यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।"
सर अहंकार त्याग दो,
अब हर कोई तो राष्ट्रद्रोही नहीं होगा न, हर कोई तो गुंडा नहीं होगा न,
जो खाना भेज रहे हैं, सभी तो विपक्षी नहीं होंगे न।
आपको जनता की आवाज सुननी चाहिए।