अन्नदाता सड़कों-मैदानों में धरना दे रहे हैं,
और
‘झूठ’ टीवी पर भाषण!
किसान की मेहनत का हम सब पर क़र्ज़ है।
ये क़र्ज़ उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियाँ मारकर और आंसू गैस चलाकर।
जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।
अंधेरा वहां नहीं है, जहां तन गरीब है!
अंधेरा वहां है, जहां मन गरीब है..!!
ना बुरा होगा, ना बढ़िया होगा!
होगा वैसा, जैसा नजरिया होगा..!!
हजार महफिलें हों, लाख मेले हों!
पर जब तक खुद से न मिलो, अकेले हो..!!
अंधेरा वहां नहीं है, जहां तन गरीब है!
अंधेरा वहां है, जहां मन गरीब है..!!
ना बुरा होगा, ना बढ़िया होगा!
होगा वैसा, जैसा नजरिया होगा..!!
हजार महफिलें हों, लाख मेले हों!
पर जब तक खुद से न मिलो, अकेले हो..!!