श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और जोहार।
महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की कृपा आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे। यह पावन रथ यात्रा हम सभी को सेवा, समरसता, आस्था और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहे, यही कामना करता हूं।
जय जगन्नाथ!
इतिहास में ऐसा कब हुआ जब एक ही शासन में भारत के सारे बड़े मंदिर लूटे गए?
अयोध्या राम मंदिर में चोरी
माता वैष्णो देवी मंदिर में चोरी
बद्रीनाथ मंदिर में चोरी
केदारनाथ मंदिर में चोरी
गुजरात के अंबाजी मंदिर में चोरी
केरल के सबरीमाला मंदिर में चोरी
तिरुपति मंदिर में प्रसाद में मिलावटखोरी
हमारे मंदिरों को कौन लूट रहा है? हिंदुओं की रक्षा का दावा करने वाली सरकार में इतने मंदिर क्यों लूटे जा रहे हैं? जो बिना बात के, बिना किसी मुद्दे के, मुर्दों को कोसने के लिए घंटों भाषण देते हैं, वे इन लूट पर मौन क्यों हैं? अयोध्या में किसी जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या हिंदू जनता अपने धर्म, अपनी आस्था और अपने मंदिरों की लूट को अपनी नियति मान चुकी है?
@narendramodi@AkashvaniAIR आत्मनिर्भरता की बात अच्छी है, लेकिन किसान पूछ रहे हैं—उन्हें उनकी फसल का MSP की कानूनी गारंटी, समय पर भुगतान और लागत का उचित दाम कब मिलेगा? 🙏
"सोनम वांगचुक या जो भी उसका नाम है, वह आम आदमी पार्टी का हिस्सा है।
ये लोग राष्ट्रीय विकास के लिए बाधा हैं और जनता इन्हें फिर से सबक सिखाएगी।"
- मनोज तिवारी जी
"बगावत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें,
तबीयत इस अदा से और बिगड़ेगी वो क्या जानें!
वो क्या जानें कि अपना किस कयामत का इरादा है,
किसी पत्थर की मूरत से बगावत का इरादा है।"
लोकतंत्र केवल मतदान से नहीं, बल्कि मतदाता के जागरूक होने से मजबूत होता है।
आज मैंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत अपना एन्यूमरेशन प्रपत्र (Enumeration Form) भरकर जमा किया।
आप सभी पात्र मतदाताओं से आग्रह है कि निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना फॉर्म अवश्य भरें और लोकतंत्र को सशक्त बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
जागरूक मतदाता, सशक्त लोकतंत्र।
आज पथ निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य की सभी सड़क, पुल, पुलिया, फ्लाईओवर एवं अन्य निर्माण परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने का काम करें। वर्षों से लंबित परियोजनाओं में अनावश्यक देरी और लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।
सभी निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं का अद्यतन डेटाबेस तैयार करने तथा उनकी जियो-टैगिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए ताकि प्रत्येक परियोजना की प्रगति, लागत, गुणवत्ता और समय-सीमा की प्रभावी निगरानी हो सके। पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित मॉनिटरिंग हमारी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा होगी।
साथ ही सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सड़क, गड्ढों, जलजमाव और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का काम करे विभाग। बारिश को देखते हुए गड्ढों की मरम्मत, बेहतर जल निकासी, सड़कों की गुणवत्ता में सुधार तथा संकीर्ण मार्गों के चौड़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी काम करें।
राजधानी रांची सहित राज्य की प्रमुख लंबित सड़क एवं फ्लाईओवर परियोजनाओं में तेजी लाने तथा महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अगले दो माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
ढाई साल के जुड़वा बच्चों को सीने से लगाकर हर दिन हिम्मत जुटा रही पातो देवी,महज 22 साल की उम्र, आंखों में सपनों की जगह अब जिम्मेदारियों का पहाड़ और गोद में ढाई साल के जुड़वा मासूम।
देवघर।
देवघर जिले के सारठ प्रखंड की पातो देवी की जिंदगी ने ऐसा दर्दनाक मोड़ लिया है, जिसने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
8 अप्रैल 2026 को उनके पति चरकू मांझी का असामयिक निधन हो गया। उनके जाने के साथ ही घर का सहारा भी छिन गया। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मौत ने पूरे परिवार को गहरे आर्थिक और भावनात्मक संकट में डाल दिया।
पातो देवी की गोद में ढाई साल के जुड़वा मासूम बच्चे हैं। जिन नन्हें हाथों को अभी पिता का स्नेह और सहारा मिलना चाहिए था, वे अब अपनी मां की उंगली थामे जीवन की कठिन राह पर बढ़ने को मजबूर हैं। मां की आंखों में पति को खोने का दर्द है, तो दिल में बच्चों के भविष्य की चिंता।
परिवार के सामने रोजमर्रा का खर्च, बच्चों का पालन-पोषण और आने वाले कल की अनिश्चितता बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। लेकिन वह अपने बच्चों के लिए हर कठिनाई का सामना करने का साहस जुटा रही हैं।सरकार की सहायता की जरूरत है, ताकि इन मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
@HemantSorenJMM
एक ऐसा देश जहां नदियों को 'मां' मानकर पूजा जाता है, उसी देश में एक आईआईटी प्रोफेसर और वैज्ञानिक को गंगा बचाने के लिए 111 दिनों तक भूख हड़ताल करनी पड़ी... और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
हम बात कर रहे हैं प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल (स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद) की।
कौन थे? IIT कानपुर में सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के पूर्व हेड और CPCB के पहले मेंबर सेक्रेटरी।
मांग क्या थी? गंगा को बचाने के लिए 'गंगा महासभा एक्ट' पास किया जाए, अनियंत्रित माइनिंग और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर रोक लगे।
क्या हुआ? उन्होंने सरकार को तीन भावुक चिट्ठियां लिखीं, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं आया। मुख्यधारा की मीडिया ने इस 111 दिन लंबे अनशन को लगभग अनदेखा कर दिया। 11 अक्टूबर 2018 को ऋषिकेश में एम्स में उनका निधन हो गया।