आरक्षण फिल्म का यह दृश्य आज उन लोगों को जरूर देखना चाहिए, जो आरक्षण हटाओ आंदोलन चला रहे हैं। आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सदियों के सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ प्रतिनिधित्व और अवसर सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। इतिहास को समझे बिना आरक्षण का विरोध करना सामाजिक न्याय की वास्तविकता से आंखें मूंदना है।
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
देश का छात्र कह रहा है - “हमारा कोई भविष्य नहीं।”
और इस सरकार के मंत्री कह रहे हैं - “हमारी कुर्सी नहीं जाएगी।”
जिस देश में छात्र भविष्य खो दे और मंत्री कुर्सी न खोए - वहां न्याय है ही नहीं।
@kamal_kanawaria लाइब्रेरियन भर्ती ग्रेड-3 फर्जी डिग्री वालों की गहन जांच हो एवं फाइनल रिज़ल्ट जांच कंप्लीट होने के बाद ही जारी हो... फर्जी बचे नहीं और ईमानदार फंसे नहीं... हम तो ये ही मांग की उम्मीद करते हैं सर...💐💐💐