प्रिय प्रधानमंत्री @narendramodi जी
आपके पास उज्जैन में तो संपर्क सूत्रों की किंचित ही कोई कमी हो, तो आप इस रिपोर्ट पर मत जाइए और अपने सूत्रों से तो अवश्य पता करिए ही के उज्जैन में क्या चल रहा है।
हम mp के लोगों ने आपको 29 की 29 सीट जमीन माफियाओं को राज कराने के लिए नहीं दी है
प्रिय @SuryodayBank
हम विगत 6 महीनों से आपके स्थानीय कर्मचारी से संपर्क कर रहे हैं परन्तु वह आपकी साख पर बट्टा लगा रहे हैं, और बार बार निवेदन के बाद भी नहीं आ रहे हैं।
कृपया संज्ञान लें 🙏
भोजशाल में वाग्देवी!
मृत्युंजय भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा, विरासत स्थलों और सभ्यतागत स्मृतियों के सम्मान से ही सशक्त होता है.
संविधान और न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए, भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में अपनी सांस्कृतिक चेतना को और अधिक जागृत करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है.
इतिहास और उसके साक्ष्य को झुठलाया नहीं जा सकता, महत्वपूर्ण है कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास रखते हुए संयम और सौहार्द बनाए रखना.
#Bhojshala
बीफ की दुकानों पर नग्न टँगी थी #हिन्दू#महिलाएँ, रेप के बाद छात्राओं को खिड़की से लटकाया: जिसने देखा ‘डायरेक्ट एक्शन डे’, उस बुजुर्ग से ही सुनिए बर्बरता...
भारत के विभाजन के लिए मुस्लिम नेताओं ने 16 अगस्त, 1946 को ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ का ऐलान किया था, जब मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर जम कर कहर बरपाया। बंगाल में इसका खासा असर देखने को मिला, जहाँ कई इलाकों में दंगे हुए। नोआखली के दंगे उनमें सबसे ज्यादा कुख्यात हैं। वहाँ तो कई महीनों तक दंगा चलता ही रहा था। महात्मा गाँधी को इलाके में कैंप करना पड़ा था। उस दौरान हुए इन्हीं दंगों को लेकर एक वयोवृद्ध व्यक्ति ने अपने अनुभव साझा किए हैं।
पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ में ज़िंदा बच गए रबीन्द्रनाथ दत्ता ने अपनी आँखों के सामने मुस्लिम भीड़ की क्रूरता को देखा था। उनकी उम्र 92 साल है। इस हिसाब से उस समय वो युवावस्था में थे और उनकी उम्र 24 साल के आसपास रही होगी। उन्होंने बताया है कि कैसे राजा बाजार के बीफ की दुकानों पर हिन्दू महिलाओं की नग्न लाशें हुक से लटका कर रखी गई थीं।
उन्होंने बताया कि विक्टोरिया कॉलेज में पढ़ने वाली कई हिन्दू छात्राओं का बलात्कार किया गया, उनकी हत्याएँ हुईं और उनकी लाशों को हॉस्टल की खिड़कियों से लटका दिया गया। रबीन्द्रनाथ दत्ता ने अपनी आँखों से हिन्दुओं की क्षत-विक्षत लाशें देखी हैं। जमीन पर खून की धार थी, जो उनके पाँव के नीचे से भी बह कर जा रही थी। इनमें से कई महिलाएँ भी थीं, जिनकी लाशों से उनके स्तन गायब थे। उनके प्राइवेट पार्ट्स पर काले रंग के निशान थे
ये क्रूरता की चरम सीमा थी। रबीन्द्रनाथ दत्ता ने अपने देखे अनुभवों को दुनिया को बताने के लिए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’, नोआखली नरसंहार और 1971 नरसंहार पर दर्जन भर किताबें लिखीं। उनकी पत्नी का निधन होने के बाद उनके गहने बेच कर उन्होंने इसके लिए खर्च जुटाया। उनकी आँखों-देखी के साथ-साथ उनका गहन अध्ययन और रिसर्च भी इसमें शामिल था। उनका कहना है कि बंगाल के किसी नेता, फ़िल्मी हस्ती या फिर मीडिया को इससे कोई मतलब नहीं है।
डायरेक्ट एक्शन डे के दिन शुरू हुए दंगे चार दिनों तक चले और उसमें करीब दस हज़ार लोग मारे गए। महिलाएँ बलात्कार का शिकार हुईं और जबरन लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया गया। इन दंगों में हिन्दुओं की ओर से गोपाल चंद्र मुख़र्जी, जिन्हें गोपाल पाठा के नाम से भी जाना जाता है, की भूमिका की कहानी बहुत प्रसिद्ध है। गोपाल मुख़र्जी ने एक वाहिनी का गठन किया था जिसने इन दंगों के दौरान हिन्दुओं की रक्षा की और वाहिनी इस तरह से लड़ी कि ‘मुस्लिम लीग’ के नेताओं को गोपाल मुख़र्जी से खून-खराबा रोकने के लिए अनुरोध करना पड़ा।
साभार ऑपइंडिया
प्रिय मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी
जितनी गति से आपने गेहूं खरीदी की तिथि बढ़ाई है, उतनी ही गति से सहकारी समिति में ऋण भरने की तिथि भी बढ़ा देते तो किसानों का भला हो जाता।
@IndiaPostOffice
आपकी सेवाएं बहुत ही चिंताजनक हो रही है, आदरणीय @JM_Scindia जी के प्रभार संभालने के बाद आपसे बहुत आशाएं थीं पर आप उस पर खरा नहीं उतर रहे हैं 🙏
10 दिन के पश्चात भी मेरा पार्सल नंबर CG196234311IN मुझे नहीं मिला है, जबकि यह मुझे 9 मार्च को ही डिलीवर्ड दिखा रहा है
@KiaInd
मुझे बताते हुए बड़ा खेद है कि आपकी सेवाएं निम्नतम स्तर को भी पार कर चुकी है, में मेरी Kia Sonet लेकर तीन बार रतलाम MP स्थित शोरूम पर गया, आज चौथी बार में भी दिन के 12 बजे से लेकर अभी पौने सात बजे तक मेरी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है।
आप अपना भरोसा खो रहे हैं 🙏