@msisodia बहुत जंतर लगाया, मंतर भी मारे
उकसाये माँ बाप के मासूम दुलारे
हर पालतू था जहरीला काल सा
कुटिल मन में थी सत्ता की लालसा
उन्मत्त अराजक असभ्य नंगों से घिरे
उकसाये माँ बाप के मासूम दुलारे
भलाई का आडंबर
उम्र भीड़ अश्लील मंजर
जनता थी मन को मारे
उकसाये माँ बाप के मासूम दुलारे
@md_deepesh Regime change
Coups by Violent/rioting mob & foreign intervention
CRIME
Section 152 BNS–Subversive Activities & Endangering Sovereignty
Section 147 BNS–High Treason/Waging War Against India
Section 113 BNS–Terrorist Acts
Traitors' Punishment
Death penalty or life imprisonment
@landpalestine Why isn't it happened in USA??
USA governance is always questionable about there interference in internal matters of many countries!
They have many issues about jobs & economy falls
Country and world raising voice about Epstein files evidences!
Why not chaotic protest in USA?
@AmitLeliSlayer साजिश!
-देशी विदेशी एनजीओ इत्यादी द्वारा पाए फंड से प्रोटेस्ट,देश में अराजकता अशांति
-अभद्र गालीबाज भीड़ द्वारा पीएम,आर्मी,हिंदु आस्थाओं को अश्लील गाली गलौज
-देश के संस्थाओं को गाली और बिना किसी सबूत के उनकी बदनामी
-उग्र उन्मादी दंगाई भीड़ से रक्तपात कराकर तख्तापलट
यही ना?😏
@md_deepesh Regime change
Coups by Violent/rioting mob & foreign intervention
CRIME
Section 152 BNS–Subversive Activities & Endangering Sovereignty
Section 147 BNS–High Treason/Waging War Against India
Section 113 BNS–Terrorist Acts
Traitors' Punishment
Death penalty or life imprisonment
@rautsanjay61@narendramodi देख लिया 3 मेंबर की पार्टी वाले मेंबर जी
पाकिस्तानी, बांगलादेशी, खलिस्तानी.. सोरोस के मेंबर द्वारा अरेंज किया तमाशा देख लिया जी...
पूरी दुनिया भी देख रही है जी की कैसे भारत के कुछ ग़द्दार देशद्रोही डीप स्टेट के गुलाम बने हुए हैं जी..
देशवासियों से गोबर में भिगोया जुता खाओ जी!
@prakashraaj Which Nation?
USA (Soros and Elon Musk)
Pakistan (ISI and other extremist group)
Bangladesh (Regime change groups)
China, Turkey??
Tell us Bhaaaand!!! 😏
🔥 इतिहास के पन्ने पलटिए
सवालों की कड़ियाँ जोड़िए
कहीं संयोग हैं, कहीं गंभीर आरोप!
लेकिन सच क्या है? जवाब तो देना पड़ेगा! 🇮🇳
📌 1991: राजीव गांधी की हत्या के बाद लोकसभा चुनाव स्थगित हुए। कांग्रेस को सहानुभूति का लाभ मिलने की चर्चा हुई और पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में सरकार बनी।
📌 राजीव गांधी फाउंडेशन: सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले इस संस्थान की गतिविधियों और विदेशी संस्थाओं से कथित संबंधों को लेकर समय-समय पर सवाल उठे। सवाल उठाना गलत नहीं, लेकिन जवाब तथ्यों के साथ मिलना चाहिए।
📌 कंधार कांड, 1999: IC-814 के अपहरण के बाद तीन आतंकवादियों की रिहाई हुई। उनमें मसूद अजहर भी था, जिसने बाद में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। आज भी यह घटना भारत की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद से निपटने की चुनौतियों की याद दिलाती है।
📌 संसद पर हमला, 2001: देश के लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकवादी हमला हुआ। ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर तथ्य की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए।
📌 UPA सरकार और POTA: आतंकवाद विरोधी कानून को समाप्त करने के फैसले पर बहस हुई। सवाल यह है कि उस समय सरकार की सुरक्षा नीति कितनी प्रभावी थी और उसके पक्ष-विपक्ष में क्या तर्क थे?
📌 विदेशी फंडिंग और NGO: यदि किसी संगठन को विदेशी धन मिलता है, तो उसके स्रोत, खर्च और गतिविधियों की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। देश की एकता और अखंडता से जुड़े मामलों में किसी को भी सवालों से ऊपर नहीं होना चाहिए।
📌 आज की राजनीति: जब अलगाववाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर विवाद उठते हैं, तो सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। लेकिन किसी व्यक्ति या संगठन पर गंभीर आरोप लगाने के लिए प्रमाण भी उतने ही जरूरी हैं।
🔥 और अब ज़रा व्यंग्य समझिए!
आम आदमी अपने बैंक खाते में आए छोटे-से लेन-देन का हिसाब देने में परेशान हो जाता है, लेकिन राजनीति की दुनिया में बड़े-बड़े आरोप वर्षों तक बहस का विषय बने रहते हैं!
जनता पूछती है—फंडिंग कहाँ से आई? किस उद्देश्य से आई? किस काम में खर्च हुई? और यदि कोई गड़बड़ी नहीं है, तो पारदर्शी जवाब देने में परेशानी कैसी?
लोकतंत्र कोई निजी कंपनी नहीं, देश की जनता की अमानत है! यहाँ सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, NGO हो या राजनीतिक संगठन—सवाल सब से पूछे जाने चाहिए और जवाब तथ्यों के साथ मिलने चाहिए।
याद रखिए, हर संयोग साजिश नहीं होता और हर आरोप सच नहीं होता। लेकिन गंभीर सवालों को केवल राजनीतिक विरोध कहकर खारिज कर देना भी जवाबदेही नहीं है।
🇮🇳 न अंधसमर्थन, न अंधविरोध—सच सामने आए, प्रमाण सामने आएँ और देशहित सर्वोपरि रहे!
इस पोस्ट को साझा कीजिए, ताकि राजनीतिक बहस अफवाहों पर नहीं, तथ्यों और जवाबदेही पर हो।
जय हिंद! भारत माता की जय! 🚩
@NewsAlgebraIND साजिश..😏
याने वो जो अमेरिका के बोस्टन से शुरू होकर भारत आई... जिसमें पूरी टूलकीट फिक्स थी
साजिश..
जिसमें विदेशी फंड, भारत विरोधी ताकतें शामिल हों
साजिश..
जिसमें झूठ फरेब हो, जिसमें कभी छात्रों की चिंता का ढोंग तो कभी स्कूल ठीक करने का ढोंग, लेकिन छिपा हुआ कोइ सूत्रधार हो
@NayakRagini@RahulGandhi फ्रांस इटली बांगलादेश नेपाल के अराजकता को आदर्श मानने वाले संविधान के रखवाले!
संविधान के किस पन्ने में लिखा है कि जनता द्वारा चुनी लोकतांत्रिक सरकार को फॉरेन से मिले करोड़ों के फंड के भरोसे अराजक उन्मादी भीड़ को इकट्ठा कर सरकार का तख्तापलट करने का इरादा रखना संवैधानिक तरीका है!
“All these fake protestors at Dhruv Rathee protest in London are from neighboring countries. These people are lured here for a Chai and Samosa.” Exposes an Indian
living in London
फ्रांस में टाउन हॉल जल रहा है, इटली में रेलवे स्टेशन और भारत में प्रधानमंत्री आवास को जलाने की भरसक कोशिश चल रही है।
फ्रांस की वो महिला जो अपनी दुकान के सामने गिड़गिड़ा रही थी - "प्लीज मत तोड़ो, ये मेरी है" - और लुटेरे उसका मजाक उड़ा कर अंदर घुस गए, स्टेट से पहले वो महिला ही टारगेट है। वामपंथ को कभी जॉर्ज सोरोस जैसे पूंजीपति से दिक्कत नहीं थी, उसे हमेशा उसी लड़की से दिक्कत रही है जो खुद कमा कर खड़ी हुई है। क्योंकि वो लड़की सबूत है कि बिना सरकार के भी जिया जा सकता है, बिना नारे के रोजगार चल सकता है। यह चीज बेरोजगार, निकम्मी भीड़ को नहीं पसंद आती। वामपंथियों को काम करते, सुखी लोग देखकर बेचैनी होने लगती है।
भारत में जब कनॉट प्लेस, पालिका बाजार के व्यापारी, ऑटो वालों के पेट पर लात मारी जा रही थी तो वामपंथ के उस विचार से घृणा बढ़ गई जिसमें वह मजदूरों के कल्याण की बात का पाखण्ड करता है। फ्रांस में जलाई गई दुकान, इटली में लूटी गये शो रूम भारत में दुकानदारों को दुकानें न चलने देना यह साबित करता है कि मार्क्सवाद लेनिनवाद के नाम पर केवल और केवल उपद्रव, आगजनी, नकारात्मकता और अशांति फैलाकर रेजीम चेंज करना है और कुछ नहीं।
आओ खुद सोचिए, कल को रेजीम चेंज के नाम पर सड़क बंद होगी, फिर उसी सड़क पर तुम्हारी बाइक जलेगी, तुम्हारी दुकान लूटी जाएगी, और शाम को टीवी पर कर प्रोफेसर बताएगा कि ये तो जनता का आक्रोश है।
फ्रांस ने कल अपना टाउन हॉल खोया है। इटली ने अपना स्टेशन। हम अगर अभी भी इसे फ्रांस-इटली की खबर समझ कर छोड़ देंगे, तो कल लाल किला जलते हुए देखेंगे साथ ही उस फ्रांसीसी दुकानदार महिला की तरह रोटी रोजगार की दुकानों को लुटते हुए भी देखेंगे।