बिहार में एक 15 वर्षीय लड़के ने पुलिस से कहा मइया को गाली देबा तू, काहे गाली देबा, माई बाप को गाली दिया तो काट के फेंक देब।
किसी मामले की पूछताछ में शादी समारोह के दौरान पुलिस घर पहुंची, पूछताछ के दौरान एक महिला पर पुलिस कर्मियों ने अभद्र भाषा का उपयोग किया, इतने में उस महिला का 15 वर्षीय बेटा खड़ा हुआ और गमछा फेंकते हुए कहा।
मेरी मइया को गाली देबा माई बाप को गाली दिया तो यहीं पर फाड़ दूंगा। अब यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी के साथ वायरल है।
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भारतीय होने का मतलब सिर्फ़ अपनी पहचान पर गर्व करना नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर मानवता निभाना भी है।
लंदन में एक भारतीय युवक ने दूसरी मंज़िल की खिड़की से गिरने वाली 3 साल की बच्ची की जान बचाकर यही साबित किया। पुलिस अधिकारी ने उसे गले लगाकर धन्यवाद दिया।🔥🔥
🚨 In Japan, a 3-year-old child survived a fall from the fifth floor thanks to the quick actions of a passerby, who was hailed as a hero across the country.
मेरे गृह जनपद हरदोई में बहुत ही हृदय विदारक शर्मनाक और
दिल चीर देने वाली घटना घटित हुई है
17 वर्षीय एक लड़की ने एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी से शादी करने से मना कर दिया था
इसके बदले में 24 वर्षीय युवक ने शुरू में लड़की को बहुत परेशान किया उसके बाद 11 मई को जब लड़की शादी से लौट रही थी वहां से वो लड़की को जबरदस्ती सुनसान जंगल में उठा ले गया और वहां पेड़ में बांधकर बुरी तरह से लड़की के साथ मारपीट की लात घूंसे मारे
जब लड़की ने शादी करने से मना किया तो युवक ने गुस्से में लड़की के दोनों स्तन काट दिए
यह सिर्फ एक निजी लड़ाई नहीं है वरन नाबालिग लड़की के साथ मानवता के खिलाफ अमानवीय व जघन्य अपराध है
ऐसे विकृत व आपराधिक प्रवृत्ति के के अपराधी को किसी भी हाल में बक्शा नहीं जाना चाहिए
आरोपी के विरुद्ध अतिशीघ्र कड़ी कार्यवाही करना आवश्यक है
बलात्कार शारीरिक क्रूरता अंग भंग करना जैसी संगीन धाराओं में कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के घृणित कृत्य करने की कोई हिमाकत न कर सके
पुलिस को आरोपी के पिछले अपराधों की भी गहनता से जांच करनी चाहिए क्योंकि यदि लड़की के परिजन पहले से शिकायत कर चुके
थे तो सवाल खड़े होंगे कि शिकायतों पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई
दूसरी तरफ पीड़ित लड़की को मुफ्त चिकित्सीय इलाज सर्जरी की सुविधा मिलनी चाहिए
परिवार को सुरक्षा दी जाए और मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए जिससे कि न्याय पाने की लड़ाई में लड़की स्वयं को अकेला न महसूस करे
इस दुःख की कठिन घड़ी में सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि लड़की को सरकारी आवास आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और लड़की की मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था कराई जाए जिससे लड़की के भविष्य के रास्ते खुल सकें
इस मामले को सिर्फ निंदा तक सीमित नहीं रखना है पीड़ित लड़की की आवाज उठाइये पुलिस प्रशासन से आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग करिए
महिला सुरक्षा के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं से जुड़कर लड़की को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़िए
ऐसे गंभीर मामले पर चुप रहना अपराधियों को प्रोत्साहित करता है
अगर आप लोग चाहते हैं इस दरिंदे को कड़ी सजा मिले पीड़ित लड़की को न्याय और सुरक्षा मिले
तो इस पोस्ट को रीट्वीट करें और पुलिस प्रशासन से आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग करें
अति आवश्यक सुचना :-
ये बैठी एक बच्ची जो अपने परिजनो से बिछड़ चुकी हैं ..!
यह जोधपुर के मंडोर गार्डन की घटना है जहां भैरूजी मंदिर के बाहर खुलें चौक में बैठी देखी गई
वहां एक महिला आकर पूछती है लेकिन स्पष्ट बता नही पा रही है जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि
उनके मां बाप तक सुचना पहुंच सकें
📢 अति आवश्यक: गुमशुदा की तलाश
हम सभी की एक छोटी सी कोशिश इस बच्ची को सुरक्षित घर वापस ला सकती है। कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक ग्रुपों में साझा करें।
बच्ची का विवरण:
• नाम: शिफ़ा (Shifa)
• पिता का नाम: समीर
• स्कूल: सर्वोदय कन्या विद्यालय, सुल्तान पुरी
• कक्षा: VIII-F
• उम्र: लगभग 13 वर्ष (DOB: 01-03-2013)
लापता होने की जानकारी:
• स्थान: आखिरी बार F-4 ब्लॉक, सुल्तानपुरी के CCTV कैमरे में देखी गई।
• तारीख: 28 फरवरी 2026
• समय: शाम लगभग 5:14 बजे
संपर्क करें:
यदि आपको इस बच्ची के बारे में कोई भी सुराग मिले, तो कृपया तुरंत नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करें:
📞 8375814903
या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन (सुल्तानपुरी थाना) को सूचित करें।
आपकी एक ‘Share’ इस परिवार की मदद कर सकती है। कृपया इंसानियत के नाते इसे फैलाएं। 🙏
बड़े भाई पत्रकार नृपेंद्र तिवारी उर्फ बब्लू की पुत्री गुनगुन तिवारी उर्फ गुन्नू उम्र लगभग 13 वर्ष कल शाम 5 बजे से घर के बाहर खेल रही थी उसके बाद से कोई पता नहीं चल पा रहा है आपको अगर कहीं दिखाई दे तो इन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें
पीड़ित परिवार की मदद करें
टाउन हैदरगढ़ बाराबंकी उत्तर प्रदेश
नृपेंद्र तिवारी -9839875200
@myogiadityanath@Uppolice@dgpup
2015 में सीरिया की युवती युसरा मर्दिनी अपनी बहन सारा के साथ छोटी नाव से ग्रीस जा रही थीं।
बीच समुद्र में नाव का इंजन बंद हो गया और नाव में करीब 20 लोग सवार थे।
हालात बिगड़ते देख युसरा ने बिना देर किए पानी में छलांग लगा दी और घंटों तक तैरकर नाव को आगे बढ़ाने में मदद करती रही। आखिरकार सब लोग सुरक्षित ग्रीस पहुंच गए।
आज वही युसरा मर्दिनी एक ओलंपिक तैराक बन चुकी हैं और दुनिया भर में हिम्मत की मिसाल मानी जाती हैं।
Swiggy का एक डिलीवरी बॉय सुबह घर से निकला तो बस एक कप चाय पीकर निकला था। पूरे दिन शहर में डिलीवरी करता रहा।
एक जगह ऑर्डर देने पहुंचा तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसे थका हुआ देखा और रोक लिया। बोले पहले खाना खा लो फिर जाना।
यह सुनकर वह चुप हो गया और भूख की वजह से जल्दी से खाने बैठ गया। खाने से पहले उसने हिचकते हुए पूछा क्या मैं इसे खा लूं। लोगों ने कहा हां यह सब तुम्हारे लिए ही है।
इतना सुनते ही उसकी आंखों से आंसू निकल आए। जब लोगों ने वजह पूछी तो बोला सर मैं सुबह से भूखा हूं। घर से सिर्फ एक कप चाय पीकर निकला था। काम में ऐसा लगा रहा कि यह भी भूल गया कि मुझे भूख लगी है🥹
मारकर मुंह फार दिया 🚨
झारखंड के इस Youtuber को कुछ असामाजिक तत्वों ने दौड़ा दौड़ा मारा,
और मारते मारते मुंह फार दिया 😭 क्योंकि यह गरीबों का आवाज उठा रहा था।
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी बहुत बढ़ गई है
लोग यह सोचकर हजारों लाखों रुपए प्रीमियम भुगतान करते हैं की जरूरत पर इंश्योरेंस कंपनियां मदद करेंगी
लेकिन इंश्योरेंस कंपनीयां इतनी लुटेरी हो गई है कोई ना कोई बहाना बनाकर लोगों का क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं
संसद भवन से मात्र चंद किलोमीटर की दूरी पर….
देश का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया….
हर रोज़ हज़ारों बच्चियों के साथ शोषण होता रहा…
लेकिन ज़िम्मेदारों की आँखें नहीं खुली….!!!
अर्चना तिवारी @ArchanaRajdharm ने इतने संवेदनशील मुद्दे को छुआ है, जिसे कभी किसी गोयनका अवार्ड वाले वामपंथी नामी पत्रकार ने हाथ लगाने पर भी विचार नहीं किया। कारण क्या हो सकता है कि वे इन विषयों में क्यों नहीं पड़ते?
जोधपुर ज़िले के बावड़ी केलावा गांव से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।
यहाँ भील आदिवासी समुदाय से आने वाली महज़ 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची को लोगों ने बेरहमी से पीट दिया।
सोचने वाली बात ये है कि एक मासूम आदिवासी बच्ची के साथ हुई इस भयानक घटना लेकिन अब तक पुलिस प्रशासन ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।
ना ही सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है, ना कोई जवाबदेही, ना कोई संवेदनशीलता।
सवाल ये है कि क्या आदिवासी होना आज भी इंसाफ के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन चुका है?
क्या कानून सिर्फ कागज़ों में है, और ज़मीन पर कमजोरों के लिए कोई जगह नहीं?
यह घटना सिर्फ एक बच्ची पर हमला नहीं है,
यह पूरे सिस्टम, प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवाल है।