सुदर्शन न्यूज़ ने माहौल बना दिया 🔥🤟
ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी
सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार ने साफ साफ कहा
यह शरिया कानून नहीं देश सबसे ऊपर है
इतना कहकर मोर्चा संभाल लिया
मुस्लिम लॉ बोर्ड वालों ने खातूनों को आगे बढ़ा दिया
लेकिन सुदर्शन की शेरनी पीछे नहीं हटी
अकेले सबकी धज्जियां उड़ा के रख दिया
पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा
यही जज्बा हर हिंदुओं के अंदर होना चाहिए
विश्वविद्यालय में आए दैनिक जागरण वालों के बैनर में रजनीगंधा का प्रचार देख के लड़के ने सवाल पूछ लिया!!
लगता है लड़के ने शेरनी का दूध ज़्यादा पी लिया था।
इस देश में अगर आप गरीब हैं तो यह देश और यहां की चीजें यहां तक कि भगवान का जो घर है यानी मंदिर वह भी आपके लिए नहीं है हर चीज़ वीआईपी लोगों के लिए है गरीब और मिडिल क्लास सिर्फ और सिर्फ वोट देने के लिए।
Karthik Sahni and Bittu Tabahi prove that our rivers and water bodies are absolutely cleanable, even individual efforts can make a massive difference.
Only two possibilities exists, either the kids are lying, or the municipalities are corrupt.
So what exactly have municipalities been doing with crores in funds all these years?
Going by these examples, we could have clean water bodies within a year. Is corruption and apathy so deeply entrenched ki literally zero kaam ho raha hai?
#amitkilhor #kilhor #bittutabahi #kartiksahni
भोपाल निवास पर ब्यावरा के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी ‘बिट्टू तबाही’ से आत्मीय भेंट की।
बिट्टू ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से सिर्फ अजनार नदी की सफाई ही नहीं की, बल्कि अपने प्रयासों से समाज को यह संदेश भी दिया है कि बदलाव के लिए बड़ी भीड़ नहीं, एक सच्ची पहल ही काफी है।
आपकी यह पहल जल गंगा संवर्धन अभियान की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मूल उद्देश्य जनभागीदारी के साथ जल स्रोतों का संरक्षण एवं उनका पुनर्जीवन है।
मुझे विश्वास है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प प्रदेश के युवाओं को अपने आसपास के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।
पूरे प्रदेश को आप पर गर्व है।
करीब तीन दिन तक...
मिट्टी के नीचे दबी रही एक मां और उसके दो नन्हे बच्चे...💔
केरलम में भारी बारिश के बाद एक जगह हल्का भूस्खलन हुआ। आसपास के लोगों को कहीं से बहुत धीमी-सी कूं-कूं की आवाज सुनाई दे रही थी।
बारिश थम गई, लेकिन आवाज बंद नहीं हुई।
लोगों ने हिम्मत करके उस जगह की मिट्टी हटानी शुरू की तो जो सामने आया, उसे देखकर हर किसी का दिल भर आया...
मिट्टी के अंदर एक मां कुतिया अपने दो नवजात बच्चों के साथ फंसी हुई थी। तीनों करीब तीन दिन से बिना खाना-पानी के वहीं दबे हुए थे। बच्चे कांप रहे थे और मां खुद हिल तक नहीं पा रही थी।
लोगों ने तुरंत तीनों को बाहर निकाला। बच्चों के शरीर से मिट्टी साफ की, उन्हें तौलिए से सुखाया और कपड़े में लपेटकर गर्म रखा।
और तभी मां की आंखों से आंसू बहने लगे... 😢
वह अपने बच्चों के बिल्कुल पास खड़ी होकर उन्हें देखती रही। जैसे इतने दिनों की घुटन, डर और तकलीफ के बाद उसे यकीन हुआ हो कि अब उसके बच्चे सुरक्षित हैं।
कोई नहीं जानता कि उन आंखों के आंसुओं में दर्द था, थकान थी या अपने बच्चों के बच जाने की खुशी...
लेकिन एक बात जरूर समझ आती है - उस मां ने उन तीन दिनों में अपने बच्चों का साथ नहीं छोड़ा।
बाद में लोगों ने तीनों के लिए वहीं एक छोटा-सा अस्थायी आशियाना बनाया, खाना-पानी दिया और बारिश से बचाने की कोशिश की।
सोचिए...
अगर उस मां की धीमी-सी आवाज किसी ने अनसुनी कर दी होती, तो शायद किसी को पता ही नहीं चलता कि मिट्टी के नीचे तीन जिंदगियां जिंदगी और मौत के बीच फंसी हुई हैं।
कभी-कभी किसी की जिंदगी बचाने के लिए बहुत कुछ नहीं चाहिए होता...
बस किसी की छोटी-सी पुकार सुनने वाला एक इंसान चाहिए। 🙏🐾❤️
Civic activist Santosh Pandit has reportedly been detained by Pune Police after repeatedly highlighting dangerous potholes, open manholes and poor road conditions across the city. His demonstrations brought attention to the everyday risks faced by commuters.
The incident has sparked questions online about civic accountability. When citizens raise concerns over public safety, the response should be to fix the problem, not silence the person pointing it out. 🙏
सड़कों पर गड्ढे, सीवरेज और ड्रेनेज पर वीडियो बनाकर सरकार की पोल खोलोगे तो "आतंकवादी" घोषित करके गिरफ्तार कर लिया जाएगा!
संतोष पंडित की कहानी से सबक लेने का वक्त आ गया है दोस्तों!
सागर बाईपास आरटीओ चेकिंग मध्यप्रदेश रुकने का नाम नहीं यहां वसूली जारी है।
कुछ दिन पहले ड्राइवर का पैर कट गया था। लेकिन फिर से देखिए ट्रक की लाइन लगी है।
पुलिस वाले वसूली करने में कोई समझौता नहीं कर रहे है।
जो जमीनी सच्चाई है वो यह महिला बता रही है जो कागजी सच्चाई है वह न्यूज़ बता रहा है
सरकारों को सिर्फ घोषणाएं नहीं करनी चाहिए उन घोषणाओं को जमीन पर भी उतरना चाहिए, ताकि उसका लाभ आम जनता को मिल सके
आप खुद सोचिए कोई महिला घर से यह सोचकर निकाली हो बस में किराया फ्री होगा आराम से बैठकर हम अपने घर चले जाएंगे
लेकिन जब वह बस रोके और बस न रुके सोचिए कितनी परेशानी होती होगी?
या तो योगी सरकार को ऐसी घोषणाएं नहीं करनी चाहिए अगर घोषणा की है तो उसे जमीन पर भी उतरने की जिम्मेदारी योगी सरकार की ही है।