निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह आदेश स्वागत योग्य है। हाथरस की पीड़िता बहिन मनीषा बाल्मीकि की मृत्यु के 6 साल बाद भी उनके परिवार को न्याय, सुरक्षित आवास और रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़े, यह मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का गंभीर उदाहरण है।
न केवल हाथरस की दलित पीड़िता के न्याय का मुद्दा, बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास का सवाल भी कई बार उठाया गया। इसके बावजूद सरकार ने परिवार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।
जब पीड़ित परिवार अपनी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रूप से खतरा बता रहा था, तब भी सरकार का अलीगढ़, कासगंज या एटा में घर देने पर अड़ना बेहद चिंताजनक था। पीड़ित परिवार की सुरक्षा सरकार की कृपा नहीं, उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
माननीय उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप बताता है कि जब सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल होती है, तब न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है। अब सरकार को बहानेबाजी छोड़कर हाईकोर्ट के आदेश को तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए।
छह साल, शर्मनाक!
भगवान को नचाने का अहंकार रखनेवालों को भगवान ने ही नचा दिया। अपने को भगवान से ऊपर समझनेवालों को भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुख़ार भी।
ये युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश का संयुक्त परिणाम है क्योंकि:
- ‘वोट चोरी’
- ‘पेपर चोरी’
- ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’
- ’नौकरी चोरी’
- ’आरक्षण चोरी’
- ‘कमीशनख़ोरी’
- ’पीडीए पर अत्याचार’
- ’घोर भ्रष्टाचार’
- ‘महंगाई की मार’
- ’मिलावट के सरकारीकरण’
- ‘माताओं-बेटियों तक का अपमान’
- ’देश के जेन ज़ी पर हर तरह से प्रहार’
भाजपा ने इन सभी तरीक़ों से जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगा है।
अब तो भाजपावाले भी अपने ही ‘किसी’ का इस्तीफ़ा माँगेंगे क्योंकि जो अपनी ही विधानसभा हार गये उनके भरोसे नाव कैसे पार होगी। दरअसल ये हार उनकी है जिन्होंने उनको चुना था या कहें संगठन पर अपनी मर्ज़ी की तरह थोपा था। अब तो कोई ये भी नहीं कह सकता है कि ‘भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।’
सबसे ज़्यादा खुश तो उप्र में ‘वो’ हैं, जिनको ‘पीडीए’ समाज का होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर का पद न देकर जानबूझकर राज्य स्तर का पद दिया गया था। आज तो वो भी मुस्कुराकर पूछ रहे हैं : ‘5 बड़ा या 7’। वैसे जनता ये भी कह रही है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाये तो राज्य-अध्यक्ष तो विधानसभा लड़वा भी नहीं पाएंगे।
ये डबल इंजन की डबल हार है।
भाजपा की हार मतलब बदलाव की शुरुआत! भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उनकी हार नहीं बचा पाएंगी। अब भाजपा का संकट हार से बढ़कर इस बात का होगा कि उनका टिकट लेनेवाला ‘ड्रोन और दूरबीन’ से भी ढूंढे नहीं मिलेगा।
सभी विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई और नई उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए सजग-सचेत और संविधान के प्रति वचनबद्ध रहने की अपेक्षा।
(कोष्ठक में विशेष : लड्डू तो भाजपा के अंदर भी बँट रहे हैं…)
@UPPCLLKO सैदाबाद प्रयागराज में शाम को 7 से 8 बजे तक लाइट कट जाती है उसके बाद रात 12 से 1 बजे तक लाइट आती है, निरंतर लाइट की व्यवस्था बहुत ही खराब की स्थिति बनी है ।
पवार हाउस बजहा मिश्रान, सैदाबाद प्रयागराज की समस्या है