सुशासन की जीत हुई है।
विकास की जीत हुई है।
जन-कल्याण की भावना की जीत हुई है।
सामाजिक न्याय की जीत हुई है।
बिहार के मेरे परिवारजनों का बहुत-बहुत आभार, जिन्होंने 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जीत का आशीर्वाद दिया है। यह प्रचंड जनादेश हमें जनता-जनार्दन की सेवा करने और बिहार के लिए नए संकल्प के साथ काम करने की शक्ति प्रदान करेगा।
जो लोग दिवाली में धुआँ और ध्वनि प्रदूषण की दुहाई देते नहीं थकते थे आज दिल्ली के आतंकी विस्फोट पर कोई बयान नहीं… ?
निर्दोष हताहतों के प्रति संवेदना💐।
हमारे देश की जाँच एजेंसियाँ इस घृणित काण्ड का खुलासा तो कर ही देंगी, कोई दोषी बचेगा भी नहीं पर संतोष इस बात का है कि सारे देशवासी जान रहे हैं कि इस कृत्य के पीछे कौन सी विचारधारा काम कर रही है।
बँटोगे तो कटोगे।
वन्दे मातरम् 🙏🏼
Greetings on the occasion of Diwali. May this festival of lights illuminate our lives with harmony, happiness and prosperity. May the spirit of positivity prevail all around us.
Congratulations to Thiru CP Radhakrishnan Ji on winning the 2025 Vice Presidential election. His life has always been devoted to serving society and empowering the poor and marginalised. I am confident that he will be an outstanding VP, who will strengthen our Constitutional values and enhance Parliamentary discourse.
@CPRGuv
राजस्थान की आन, बान और शान को तोड़ने की साजिश कभी सफल नहीं होगी।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री राजकुमार रोत द्वारा जारी किया गया तथाकथित "भील प्रदेश" का नक्शा एक शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण राजनीतिक स्टंट है। यह न केवल गौरवशाली राजस्थान की एकता पर चोट है बल्कि आदिवासी समाज के नाम पर भ्रम फैलाने और सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश भी है।
आज अगर कोई भील प्रदेश की बात करेगा, कल कोई मरू प्रदेश की मांग करेगा तो क्या हम अपने शानदार इतिहास, विरासत और गौरव को ऐसे ही टुकड़ों में बाँट देंगे?
सांसद श्री राजकुमार रोत द्वारा जारी नक्शा आदिवासी समाज में जहर बोने की साजिश है जो प्रदेशद्रोह की श्रेणी में आता है और इसे जनमानस कभी स्वीकार नहीं करेगा।
@roat_mla
सभी देशवासियों को भगवान परशुराम जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। शस्त्र और शास्त्रों के दिव्य ज्ञान के लिए पूजनीय भगवान परशुराम की कृपा से हर किसी का जीवन साहस और सामर्थ्य से परिपूर्ण रहे, यही कामना है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी।
India will identify, track and punish every terrorist, their handlers and their backers.
We will pursue them to the ends of the earth.
India’s spirit will never be broken by terrorism.
देश का बँटवारा जब हिंदू व मुसलमान के नाम पर हो गया तो केवल वोट बैंक के लिए अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों को ज़्यादा अधिकार देकर हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने वालों को आज पहलगाम की घटना पर बताना चाहिए कि आज की हत्या धर्म के आधार पर की गई या नहीं? लानत है सेकुलर वादी नेताओं पर,आर या पार पाकिस्तान के क़ब्ज़े का कश्मीर हमारा होगा,धैर्य रखिए यह मोदी की सरकार है जिसके गृहमंत्री अमित शाह जी हैं ।संविधान का आरटिकल 26 से 29 तक ख़त्म करने का समय है
कह रहीम कैसे निभै, केर बेर को संग…
ये सर्वविदित है कि बिल संसद में पास होने के बाद धरा का कानून बन जाता है।आज वक़्फ़ के समर्थन और विरोध में देश के सारे राजनैतिक दल और विचारधाराएं दो धड़े में बटी हुई हैं, पक्ष हो या विपक्ष इतना तो सभी मानेंगे कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जिन पिता पुत्र कि निर्मम हत्या की गयी, जिनके घर, दुकानें जलायी गयीं, लूटी गयीं, इतना ही नहीं जिन असंख्य हिन्दुओं को औरतों, बच्चों की जान और अस्मिता बचाने के लिए अपना घर, गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा उनका वक़्फ़ संशोधन बिल से कोई लेना देना नहीं है, बिल के पास होने में उनकी कोई भूमिका नहीं है, उनको तो ये भी पता नहीं होगा कि ये वक़्फ़ क्या बला है।
आख़िर उनका दोष क्या था? मस्जिद के सामने ‘डीजे’ भी तो नहीं बजा रहे थे! वक्फ़ एक्ट का बहाना लेकर ‘अल्पसंख्यकों’ ने अकारण बिना उकसाये जो सुनियोजित हिंसक हमला किया है, आये दिन ऐसे हमले झेलना अब हिन्दुओं की नियति बन चुकी है। आख़िर हिन्दू कब तक और कहां तक भागेगा? बांग्लादेश से तो ये सोचकर भागे थे कि भारत में सुरक्षित रहेंगे, अब यहां से भागकर कहां जायेंगे?
संसद से लेकर सड़कों तक आये दिन संविधान लहराने वालों को भी याद रखना चाहिए कि संविधान शिल्पी बाबा साहब के संविधान में वक़्फ़ नाम का शब्द कभी था ही नहीं, न ही उनकी परिकल्पना में इसका कोई औचित्य था। हत्या, लूटपाट और बर्बरता ‘काफ़िरों’ के साथ हो रही है, मारने के पहले किसी की जाति नहीं पूछी जा रही है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है कि पिछड़ों और दलितों के तथाकथित स्वयंभू नेताओं की इसपर मुंह खोलने की हिम्मत तक नहीं है।
बिल तो बस बहाना है, मक़्सद ‘काफ़िरों’ को मिटाना है।
धर्मो रक्षति रक्षितः
Hindus of the country do not want any land belonging to others.
Atal Bihari Vajpayee Ji's words reflect the ethos of Hindus.
"होकर स्वतन्त्र मैने कब चाहा है कर लूँ सब को गुलाम?
मैने तो सदा सिखाया है करना अपने मन को गुलाम।
गोपाल–राम के नामों पर कब मैने अत्याचार किया?
कब दुनिया को हिन्दू करने घर–घर मे नरसंहार किया?
कोई बतलाए काबुल मे जाकर कितनी मस्जिद तोडी?
भूभाग नहीं, शत–शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय।
हिन्दू तन–मन, हिन्दू जीवन, रग–रग हिन्दू मेरा परिचय!"
#WaqfAmendmentBill #WaqfAmendment
An exceptional game and an exceptional result!
Proud of our cricket team for bringing home the ICC Champions Trophy. They’ve played wonderfully through the tournament. Congratulations to our team for the splendid all round display.
जेलेन्स्की वही है जो राहुल गाँधी आगे चल कर बन सकता है। जेलेन्स्की ने अपने ईगो के चक्कर में देश को पेल दिया। आज यूरोप यूनियन और पूरा पश्चिम यूक्रेन की बर्बादी में अपना हिस्सा ढूँढ रहे हैं। कोई यूक्रेन के साथ नहीं है।
किसी को अपने ‘सहयोग राशि’ की वापसी की गारंटी चाहिए तो कोई वहाँ के संसाधनों के दोहन से पैसे वापस लेगा। सबने यूक्रेन को आगे बढ़ा कर लड़ाया। हर राष्ट्र की हथियार बनाने वाली कंपनी को व्यवसाय मिला। अब रिकवरी का समय है, सब अपना हिस्सा वहाँ की भूमि से लेंगे।
राहुल गाँधी जब ऐसे राष्ट्रों में जा कर लोकतंत्र के नाम पर सहयोग माँगता है, तो वस्तुतः वो जेलेन्स्की की तरह सोचता है कि वो हीरो बन जाएगा। परंतु, जोकर यदि हीरो भी बनता है तो केवल अपनी पिक्चर में।
राहुल गाँधी यूरोप/अमेरिका को आमंत्रित कर के, यहाँ के संसाधनों को गिरवी रख कर अंत में भाग जाने वाला व्यक्ति है। उसकी कोई लायबिलिटी नहीं है। जेलेन्स्की काली टीशर्ट पहनता है, वो उजली। दोनों में विशेष अंतर नहीं। कॉमेडियन तो ये है ही।
राहुल गाँधी को भी तैयार किया जा रहा है। राहुल गाँधी यूरोपीय/अमेरिकी ग्रूमिंग गैंग के लिए उचित प्रत्याशी है। यही कारण है कि भारत की लूट के लिए विदेशी इतनी लम्बी योजना बना कर सतत फंडिंग में लगे हुए हैं। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, भारत को बेचने के लिए विवश करने का षड्यंत्र है।