*#सतभक्ति_की_होली*सर्व सुख दाता परमात्मा को पाने के लिए हमें राम नाम की होली खेलनी पड़ेगी। नकली रंगों से बात नहीं बनेगी।
पाएं निःशुल्क पुस्तक ज्ञान गंगा।
*#सतभक्ति_की_होली*असली होली तो वह है जिस दिन हमें तत्वदर्शी संत की शरण मिले, जो पूर्ण परमात्मा को पाने का वास्तविक भक्ति मार्ग बताते हैं। पढ़ें पुस्तक "ज्ञान गंगा"
*#सतभक्ति_की_होली*इस होली आप भी रूबरू हों उस अनोखे ज्ञान से जिसने भर दिया है लाखों लोगों के जीवन में भक्ति का रंग।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी पुस्तक ‛ज्ञान गंगा’ आप भी मंगवाएं व एक सार्थक जीवन की शुरुआत करें।
*#राम_नाम_की_होली*वास्तविक होली तो तब होगी जब हमारे सारे दुख दूर होंगे और यह दुख सतभक्ति करने से ही समाप्त होंगे।
पाएं निःशुल्क आध्यात्मिक पुस्तक जीने की राह।
*#राम_नाम_की_होली*कौन सी होली खेलने से हमें सर्व सुख तथा पूर्ण मोक्ष प्राप्त होता है?
ऐसे ही अनसुलझे सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़ें पुस्तक "ज्ञान गंगा"
*#राम_नाम_की_होली*जिस प्रकार भक्त प्रह्लाद ने भक्ति करके परमेश्वर को याद किया जिससे उसकी सदैव रक्षा हुई। तो क्यों ना हम भी उस परमेश्वर को सदा याद करें जिससे हमारी भी सदैव रक्षा हो।
आइए इन नकली रंगों को छोड़कर राम नाम की वास्तविक होली खेलें। पढ़ें निःशुल्क आध्यात्मिक पुस्तक ज्ञान
*#राम_नाम_की_होली*सर्व सुख दाता परमात्मा को पाने के लिए हमें राम नाम की होली खेलनी पड़ेगी। नकली रंगों से बात नहीं बनेगी।
पाएं निःशुल्क पुस्तक ज्ञान गंगा।
*#राम_नाम_की_होली*इस होली पर हमें वास्तविक राम नाम की होली के बारे में जानना होगा। जिससे हमारे सभी दुःख टलेंगे, सर्व सुख तथा पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होगी।
पढ़ें निःशुल्क आध्यात्मिक पुस्तक ज्ञान गंगा
*#राम_नाम_की_होली*सांसारिक होली के रंग फीके हैं। जो कुछ ही घंटों में धुल जाते हैं। लेकिन राम नाम की होली के रंग कभी नहीं धुलते बल्कि समय के साथ और गहरे होते चले जाते हैं।
पढ़ें पुस्तक "ज्ञान गंगा"
*#राम_नाम_की_होली*सर्व सुख दाता परमात्मा को पाने के लिए हमें राम नाम की होली खेलनी पड़ेगी। नकली रंगों से बात नहीं बनेगी।
पाएं निःशुल्क पुस्तक ज्ञान गंगा।
*#राम_नाम_की_होली*असली होली तो वह है जिस दिन हमें तत्वदर्शी संत की शरण मिले, जो पूर्ण परमात्मा को पाने का वास्तविक भक्ति मार्ग बताते हैं। पढ़ें पुस्तक "ज्ञान गंगा"
#SantGaribDasJi_BodhDiwasसंत गरीबदास जी का जन्म गाँव-छुड़ानी जिला-झज्जर
प्रांत-हरियाणा में सन् 1717 (विक्रमी संवत् 1774) में हुआ।
फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को दिन के लगभग 10 बजे परम अक्षर ब्रह्म (परमेश्वर कबीर साहिब) दस वर्षीय गरीबदास जी को जिन्दा महात्मा के वेश में मिले