@AxisBank आप क्या अपनी पालिसी के बारे में ग्राहकों को बता सकते है मैंने 350000 का चेक दिया किसी को एकाउंट में बैलेंस भी था फिर भी दो बार चेक वापिस कर दिया एक दम परेशान कर रखा
@AxisBankSupport#AxisBank
UGC रेगुलेशन, SCST एक्ट और जातिगत आरक्षण के विरोध में 5 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे यह सवर्ण युवा समाज और मोदी सरकार को जगाने का कार्य कर रहे।
आप इनके पास जाकर समर्थन नहीं कर सकते , तो कम से कम सोशल मीडिया पर वीडियो को शेयर कर समर्थन तो दे सकते है।
चंद्रशेखर रावण अरेस्ट वारंट निकलने के बाद भी बाहर है!
और पंकज धवरैय्या को गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वो शांतिपूर्ण यात्रा निकाल रहे थे!
ऐसा दोगलापन क्यों??
#ReleasePankajDhavaraiyya
एक गांव में पासवान और पांडे का जमीन है पासवान बार बार अनैतिक तरीके से खेत की मेडी काट कर न्यू बना देता है जब बोला गया तो अधिकार आया जो कि दलित था
अधिकार=तू कौन है तू क्यों बोला
बच्चा=मै पांडेय हु
अधिकारी=उसकी क्या जाति है
सहकर्मी=वह पासवान है
अधिकारी=ले चले फिर #scSt एक्ट लगा दो
#नोएडा_बस संचालकों ने कहर बरपाया हुआ है.
यमुना एक्सप्रेस-वे पर 9 यात्री जलकर मर गए, आग की आंच भी कम नहीं हुई है. लेकिन नियम सुरक्षा देखने वाला कोई नहीं है शायद
शनिवार रात यह बस एक सेक्टर-59 में एक व्यक्ति को कुचल कर चली गई
@myogiadityanath@CMOfficeUP
बनारस में आरक्षण, मोदी एक्ट एवम् UGC नियमावली के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को कल रात्रि पुलिस ने जबरन हटा दिया। उनके टेंट आदि उखाड़ लिए गए।
मेरी बनारस के लोगों से प्रार्थना है कि अपने सांसद का कार्यालय और सांसद प्रतिनिधि से जा कर पूछिए कि क्या प्रदर्शन के मौलिक अधिकारों का हनन ऐसे ही होता रहेगा?
BHU के युवाओं से अनुरोध है कि आप लोग प्रदर्शन के लिए निकलिए। एक दिन का ही रखो, पर भीड़ ले कर जाइए और केवल इतना पूछिए कि परीक्षा पर चर्चा करने वाले प्रधानमंत्री विद्यार्थियों के प्रश्नों से कब तक भागेंगे? UGC का अभिशाप आप पर ही पड़ेगा।
IIT बॉम्बे को आधार बना कर कि ‘आज भी दलित आत्महत्या कर रहे हैं’, @PMOIndia की योजना यही है कि UGC नियमावली को अंततः हर कैमप्स में लागू किया जाए। यदि यह योजना नहीं है तो सरकार सात महीने में दूसरी डेट क्यों ले रही है सुप्रीम कोर्ट से? क्या यह यूपी चुनाव तक टाल कर, इसे जैसे का तैसा अप्रैल से लागू करने का षड्यंत्र नहीं है?
आप यदि इसे कोई छोटी प्रतिक्रिया मान कर चुप बैठेंगे तो सारे लोगों का मनोबल टूटेगा। हमें वह नहीं होने देना है। आप चुप बैठेंगे, समाज शांत हो जाएगा। बहुत परिश्रम और मूल्य चुकाने के उपरांत आज हम इस स्थिति में हैं कि चर्चा हो रही है।
इसे समाप्त मत होने दीजिए।
बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह ( DJ concert) को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है की इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है।
मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें,
हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।
फूलपुर के ढोकरी गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार के3 नाबालिक बेटे पर SCST एक्ट लगा दिया गया।
सामने आई यह कहानी सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की है जो आज आर्थिक तंगी के बीच इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि एक ब्राह्मण परिवार ने अपनी जमीन को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और मुकदमा जीतने के बाद अपने ही जमीन पर पत्रा रखने पहुंचा।
परिवार का आरोप है कि इसी दौरान विपक्षियों ने संख्याबल के साथ हमला कर दिया। घटना के बाद एससी/एसटी एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ और परिवार के छोटे बेटे को जेल जाना पड़ा।
आज हालात ये हैं कि जिस जमीन को लेकर परिवार ने अदालत में लड़ाई लड़ी, उसी जमीन के विवाद ने परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है।
घर में कमाने वाले हाथों की कमी है...
मुकदमे का बोझ है...
जेल में बंद बेटे की चिंता है...
और परिवार के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाने की चुनौती है।
एक परिवार का सवाल है- अगर अदालत से अपना हक मिलने के बाद भी जमीन पर खड़ा होना इतना मुश्क
शैलेंद्र यादव ने मेरी पूरी गाड़ी तोड़ मेरे पति को मेरे बच्चों को मारने की धमकी दी है:- संगीता तिवारी
वाराणसी पुलिस इस महिला की पुकार सुनें, इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। पूरी गाड़ी तोड़ दिया इस परिवार की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुस्तकालय के कर्मचारी पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है।
आपसे निवेदन है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर पीड़ित की सहायता एवं दोषियों पर कार्रवाई करें।
@dmprayag @CMOfficeUP @prayagraj_polic #Prayagraj
आंखों में शर्म है तो REPOST और POLICE TAG करो 🚨
नाम:छोटा
जनपद:@ambedkarnagrpol
गांव:मीरानपुर थाना: अकबरपुर
हिन्दू देवी देवताओं एवं हिन्दू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी सहन नहीं की जाएगी 😡
@igrangeayodhya@prachiIPS कृपया जांच कर आवश्यक कार्यवाही करें
अरविन्द सिंह ( भीमटा ) द्वारा दो पंडितो कि हत्या के बाद उनके परिवार वालो को सुनिए..
ब्राह्मण होना अब इस देश मे अभिशाप हो गया है
देखिये पीड़ा इन ब्राह्मणों कि 👇
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।