संसद से डॉ आंबेडकर की मूर्ति हटाने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज आंबेडकरवादियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हो गई, देखिए जंतर-मंतर से हमारी ये ग्राउंड रिपोर्ट
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सुनो कहानी। एक राजा थे। उसने नौकर का काम करने के लिए बंदर पाला। बंदर को खूब प्यार दिया। खाने को पेडिग्री दी। बंदर भी राजा को प्यार करता था। लोगों को लगा कि बंदर भी राज परिवार का है। फिर एक दिन सो रहे राजा के नाक की मक्खी हटाने के लिए बंदर ने राजा की नाक काट दी।
बीजेपी ने पत्रकार पाले। उनमें से दो बंदर थे। उन्होंने मतदान से एक दिन पहले आरक्षण पर उल्टा बयान दे दिया। राजा अब अपनी नाक सहला रहा है। अंदाज़ा लगा रहा है कि कहीं लोगों ने इसे बीजेपी की राय तो नहीं मान लिया। वे एससी, एसटी, ओबीसी बहुल राज्य हैं।
क्या आप उन दो बंदरों के नाम जानते हैं?
@sudhirchaudhary और @MediaHarshVT को इस बारे में पता होगा।
@JPNadda जी तो पक्का जानते होंगे।
सुधीर जाट है। इसकी अपनी जाति उत्तर प्रदेश, दिल्ली और धौलपुर और भरतपुर को छोड़ पूरे राजस्थान आदि में ओबीसी है। इनकी जाति को आरक्षण से काफ़ी लाभ हुआ है। ख़ासकर पुलिस और अर्धसैनिक बल में काफ़ी लोग आए हैं।
इन राज्यों में सुधीर जाट ओबीसी आरक्षण के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकता। पब्लिक दौड़ा लेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर जाट आरक्षण माँग रहे हैं क्योंकि इनके पास ज़मीन तो है पर सरकारी नौकरी, ख़ासकर केंद्र सरकार के उच्च पदों पर ये नज़र नहीं आते। खेती अब कम लाभकारी हो रही है। युवा बेरोज़गार हैं।
क्रिकेट में जाटों का आना भी नई बात है। 90 से पहले ये सलेक्ट नहीं होते थे। अब हो रहे हैं। ये अच्छी बात है। जाट एक मेहनतकश जाति है। महामना सर छोटूराम की जाति है। नमन 🙏🏽
सुधीर कोई कुत्ते की दुम नहीं है कि कभी सीधा नहीं होगा। उनने कहा है कि आरक्षण के खिलाफ नहीं बोलेगा तो आप सबको मान लेना चाहिए। लेकिन आपके मतदान के रुझान से लगता है कि आप लोग उसे माफ़ नहीं कर रहे हैं। मैं आप लोगों से नाराज़ हूँ।
आज काली पूजा है और हम लोग इस दिन बकरे की बलि देते हैं। गाँव में इतने बकरे कट गए कि क्या बताएँ कि कितने बकरे कट गए। सारे सिर पुजारी ले जाते हैं। ये अनादि काल से चल आ रही शाश्वत परंपरा है।
गाँव के एक दो गरीब परिवार बकरा नहीं ख़रीद पाते। उनको एक दो किलो कोई दयालु आदमी दे देता है। सबको मिलता है। एक भी परिवार भूखा नहीं रहता।
काली पूजा के दिन कोई हमें बलि से रोकने की कोशिश भी न करे। हम बर्दाश्त नहीं कर पाएँगे। पूरा पूर्वी भारत विद्रोह कर देगा।
जिस देश में अमूमन हर बलात्कारी का केस उसका परिवार लड़ता है, उनकी भावनाएं नीतीश कुमार के सेक्स एजुकेशन और महिला सशक्तिकरण के भाषण से आहत हो गई हैं।
इनकी समस्या ये है कि ये स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं महिलाएं भी बिस्तर पर कंट्रोल कर रही हैं। जबकि अब ये बहुत नॉर्मल बात है। इससे परिवार नियोजन हो रहा है।
बंद करो ये श्लील और अश्लील का फ़र्ज़ी नाटक वरना मैं बताऊँगा कि धर्म ग्रंथों में किस भाषा का प्रयोग हुआ है और मंदिरों में कैसी मूर्तियाँ हैं।
सिर्फ गीता प्रेस के पेज और फ़ोटो दिखा दूँगा तो कान फट जाएगा। कान लिखा है। कान ही पढ़ें।
एमके स्टैलिन के बाद मेरे दूसरे सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री। काम भी बहुत बढ़िया करते हैं। सामाजिक न्याय के प्रचंड समर्थक। डांस के स्टेप शानदार हैं। पूरी लय और ताल के साथ।
लेकिन संस्कृत तो मर चुकी है। उसकी लाश का अंतिम संस्कार भी हो चुका है। पूरे भारत में तुम किसी एक दुकानदार से संस्कृत में एक किलो नमक या आलू ख़रीदकर दिखा दो। भारत के सात लाख में से किसी गाँव का नाम संस्कृत में नहीं है। जो भाषा बोली ही नहीं जाती, वह भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत कभी नहीं बोली गई।
मैं चाहता हूँ इस विधानसभा चुनावों में कांग्रेस राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जीते। तेलंगाना में बीजेपी आए।
जानना चाहेंगे क्यों? ⤵️
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सुना है सत्ताधारी अब विपक्षियों के फ़ोन की जासूसी करवा रहे हैं। विपक्ष की बात सुनने से ज़्यादा अच्छा तो ये है कि सत्ताधारी ‘जनता की आवाज़’ सुन लें तो कम-से-कम उन्हें सुधार का कुछ मौका मिल जाए और फिर महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, ध्वस्त क़ानून व स्वास्थ्य व्यवस्था, महिला अपराध, युवाओं के रोष; ग़रीबों, दलितों, वंचितों, किसानों, मजदूरों के शोषण; जातीय जनगणना व सामाजिक न्याय जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कुछ सकारात्मक काम हो सके।
पता नहीं क्यों, पर सुना ये भी है कि उनके अपने दलवाले इस जासूसी से ज़्यादा डरे हैं।
सत्ताधारी काम करें, कान न लगाएं!
आप लोग तो क्रिकेट के जानकार हैं। बताइए कि श्रेयस अय्यर को सूर्य कुमार यादव से पहले बैटिंग क्यों कराई गई? सूर्य कुमार को हमेशा टेंशन में क्यों रखना है? वो टेंशन लेने वाला प्लेयर नहीं है। उसको टेंशन देने से टीम का क्या भला होगा? अय्यर लगातार छह मैच में नहीं चला तो भी टीम में रहेगा। सूर्या एक मैच में गया तो टीम में उसकी जगह हिल जाती है।
कोई धक्का मुक्की नहीं करेगा। आराम से बताइए। @BCCI आप भी बताओ।
पहले कश्मीर से एक गुजराती ठग के भाजपाई बनकर सरकारी सुरक्षा पाने की ख़बर आई थी, अब ऐसी ही ख़बर उप्र से एक इनामी अपराधी के विरूद्ध आई है, जो भाजपाई बनकर सुरक्षा व अन्य सुविधाएँ भोग रहा था।
ये एक गंभीर मुद्दा है, इस सरकारी लापरवाही का फ़ायदा और भी अधिक बड़े अपराधी उठाकर, बड़े अपराधों को अंजाम दे सकते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा आख़िरकार आम जनता को ही उठाना पड़ेगा।
अपराधियों को सुविधा और जनता को दुविधा, ये कैसा भाजपाई शासन-प्रशासन है?
मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 30-30 ब्राह्मणों को टिकट दिया है। ठाकुरों को भी लगभग इतना ही टिकट बाँटा गया है।
जहां एक तरफ़ इनके लिए लूट मची है, वहीं कुशवाहा को 4 और 3 तथा यादवों को 7-7 टिकट दिए।
ये क्या हिसाब हुआ?
लोधी को बीजेपी ने सिर्फ 11 और कांग्रेस ने 7 दिया। कुर्मी को बीजेपी ने 5 और कांग्रेस ने 8 टिकट दिए। बाक़ी ओबीसी जातियाँ और सस्ते में निपटा दी गई हैं।
एससी-एसटी को रिज़र्व सीटों से बाहर एक भी सीट नहीं।
आपको इन पार्टियों का खेल समझ में आ रहा है न??
सवर्ण तुष्टिकरण बंद करो।
मध्य प्रदेश के मतदाता जब तक इन दोनों दलों के सवर्ण उम्मीदवारों की जगह किसी और दल के उम्मीदवार को चुनना नहीं शुरू करेंगे तब तक वहाँ सामाजिक-राजनीतिक असंतुलन बना रहेगा।