>ब्रो का नाम संजीव झा है
>ब्रो पिछले 14 साल से बुराड़ी का विधायक है
>ब्रो आम आदमी पार्टी का बहुत बड़ा नेता है
>ब्रो पिछले 14 सालों में एक सड़क नहीं बनवा पाया
>ब्रो देश विदेश भर के मुद्दों पर लबर लबर करता है
>ब्रो अभी रोना रोने लगेगा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हैं
>ब्रो फिर रोना रोयेगा की MCD भी BJP की है
>ब्रो विक्टिम कार्ड पार्टी का योद्धा है
>ब्रो को जब खुरपेंच टीम ने एक्सपोज किया
>उसके बाद peek tv की पत्रकार भी विधानसभा कवर करने पहुंचीं हैं
>तमाम पत्रकार @Sanjeev_aap से सवाल पूछ रहे हैं
>ये व्यक्ति अब छिपा बैठा है
>खुरपेंच टीम का वादा है जब तक इनसे सड़क नहीं बनवा लेंगे तब तक इनको छोड़ेंगे नहीं
राहुल गांधी जब स्टूडेंट्स का मुद्दा उठाने प्रयागराज गए तब केरल में स्टूडेंट्स रोते हुए घास और मिट्टी खा रहे थे। राहुल गांधी झारखंड नहीं गए, केरल नहीं गए क्योंकि वहां उनकी ही पार्टी की सरकार है। प्रियंका गांधी भी स्टूडेंट्स का हाल पूछने केरल नहीं गईं, जबकि वो वहीं से सांसद हैं। #DoTook
एक रिपोर्ट देखी कि @CMOfficeUP ने विज्ञापनों पर किए खर्च में भारत सरकार को पीछे छोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर 24 दिन में 84 जगह सड़कों के टूटने की रिपोर्ट है। कहा जा रहा है कि निर्माता कंपनी भाजपा राज्यसभा सांसद के भाई की है।
यह दुर्भाग्य ही है कि जिन लोगों पर UPA2 ना हो जाने की आशा थी, वो इसी राह पर निकल रहे हैं। इसको कैसे डिफेंड किया जाए? एक सिंक-होल बनता है तो हम कह सकते हैं कि वर्षा में भूमि कहीं-कहीं खिसकती है, सामान्य है, पर हर नए एक्सप्रेसवे, हाई वे में आए दिन ऐसी समस्याएँ?
कैसे करें डिफेंड? गडकरी जी को भी मोदी जी छाती से चिपकाए वैसे ही घूम रहे हैं, जैसे प्रधान को लिए घूम रहे थे। जो लोग आलोचना करते हैं उन पर कुत्ते छोड़े जाते हैं इनकी कैंपेन बनाने वाली कंपनियों के माध्यम से।
PR से पब्लिक परसेप्शन नहीं बदलने वाला। अब भ्रष्टाचार की परतें उखड़ने लगी हैं, 'कीप काम एंड ट्रस्ट मोदी' के चक्कर में हज़ारों करोड़ के ढाँचे टूट रहे हैं क्योंकि वहाँ टेंडर के टर्म्स ऐसे किए जा रहे हैं कि एक ही कंपनी को मिले। कोएम्प्ट एडुटेक और CBSE OSM उसका बढ़िया उदाहरण था।
उसमे भी 'सिल्वर टच' का नाम आया था जिसे भाजपा के करीब माना जाता है। यह मोदी जी के व्यक्तिगत फेवरेट मंत्री जी के भी काफ़ी निकट के लोग हैं। इस कंपनी का एक काम सोशल मीडिया ट्रोलिंग भी है।
पर जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है। मैं नहीं कहता, गीता में लिखा है।
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
Give these people the fame they asked for.
Make these abusive videos go viral so their parents and relatives are forced to confront the result of their failed parenting and zero etiquette.
@umashankarsingh तुम जैसे लोगों की वजह से ये सब हो रहा है, अगर ये सब किसी भी कानूनी उलझन में फस गए न तो तू न कभी इन सबकी मदद करेगा और कोई नेता सिर्फ बच जाएंगे इन सबके माँ बाप जिनकी जिंदगी तुम सब बर्बाद कर रहे।
और ये छपरि साले कूल नज़र आ रहे
@JPNadda पहले तो थूक ही चाटते थे नड्डा,अब हगा हुआ भी चाटने लगे,
भाजपा का बेड़ा गर्क बहुत जल्दी होने वाला है। तुम सब नपुसंक हो चुके हो , मामला बढ़ाते हो फिर साले खुद ही रोने लगते हो
ये तो ज़बरदस्त ख़बर है! इस रिपोर्ट के मुताबिक़ @nitin_gadkari ने अपनी यात्रा के लिए सड़क ठीक करवा ली… या उनके नीचे काम करने वाले ठेकेदारों ने ठीक कर के दे दी? और गडकरी सैकड़ों किलोमीटर नाप लिए लेकिन दूसरी तरफ़ वाली सड़क पर नहीं झाँका? @narendramodi जी पढ़ा आपने?
@umashankarsingh@nitin_gadkari@narendramodi वह रे मंत्री जी , इनकी निगाह सिर्फ किसानों के जमीन पे रहती है कि कैसे सस्ते दामों में जमीन और किसानों की मर्जी के बिना कैसे जमीन ले जाये ,इनका मंत्रालय सबसे भ्रष्ट और निकम्मा मंत्रालय बन चुका है , अधिकारी और ठेकदार मिलकर पूरा सांठगांठ कर रहे और मंत्री जी रील में व्यस्त रहते है
नांदेड़ में इस धंसे पुल को आप ज़ूम करके देखेंगे तो
आपको साइट इंजीनियर साहब की ली हुई रिश्वत और सर्वेयर साहब की बीवी के झुमके क्रिस्टल क्लियर नज़र आएंगे।
उदयपुर SP लॉर्ड लिनलिथगो के पास फ़रियाद लेकर पहुंची एक बुजुर्ग महिला,
गोरे अंग्रेजों के समय भारतीयों को बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती थी, अच्छा है कि अब भूरे अंग्रेजों का समय है
>अधिकारियों को अहमदाबाद में गैर कानूनी इमारतें गिराने का आदेश मिला
>अधिकारीयों ने 3 दिन में 3 करोड़ खर्च कर दिए
>1.5 करोड़ JCB और ट्रैक्टर पर
>24 लाख वीडियोग्राफी पर
>23 लाख पीने के पानी पर
>27 लाख नाश्ते व अन्य
>अगर ये काम 20 दिन चल गया तो वर्ल्ड बैंक से लोन लेना पड़ सकता है