Amazing that instead of East Asia, AMD wanted to Make India its Semiconductor Manufacturing Hub and was investing 3 Billion$ in a Fab in India back in 2005 but it all fell apart just because,
When their Equipment came it got stuck at customs and wasn’t cleared leading to return!
Nirbhaya protests, the police crackdown was brutally aggressive, and I experienced it firsthand.
On the very first day, they unleashed water cannons and lathis at Raisina Hill, chasing and beating people all the way to India Gate’s middle circle.
The second day was even worse. Around 5 PM, when the barricades broke, police charged mercilessly. People scattered in pure panic toward Ashok Road, KG Marg, and Copernicus Marg. A huge group of us ran for our lives past Tilak Marg and the Supreme Court, with police chasing us right up to the old Times of India office at ITO (near the paratha spot), beating anyone they could reach.
That wasn't standard crowd control; it was pure brutality. Nobody who was on those streets that day will ever forget it.
दिल्ली पुलिस ही अराजक तत्वों और व्यवस्था के मध्य का अंतर है। आप @DelhiPolice को इस प्रदर्शन से हटा दो, यही अराजकतावादी, अपने ही साथ आई लड़कियों के रेप करने से नहीं चूकेंगे क्योंकि हर अराजकता का अंतिम शिकार स्त्रियाँ ही होती हैं।
पुलिस से हमें बहुत सारी समस्याएँ हो सकती हैं, पर दंगा नियंत्रण में जिस संयम का प्रयोग हमें दिख रहा है, वह अनुकरणीय है। कई शहरों में पुलिस को वाटर कैनन आदि का प्रयोग करना पड़ा है, पर यहाँ केवल माइल्ड लाठी चार्ज और आँसू गैस से अभी तक काम हुआ है।
उनके कर्मी चिकित्सालयों में घाव ठीक करवा रहे हैं। यदि बच्चे यह कह रहे हैं कि ‘कुछ लोग’ घुस गए हैं जो माहौल बिगाड़ रहे हैं, तो मेरा प्रश्न है कि तुम उन्हें स्वयं क्यों नहीं पकड़ रहे?
सत्य यह है कि बच्चों की संख्या 20% है और दंगाई 80%। योगेन्द्र यादव अपने खतना वाले लिंग पर हाथ रखे क्रांति की राह देखता स्खलित हो रहा है कि अब गिरी सरकार, तब गिरी सरकार। वह कह रहा है कि लोकतंत्र अब सड़क तय करेगा!
विद्यार्थियों को स्वयं के भीतर के कचरे को बाहर करना चाहिए। अब तो @narendramodi तक भी गर्मी पहुँची है, चुप्पी टूटी है। तुम्हारे नाम पर ये पत्थरबाजी, हिंसा सब लादे जाएँगे।
Highly Important.
I have been able to infiltrate a planned TOOLKIT, and it's extremely shocking to see the detailed planning and information about helpers.
I request you all to share it maximum.
Let's start to expose.👇
मोदी जी, स्वयं के अभिमान को बगल में रखिए, बोलिए!
गोपाल राय इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार हैं। सारा लॉजिस्टिक्स, योजना देख रहे हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन रामलीला मैदान तक पहुँचेगा। उन्हें रामलीला मैदान का अनुभव भी है, वो इसे लम्बा खींच भी लेंगे।
@BJP4India इनका कुछ न बिगाड़ पाई है, न बिगाड़ पाती दिखती है। ये न तो पंजाब में प्रदर्शनकारियों की पिटाई पर कुछ नैरेटिव बना पा रहे हैं, न केरल पर। न ये यह बता पा रहे हैं कि गहलोत और राहुल गाँधी किस मुँह से पेपर लीक पर बोल रहा है?
@narendramodi जी का व्यक्तिगत सम्मान/अहंकार/अकड़ वामपंथियों को अवसर दे रहा है कि वो इस बार शाहीन बाग और किसान आंदोलन के हायब्रिड मॉडल ला कर पूरे देश में ऐसे कॉकरोच पार्क बनवा देंगे। इसमें लोग मरेंगे, यह तय है।
बीच सत्र में मंत्री तो नहीं हटेगा, पर अब कॉन्ग्रेस अड़ गई है कि बिना उसके हम संसद में चर्चा नहीं होने देंगे। जब इनके अपने समर्थकों ने इनसे जनवरी से यही बात कही, तो ये चिढ़ा रहे थे कि गुजरात निकाय चुनाव जीत गए, बंगाल में 208 आ गया।
19 जुलाई तक मुझे विश्वास था कि इसे सरकार नियंत्रित कर लेगी, पर सरकार की नपुंसकता ने पुलिस को लाल किला वाली पिटाई याद दिला दी। हर तरफ पुलिस पर हो रही बर्बरता के चिह्न दिख रहे हैं।
‘@AmitShah भूलते नहीं’, यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है। नक्सली गतिविधियों को, कश्मीर को, NGO गिरोह को साधने में बहुत बड़ा रोल रहा है इनका। परंतु, उसके समानांतर CAA, किसान आंदोलन जैसी विफलताएँ भी हैं।
@PMOIndia में लोग हैं, @anil_baluni जैसे मँजे हुए मीडिया मैनेजर हैं सरकार के, क्या आप लोगों को लगता नहीं कि पीएम का एक ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ इस पूरी व्याधि को समाप्त कर देगा?
“मेरे प्यारे देशवासियो!
पिछले दिनों में विद्यार्थियों के नाम पर जो हो रहा है, उससे मुझे बहुत पीड़ा हुई है। विद्यार्थियों के हितों के लिए मैं उनके परिजन की तरह, पिता की तरह प्रतिबद्ध हूँ। मैं यह मानता हूँ कि पेपर लीक एक बहुत बड़ी समस्या है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है।
हम यह भी जानते हैं कि पेपर लीक की व्यापकता किसी एक सरकार से परे है। अतः हम शीघ्र ही देश के हर शिक्षा मंत्री के साथ, ब्यूरोक्रेसी के साथ एक वृहद चर्चा कर के, इसका समाधान निकालेंगे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मेरा व्यक्तिगत दायित्व है कि हम अपने बच्चों को एक स्वस्थ तंत्र दें।
हमने यह भी तय किया है कि 2024 में लाए पेपर लीक कानून को संशोधित कर, इस माफिया की जड़ तक जाएँगे। अब न केवल कंपनी, बल्कि हर व्यक्ति भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
ब्ला ब्ला ब्ला…
नमस्कार!”
तत्पश्चात्, दो-चार बड़े अधिकारियों को (CBSE चेयरमैन, NTA डायरेक्टर आदि) को सेवामुक्त करें, जाँच बिठाएँ। यदि नहीं किया तो, चापलूस आपको ‘मोदी-शाह पुराने नेता हैं’ का सुगम संगीत सुना कर बर्बाद कर देंगे।
बाकी, आप बेहतर जानते हैं।
The protests that are coming soon to a street near you in Modi 3.0 in the coming months:
1) NEET related protests
2) IMA doctors protests
3) Farmer protests
4) Muslim led protests (for Palestine but soon against Adani and Modi using fake news)
5) Khalistani related protests mostly outside India
More are planned for later for the next years.
चूँकि मेरे दिए गए समाधान न तो जनवरी में माने गए, न फ़रवरी में (नीचे कमेंट में), और आज पुनः हम उसी मोड़ पर हैं जहाँ भाँग खाने वाले सलाहकारों और पे-रोल पर पलने वाले चापलूस 'कीप काम एंड ट्रस्ट मोदी' का जाप कर रहे हैं, मैं फिर भी पतितों की तरह कुछ समाधान बिंदु लिख रहा हूँ।
यह मैं इसलिए नहीं करता कि कोई इसे पढ़ कर अपनी अंतरात्मा जगा लेगा या सरकार मेरी बात मान लेगी, ये मैं केवल डॉक्यूमेंटेशन के लिए लिखता हूँ कि मैं केवल समस्या बताने वालों में से नहीं था, बल्कि मैं समाधान भी दे रहा था।
1. PM को सामने आ कर विद्यार्थियों, उनके परिजनों से सीधे बात करनी चाहिए। वहाँ स्वीकारिए कि यह समस्या है और सरकार उसे अभी तक केवल आंशिक रूप से सही कर पायी है, वृहद समाधान में समय लगेगा, और आप तत्परता से उस पर कार्य कर रहे हैं। क्या कर रहे हैं, उसकी एक झलक भी दिखाएँ/बताएँ।
2. अब धर्मेंद्र प्रधान को हटाना उचित नहीं लगता क्योंकि यदि अभी ऐसा होता है तो 'जो सबसे लंबा अनशन करेगा, उसके हिसाब से मंत्री हटाए जाएँगे' की एक परिपाटी बनेगी। वो हटे, पर अभी तो बिल्कुल नहीं। बात यह नहीं है कि कॉकरोच की डिमांड क्या है, बात यह है कि 28 करोड़ लोगों के द्वारा चुनी सरकार को अराजकतावादियों के हिसाब से मंत्री नहीं बदलना चाहिए। समर्थकों के कहने पर नहीं हटाया तो इन पर तो बिल्कुल नहीं।
3. चाहे NEET हो, SSC हो या अन्य परीक्षा, इसे ऑब्जेक्टिव तक ही सीमित ना रख कर इसका एक-दो चरण ऐसा हो कि केवल MCQ ही उनका भविष्य तय ना करे। बोर्ड तक उसकी सतत समझ की क्षमता के साथ साक्षात्कार आदि को भी डाला जाए या IIT की तरह उसे भी बड़ा बनाया जाए। यदि यह संभव ना हो तो आप IIT या UPSC से सीखें कि उनकी परीक्षा के प्रश्न लीक क्यों नहीं होते।
4. हर कोचिंग संस्थान, विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता की नियुक्ति अनिवार्य की जाए ताकि हर 40 मिनट में एक विद्यार्थी आत्महत्या ना करते रहें।
5. हर विभाग का परीक्षा कैलेंडर (हर चरण का दिन पूर्व निर्धारित) हर वर्ष निकले और परीक्षा केंद्र छात्रों की सहजता के हिसाब से हो ना कि रैंडम। अभी ऐसी स्थिति है कि सेंटर अनावश्यक रूप से 4-500 किलोमीटर दूर तक दे दिए जाते हैं। इसका कोई तर्क नहीं होता।
6. पेपर लीक से जुड़ी फर्म ही नहीं, उनसे जुड़े व्यक्ति और उनके परिजन तक ब्लैकलिस्टेड होने चाहिए कि ये लोग इसी व्यवसाय में पुनः कहीं से भी नहीं आ सकते। यदि कोई सरकारी व्यक्ति पैसा खा कर ऐसा कुछ भी करता है, उन्हें कोई टेंडर आदि दे देता है तो उस पर देशद्रोह का केस चले और न्यूनतम 20 वर्ष का दंड हो।
7. ऐसे अपराध से जो जुड़े हों, उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अपना ट्रिब्यूनल हैंडल करे और ऐसी सुनवाई 'इन कैमरा' होने के स्थान पर 'ऑन कैमरा' सार्वजनिक रूप से हो। इसे एक तय समयसीमा में निपटाने की बाध्यता हो। यदि यह सार्वजनिक नहीं होता तो फिर से हर चीज मैनेज हो जाएगी और इसका कोई महत्व नहीं रहेगा।
8. इस नौटंकी आंदोलन में जो भी हैं, एक-एक को चिह्नित कर, उनका उदाहरण बनाया जाए। हाँ, कुछ वास्तविक विद्यार्थी भी होंगे, तो उन्हें काउंसलिंग के साथ छोड़ दिया जाए, परंतु अराजक तत्वों को, यदि वो किसी पार्टी से हैं, 18 वर्ष से ऊपर के हैं, तो उन्हें जेल में डाला जाए, उन्हें जीवन में कोई नौकरी ना मिले यह सुनिश्चित किया जाए और यह हर हिंसक आंदोलनकारी को बताया जाए कि प्रदर्शन का अधिकार है, आगजनी और हिंसा का नहीं।
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और भी कुछ सुझाव होंगे, परंतु अभी इतना ही। सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी पर 'दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है' के लिए मैं यह लिख रहा हूँ।
मैंने लिखा था कि इस पोस्ट पर भी तीन महीने में नोटिस आ जाएगा और चार महीने बाद आ ही गया। @samrat4bjp जी, ऐसे छुईमुई बन कर सरकार चलाएँगे आप? कुछ नहीं मिल रहा है तो नोटिस की आलोचना में किए गए ट्वीट पर नोटिस? @bihar_police आप लोगों को सच में कोई काम नहीं है?
भरत तिवारी केस के बाद आपका निकम्मापन पूरा देश देख रहा है। सम्राट चौधरी को योगी बनने की जो जल्दी है, वही उनको डुबोएगी। एक ढंग का काम नहीं करना है, बस बकलोली करते रहे। तुम नोटिस मत भेजो, केस करो और मैं देखता हूँ कि देश की कौन सी कोर्ट में इस बकलोली को तुम डिफेंड कर लोगे।
Turns out the judge was not only running the gas agency, his business contract was being renewed all through his tenure as a judge and chief justice.
And all this was happening right under the nose of the Supreme Court, that punished NCERT for a chapter on judicial corruption.
तुकाराम नाम में ही कुछ बात है! संत तुकाराम जी से ले कर तुकाराम ओंबले जी ने जो देश पर उपकार किया, और अब महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम जी!
एक सत्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण IAS अधिकारी जिसे 21 वर्ष में 25 ट्रांसफर मिले, आज पूरे देश में ख्याति पा रहा है। मिलावटी लोगों को बाँस कर रखा है इन्होंने और लोग भय के मारे मिलावटी सामान स्वयं नष्ट कर रहे हैं।
He's Tukaram Mundhe, a 2005-batch IAS from Maharashtra.
Over the last few weeks, you might have heard his name. That is because he was recently appointed Commissioner of State’s Food and Drug Administration (FDA). Since taking charge, the FDA has been on an absolute warpath, raiding illegal, fake, synthetic, and adulterated products. From synthetic milk networks and adulterated paneer to illegal gutkha and unhygienic eateries, nothing has escaped his radar.
Mundhe has made it clear that even the most famous names will not get a free pass. His department shocked Mumbai by suspending the food licenses of iconic establishments, such as the 73-year-old Marine Drive ice cream parlor K. Rustom & Co., alongside famous eateries like Shalimar Hospitality, Noor Mohammadi Hotel, and Rahmaniya Restaurant, after surprise inspections uncovered severe hygiene violations, including live pests and expired ingredients.
Such is the fear of his crackdowns that, just two days ago, dairy farmers were caught on video spilling hundreds of liters of synthetic milk after rumors of an impending FDA raid spread.
This is his 25th transfer in a 21-year career, a testament to his refusal to bend to political pressure. It makes you wonder: if just one IAS officer can bring about so much change, where would our country be if every bureaucrat were as uncompromising and proactive as him?
Two days ago, a video circulated on social media showing doodh-daatas in Maharashtra spilling their milk after a rumor of an FDA raid spread.
I wondered what they could have adulterated the milk with to make them get rid of it in such a panic over a mere rumor. I initially thought it might just be water or milk powder, but there had to be more to it.
Yesterday, the Maharashtra FDA uncovered a massive synthetic milk racket, with an estimated 2.3 crore liters of fake milk manufactured using detergent powder and chemicals like sodium bicarbonate.
By now, you probably have a clear idea of how much these ann-daatas, doodh-daatas, and fal-sabzi-daatas truly care about your health. That's why it's our responsibility to support every policy made that apparently benefits these daatas, even if it means putting ethanol in your non-compliant car. Don't complain. Just do it. Long live daatas.
दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपितों में से एक, आआपा पार्षद ताहिर हुसैन, जिसके बिना-खिड़की वाले भवन से आस-पास के हिंदू घरों पर पत्थरबाजी, पेट्रोल बम फेंकना और टाइल से बारात पर आक्रमण करने का कार्य हुआ था, आज कोर्ट द्वारा IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के लिए दोषी पाया गया है।
यह निर्णय छः वर्षों के बाद आया है, पर आया तो है। मुझे वह पूरा दंगा चलचित्र की तरह याद है।
एक बकलोली चल रही है इथेनॉल को लेकर कि हम जो अमेरिका से आयात करते हैं, उसका एक प्रतिशत भी ब्लेडिंग में प्रयोग नहीं होता।
भाई, ये दो कौड़ी का तर्क है। 2021 से 2025 तक, 720, 550, 460, 600, 1000 मिलियन लीटर इथेनॉल भारत ने इम्पोर्ट किया। तो तुम्हारा घरेलू उत्पादन ब्लेंडिंग के लिए लॉक्ड होने से, इम्पोर्ट बिल तो नहीं घट रहा?
ये केवल शब्दों का खेल है जो @nitin_gadkari@HardeepSPuri खेल रहे हैं और भारत मंडपम काजू खाऊ गिरोह उसे आँख मूँद कर प्रचारित कर रहा है। क्रूड का इम्पोर्ट बिल कम करो, पर इथेनॉल इम्पोर्ट बिल 177% बढ़ जाए, वो तो हम डॉलर में नहीं लेते!
अंततः, जब तुम इम्पोर्ट बिल घटाना चाह रहे हो, तो ये क्या बकलोली हुई कि ये अमेरिका वाला इथेनॉल है और ये भारत वाला? इम्पोर्ट तो हो ही रहा है न?
Hello @TheJaggi, I am told you are the editorial director of @SwarajyaMag. I have a few questions for you:
1. How do you allow such morons to publish hit-jobs on people like me who are fighting to make people accountable, be it governance or temple administration?
2. Why your staff writers can’t proceed without prejudice while targeting me over one tweet (among over a dozen on Ram Mandir), which they can’t prove to be untrue?
3. Why can’t your writers do basic research if they are naming a person in headline with ‘ignored the Ram Mandir Scandal’? Had they done so, they would find 18 2-3 hour long live streams on Ram Mandir, 7 Point Blank satire episodes and over a dozen tweets.
4. When I am available on call or email, why didn’t the writer contact me to know my version? Just a quick comment on why I wrote, what I wrote? Does that not sound a proper way to write an article targeting someone?
But I think that’s the last thing one would do when you hunt for views & virality, which ironically the writer pins on me!
I would suggest you to pull down the article, or include the data on my live-streams and tweets, make it better. If you don’t do either, I would be forced to consider other options.
Cancer patient was about to die. She pleaded. Her plea has been listed 57 times. The court has still not heard it. Teesta Setalvad was about to be jailed. She pleaded. Her plea was listed out of turn. The court heard it at midnight.
Cancer patient is dead. Teesta is alive.
‘किसानों से खरीदा गया इथेनॉल’? किसानों ने कब से डिस्टिलरी डाल दी पुरी जी? कुछ भी बोलोगे क्या? किसान को गन्ने का दाम मिलता है, मक्के का मिलता है, चावल का मिलता है, उसे इथेनॉल का दाम नहीं मिलता।
इथेनॉल के लिए उपजाए गन्ने, चावल या मक्का को किसी विशेष मूल्य पर अलग से नहीं लिया जाता। मंत्री यहाँ शब्दों से खेलते हैं। फिर कोई FAQ रिलीज होता है, मीडिया उसी को रिपीट करती है, फॉलोअप प्रश्न पूछे नहीं जाते, मंत्री अपनी ही क्लिप स्वयं शेयर करते हैं।